सरयू राय ने सीएम को लिखी चिट्ठीः "इरादों में ईमानदार नहीं रहनेवाली राजबाला वर्मा" को मंत्रिपरिषद की विज्ञप्ति में उत्कृष्ट, कुशल व दक्ष प्रशासक बताये जाने पर आपत्ति जतायी

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 03/12/2018 - 16:40

Ranchi: एक बार फिर से खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सीएम को चिट्ठी लिखी है. चिट्टी में मंत्री ने साफ तौर से कहा है कि जो बात मंत्रीपरिषद की बैठक में हुई नहीं है, उसे कैसे मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रचार टीम ने मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया. दरअसल छह मार्च को हुए मंत्रीपरिषद की बैठक में कैबिनेट ब्रीफिंग के बाद पत्रकारों के सामने कैबिनेट ब्रीफ करने वाले गृह सचिव सह कैबिनेट सचिव एसकेजी रहाटे ने कहा था कि बैठक के दौरान राजबाला वर्मा, भारतीय प्रशासनिक सेवा, 1983 बैच के अधिकारी, जिन्होंने 35 वर्षों की सेवा के बाद 28 फरवरी 2018 को सेवा निवृत्त हुई. उनको एक कुशल एवं दक्ष प्रशासक के रूप में तथा मुख्य सचिव के पद पर सराहनीय एवं उत्कृष्ट कार्य करने तथा अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के लिए मंत्रिपरिषद ने आभार प्रकट किया तथा उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी गयीं”. इसी बात को लिखित में बाद में पीआरडी विभाग ने भी सभी मीडिया हाउस को मेल और सोशल मीडिया के जरिये भेजा. पीआरडी की इस प्रेस विज्ञप्ति को सभी अखबारों ने अपने यहां जगह दी. सरयू राय ने पत्र की प्रति मंत्रिपरिषद के सभी नौ मंत्रियों को भी भेजी है.

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क्या कहा है मंत्री सरयू राय ने

पूर्व सीएस राजबाला वर्मा के बारे कहे गये उन शब्दों पर मंत्री सरयू राय ने सवाल उठाये हैं. उन्होंने कहा है कि उस बैठक में वो भी मौजूद थे, जहां तक उन्हें पता है कि मंत्रीपरिषद की बैठक में इस तरह की कोई बात नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि नवनियुक्त सचिव ने बैठक के दौरान जो कुछ कहा उसकी हरगिज मतलब वो नहीं है, जो मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रचार टीम ने मीडिया के सामने प्रचारित किया. चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि जब मंत्रीपरिषद की बैठक में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है तो कैसे पीआरडी की टीम ऐसा प्रचार कर सकती है. ऐसा करने के बाद क्यों नहीं पीआरडी की टीम के जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की जाये. साथ ही कहा कि सेवा निवृत हो चुकी मुख्य सचिव को उनके 35 वर्षों के कार्यकाल के लिए महिमामंडित करने वाला इस आशय की भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी. इतना ही नहीं मंत्री सरयू राय ने राजबाला वर्मा के पूरे कार्यकाल के बारे में चिट्ठी में लिखा है. पटना, गया से लेकर मुख्य सचिव के तौर पर राजबाला ने कौन-कौन से उत्कृष्ट काम किये उन सबके बारे में सरयू राय ने चिट्ठी में लिखी है. पाठकों के लिये न्यूज विंग पूरी चिट्ठी को हु-ब-हु खबर में डाल रहा है.

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मंत्री सरयू राय द्वारा लिखे गये पत्र का पहला पन्ना

