चतरा एसपी के तबादले को लेकर रांची की दौड़ लगा रहे टीपीसी के उग्रवादी और उससे जुड़े कोयला कारोबारी

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 05/05/2018 - 12:54

Ranchi: चतरा के एसपी अखिलेश बी वारियर की वजह से उग्रवादी संगठन टीपीसी और उससे जुड़े कोयला के कुछ कारोबारियों की परेशानी बढ़ गयी है. टीपीसी और कोयला कारोबार से जुड़े कुछ लोग इन दिनों रांची की दौड़ लगा रहे हैं. खबर है कि टीपीसी से जुड़े कोयला कारोबारी चार मई को रांची में जुटे थे. यहां एसपी के तबादले को लेकर करोड़ों रुपये तक खर्च करने पर विचार किया गया. इसके लिए चंदा करने का भी निर्णय लिया गया. जो लोग एक साथ बैठे थे, उनमें एक पूर्व मंत्री, टीपीसी से जुड़े विनोद गंझू, अर्जुन गंझू समेत अन्य लोग शामिल थे.
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प्रतिमाह 10 करोड़ से अधिक की वसूली करता है टीपीसी

जानकारी के मुताबिक टीपीसी के उग्रवादी टंडवा के आम्रपाली, मगध और पिपरवार इलाके में कोयला ट्रांसपोर्टिंग करने वाले व्यापारियों से लेवी की वसूली करता है. डर के कारण कुछ कोयला कारोबारी भी टीपीसी की हां में हां मिलाने को मजबूर हैं. हर माह 10 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जाती है. वर्ष 2015 के बाद से अब तक चतरा जिला की पुलिस से लेकर पुलिस मुख्यालय और मुख्य सचिव तक के अधिकारी तक ने सिर्फ जांच कराने की बात कही. एसआईटी गठन का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया. लेकिन जांच नहीं करायी गयी. चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि जिन अफसरों को खुद एसआईटी गठित कर जांच करने का आदेश देने का अधिकार है, वह भी सिर्फ अनुशंसा ही भेजते रहें. 

तब हटा दिये गये थे अनिल पाल्टा

 वर्ष 2015 में तत्कालीन एडीजी अभियान अनिल पाल्टा ने टंडवा में कोल ट्रांसपोर्टरों से वसूली करने वाले उग्रवादी संगठन टीपीसी और उसके लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की थी. तब कुछ ही हफ्ते में उन्हें पद से हटा दिया गया था. जिसके बाद टीपीसी के उग्रवादियों और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी बंद कर दी गयी थी. तब भी यह बात चर्चा में आयी थी कि अनिल पाल्टा को हटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये गये थे.

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अखिलेश बी वारियर ने आते ही शुरु की कार्रवाई

इस बीच करीब पांच माह पहले सरकार ने अाईपीएस अखिलेश बी वारियर को चतरा का एसपी बनाया. श्री वारियर ने योगदान देने के साथ ही लेवी वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की. इस क्रम में टंडवा थाना में 52 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी. हालांकि इस प्राथमिकी में अभियुक्त बनाये गये कुछ कोयला कारोबारी व कुछ ग्रामीण बेकसूर भी हैं.  इसे लेकर कई जगहों पर एसपी की आलोचना भी हो रही है. लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से लेवी वसूली में शामिल लोगों में हड़कंप मचा हुआ है. परेशान वे लोग भी हैं, जो कोयला की कालेबाजारी के धंधे में भी शामिल हैं.

नहीं रुक सकी वसूली

चतरा एसपी के कड़े तेवर के बाद भी टंडवा में लेवी की वसूली बंद नहीं हुई. वसूली का तरीका बदल गया है. वसूली करने वाला आदमी बदल गया है. अब सीधे कंपनियों से पैसा लेकर टीपीसी तक पहुंचाया जा रहा है. इसकी वजह यह बतायी जा रही है कि एसपी के नीचे के कुछ पुलिस अफसर लेवी वसूलने वाले से मिले हुए हैं. यही कारण है कि पिछले दिनों मुख्यालय ने चतरा के सभी कनीय अफसरों को बदलने पर विचार किया. लेकिन आदेश नहीं  निकला. बाद में यह शिकायत मुख्यमंत्री तक भी पहुंची कि चतरा पुलिस के कनीय अफसर लेवी वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ तो ढ़ंग से कार्रवाई कर नहीं रहें हैं और जो लोग मजबूरी में टीपीसी को सहयोग कर रहें थे या लेवी दे रहें थे, उन्हें तंग किया जा रहा है. इस शिकायत के बाद पुलिस मुख्यालय के आदेश पर टंडवा के इंस्पेक्टर मदन मोहन सिंह को थाना से हटा दिया गया. 

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