पढ़िये, मंत्री सरयू राय ने पत्र में क्या-क्या लिखा हैः....
माननीय मुख्यमंत्री, 
सरकार द्वार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानो से की जा रीह धान खरीद की समीक्षा करने के लिये मैं दिनांक 12 से 16 मार्च 2018 तक संथाल परगना प्रमंडल के भ्रमण पर हूं. इस बीच मंगलवार दिंनाक 13.01.2018 को राज्य मंत्रिपरिषद का बैठक  हो सकती हैं, जिसमे मैं उपस्थित नहीं रह सकूंगा. इसलिए एक लिखित निवेदन आपके औऱ मंत्रिपरिषद के विचारार्थ भेज रहा हूं. जो निम्नवत है. इसमें उद्दत तथ्य प्रमाण पर आधारित हैं. जनहित, राज्यहित और सरकार हित मे विचारपंरात अधोहस्ताक्षरी का यह तथ्य आधारित निवेदन मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकार किये जाने की प्रार्थना हैं 
                             -निवेदन-
विगत 6 मार्च 2018 की मंत्रीपिरषद की बैठक मे लिये गये निर्णयों के बारे मे “मुख्यमंत्री सचिवालय से संबद्ध जनसंपर्क विभाग की टीम” ने समाचार माध्यमों में प्रकाशनार्थ/प्रसारणार्थ एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है. जिसमें छाया प्रति संल्गन हैं. इस विज्ञप्ति के अंत मे अन्यान्य शीर्षक के तहत उल्लेख किया गया हैं कि “श्रीमति राजबाला वर्मा भारतीय प्रशासनिक  सेवा,1983 बैच के अधिकारी जिन्होंने 35 वर्षें की सेवा के बाद 28 फरवरी 2018 को सेवानिवृत हुई को कुशल एवं दक्ष प्रशासक के रुप में तथा मुख्य सचिव के पद पर सराहनीय़ एंव उत्कृष्ट कार्य करने तथा अपने  दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के लिये मंत्रिपरिषद ने आभार प्रकट किया तथा उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनायें दी”.

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मंत्रिपरिषद की बैठक में आभार व्यक्त नहीं किया गया था
जहां तक मुझे स्मरण है कि सेवानिवृत मुख्य सचिव के प्रति आभार व्यक्त करने का इस तरह का औपचारिक निर्णय उस दिन की मंत्रीपरिषद का बैठक में नहीं हुआ. नवनियुक्त मुख्य सचिव ने अपने स्तर से जो कुछ बैठक के अंत मे कहा उसका आशय वैसा कुछ भी नहीं था जैसा की इस प्रेस विज्ञप्ति मे उल्लेखित है. फिर किस आधार पर औऱ किसके निर्देश से “मुख्यमंत्री सचिवालय से संबद्ध पीआरडी टीम” ने सेवानिवृत हो चुकी मुख्य सचिव को इनके 35 वर्षों  के कार्यकाल के  लिये महिमामंडित करने वाला इस आश्य की भ्रामक प्रेस विज्ञाप्ति जारी की गई ? क्या यह इस टीम की अनाधिकार चेष्टा नहीं हैं ? क्या ऐसे भ्रामक  अमर्यादित  अवांछित एंव अशोभनीय कृत्य  के लिये जिम्मेदार व्यक्ति को चिन्हित कर उसके विरुध कार्रवाई सुनिश्चित नहीं का जानी चाहिये ?

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मंत्री सरयू राय द्वारा लिखे गये पत्र का दूसरा पन्ना

मंत्रिपरिषद की ओर से जारी आभार के शब्द घोर आपतिजनक व अवांछित
इस प्रेस विज्ञाप्ति में सेवानिवृत मुख्य सचिव के महिमामंडन के लिये मंत्रीपरिषद की ओर से विगत 35 वर्ष की सेवा मे ( केवल मुख्य सचिव के कार्यकाल की अवधि में नहीं) उनके लिये कुशल दक्ष सराहनीय उत्कृष्ट, निष्ठापूर्वक आदि जिन शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रचार टीम ने किया है, उनके अर्थ औऱ भाव से तथा इस प्रसंग में मंत्रिपरिषद की गरिमा से इस प्रचार टीम संभवतः अवगत नहीं है. एक विवादास्पद अधिकारी के प्रति अपने उपकृत मनोभाव को प्रदर्शित करने के लिये इस टीम के द्वारा मंत्रीपरिषद के मुंह से ऐसी शब्दावली अभिव्यक्त करवाना घोर आपतिजनक  है. यह मंत्रिपरिषद  की मार्यादा के प्रतिकुल है.  इसके लिये टीम के जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिये. भविष्य मे मंत्रिपरिषद बैठकों की कार्यवाही के बारे मे प्रेस विज्ञप्ति जारी करते समय पर्याप्त सावधानी बरतने की चेतावनी भी इस अथवा ऐसी किसी प्रचार टीम को दी जानी चाहिये. इनके प्रति 35  वर्षो के सेवाकाल में गुण–दोष का मूल्यांकन दिये बिना इसकी सराहना करने और इसके प्रति अभार व्यक्त करने संबंधी प्रेस विज्ञप्ति जारी करना, वह भी मंत्रिपरिषद की ओऱ से, घोर आपतिजनक है, अवांछित है, एसा करने वालो को शायद मंत्रिपरिषद की गरिमा का ख्याल नही हैं.

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माफियानुमा कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिला

जिस अधिकारी को सेवा कार्यकाल अप्रत्याशित रुप से विवादास्पद रहा है, जिसके प्रशासनिक आचरण में संवेदनशीलता का अभाव रहा है, जिसके विरुद्ध नियम-कानून की दंडनीय अवहेलना जान-बूझकर करने का पुष्ट प्रमाण है. एकीकृत बिहार के समय भ्रष्ट एवं घोटाला के आरोपी शार्ष पदाधिकारी राजनितिज्ञों को प्रति जिसका समर्पन भाव जगजाहिर है. जिसने पशुपालन घोटाला के विरुद्ध आंदोलनरत भाजपा कार्यकर्ताओं को उस समय प्रताड़ित किया है. जिसने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद पशुपालन घोटाला के मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी में बाधा डाला है. जिसके कारण सीबीआई को सेना से मदद की गुहार करनी पड़ी. घोटाला के मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर पटना के बेउर जेल भेज दिया गया, तो जिसने संवैधानिक एवं प्रशासनिक मर्यादा की अवहेलना कर अभियुक्त की सहानुभूति में बेउर जेल गेट पर करुण क्रंदन किया. चुनाव आयोग ने गया में जिला अधिकारी के रुप में जिसके आचरण के विरुद्ध सख्त टिप्पणी की है और जिसे भविष्य में चुनाव कार्य में भाग लेने से मना किया है. मुख्य सचिव रहते जिसने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं भारत सरकार के निर्देश के उलट प्रशासनिक निर्देश जारी किया है. जिस कारण हजारों लाभुकों का राशन कार्ड रद्द हो गया. कल्याण मंत्री की अवहेलना कर जिसने संचिका पर मनमाना आदेश दिया है, जिसका जिक्र गत सितंबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष होने पर मंत्री ने यह आदेश रद्द किया.

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पत्र की प्रति मंत्रिपरिषद के सभी मंत्रियों को भी भेजी.

इरादों में ईमानदार नहीं राजबाला वर्मा

पथों की चौड़ीकरण (विशेष कर गुवा-सलाई पथ का चौड़ीकरण) के लिए जिसने फर्जी सर्वेक्षण पर मुहर लगाया है और संबंधि नियम-कानून की अनदेखी किया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जिसके विरुद्ध “इरादों में इमानदार नहीं होने” की टिप्पणी की है औऱ कहा है कि संवेदक भी इस बेइमानी का हिस्सा है. जिसके कार्यकाल में कार्य विभाग के ठेकों को मैनेज करने के दंडित किये जाने योग्य आरोपी अभियंताओं-अफसरों को प्रश्रय मिला है एवं लोक निधि का अपव्यय करने वाली माफियानुमा कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिला है. उपर से लेकर नीचे तक का प्रशासनिक ढ़ांचा चरमरा गया है. पुलिस और प्रशासन का शीर्ष स्तर खेमेबाजी का शिकार हो गया है, प्रशासन का डिलिवरी सिस्टम पंगु हो गया है,  विधानसभा की प्रत्यायुक्त विधानसमिति के प्रतिवेदन 2013-14 में जिस पर गंभीर प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज है, वैसे अधिकारी को सेवानिवृति पर उसके प्रति उपर्युक्त शब्दों में मंत्रिपरिषद द्वारा उसके संपूर्ण कार्यकाल के लिए सराहना करने एवं आभार प्रदर्शित करने का समाचार प्रकाशित होने से जन मानस में मंत्रिपरिषद की छवि धूमिल हुई है. एसा करने वाले और उन्हें एसे कराने का आदेश देने वाले निश्चित रुप से दंड के भागी हैं. उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में अधोहस्ताक्षरी द्वारा इनके विरुद्ध मुख्यमंत्री को सौंपे गये सप्रमाण ज्ञापनों पर अभी तक कार्रवाई लंबित है. 
अनुरोध है कि मंत्रिपरिषद के निर्णय को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाली इस मनगढ़ंत प्रेस विज्ञप्ति को जारी करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाये तथा इस विज्ञप्ति के उपर्युक्त भ्रामक अंश को मंत्रिपरिषद की उस दिन की कार्यवाही से बाहर किया जाये और इस पर मेरी असहमति अंकित की जाये.

सरयू राय

 

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