ब्याज पर पैसे उधार लेकर राशन लाने को मजबूर हैं ग्रामीण, DBT को लेकर मन में है आक्रोश, 26 फरवरी को सामूहिक मार्च का ऐलान (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/16/2018 - 11:36

Pravin Kumar

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की महत्वाकांक्षी परियोजना डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पायलट प्रोजेक्ट का नगड़ी में ट्रायल फेल होता दिख रहा है. वहीं आम लोगों के मन में इस नई व्यवस्था के प्रति नराजगी स्पस्ट रूप से दिखाई दे रही है. करीब साल भर पहले इस पायलट प्रोजेक्ट को रघुवर सरकार ने डिजिटल कैशलेश स्कीम के तहत ट्रायल के तौर पर शुरू की थी. तब इसके बारे में कहा गया था कि अगर डीबीटी का ट्रायल नगड़ी में सफल हो जाता है, तो इसे पूरे झारखंड के पीडीएस सिस्टम के साथ लागू किया जायेगा.

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लोग यह नहीं चाहते हैं कि पीडीएस के साथ डीबीटी सिस्टम झारखंड में कहीं और भी लागू हो

लेकिन साल भर पहले से अब तक डीबीटी पायलट प्रोजेक्टस से नगड़ी के 12000 लाभुकों ने यहां जो अनुभव चखा है, उसके बाद यहां के लोग यह नहीं चाहते हैं कि पीडीएस के साथ डीबीटी सिस्टम झारखंड में कहीं और भी लागू हो.

हर काम में होती है देरी

नारो बांध टोली की पूनम देवी का कहना है कि बैंक, प्रज्ञा केंद्र और राशन दुकान का चक्कर लगाकर राशन लेने में 6-7 दिन लग जाते हैं. बैंक से बैलेंस चेक करने में कई दिन लग जाते हैं और पैसे निकालने में कई दिन लगते हैं. पैसे निकालने में बहुत बार लिंक फेल मिलता है. बैक में पैसा आया है कि नहीं इस बात को पता लगाने में भी 10 रूपये खर्च करने पड़ते हैं.

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पीडीएस से डीबीटी जुड़ने से होने वाली  परेशानियां

- नगड़ी प्रखंड में 12000 डीबीटी से जुड़े लाभुक हैं, बैंकों में हर रोज सुबह 7 बजे से भीड़ लगती रहती है. बैलेंस पता करने और पैसे निकालने में कई दिन लग जाते हैं.

- अक्सर बैंकों में लिंक फेल रहता है, इससे लाभुकों को कई दिनों तक बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. बैंक का काम के लिए पूरा एक दिन लगता है.

- अकाउंट में पैसे ट्रांसफर के बाद भी एसएमएस नहीं आता.

- लोगों को बैंक, प्रज्ञा केंद्र और राशन डीलरों के चक्कर काटना पड़ता है.

- प्रखंड के कई गांव बैंक से 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर हैं.

- लोगों के पैसे और समय दोनों की बर्बादी हो रही है. 

क्या है डीबीटी जन वितरण प्रणाली में

डीबीटी सिस्टम के तहत लाभुकों को फूड सब्सिडी की राशि सीधे उनके खाते पर भेजी जाती है. जिससे वह सीधे राशन दुकान से सामान खरीद सकते हैं. योजना के अनुसार लाभुक को 32 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से राशि दी जाती है.

बैंक का चक्कर लगाने में समय और काम दोनों होता है बर्बाद

डीबीटी योजना की व्यवस्था नगड़ी में पूरी तरह फेल है. प्रखंड मुख्यालय में 5 बैंक हैं. 12000 लाभुकों में सबसे ज्यादा लाभुक बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच से जुड़े हैं. बीओआई के नगड़ी ब्रांच से 4000 लाभुकों का अकांउट है. यहां हर रोज सुबह से ही डीबीटी के लाभुकों की भीड़ लगी रहती है. ऐसे ही एक लाभुक 70 साल की बुढ़ी पार्वतीया देवी ने बताया कि बैंक से पैसे निकालने और राशन लेने में बहुत परेशानी हो रही है. पहले अंगूठे का निशान नहीं मिलने से बैंक से पैसे ही नहीं मिले, कई बार घर से पैसा लगाकर राशन लेना पड़ा है.

डीबीडी पायलट प्रोजेक्ट के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं ग्रामीण

डीबीटी पायलट प्रोजेक्ट के पीडीएस सिस्टम के साथ जुड़ने के बाद परेशान नगड़ी के ग्रामीण अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. राशन के लिए प्रज्ञा केंद्र, बैंक और राशन डीलर का चक्कर काटते-काटते लोग परेशान हो गये हैं. यहां के लोग इससे मुक्ति चाहते हैं और डीबीटी के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर रहे हैं.

जन वितरण प्रणाली में लाया गया डीबीटी सिस्टम उचित नहीः ज्यां द्रेज

झारखंड के जाने माने अर्थशास्त्री  ज्यां द्रेज का कहना है कि नगड़ी में डीबीटी सिस्टम जन वितरण प्रणाली में लाया गया है, यह उचित नहीं है. इसे जब गांव-गांव जाकर हम देख रहे हैं, तो पता चला कि ग्रामीणों के मन में इसके प्रति काफी आक्रोश और गुस्सा है. डीबीटी के कारण राशन लेने में विधवा, विकलांग,  वृद्ध लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वह इस डर से भी बिना खाता में पैसा आये राशन लेते हैं कि कहीं उनका राशन कार्ड सरकार रद्द ना कर दे.

डीबीटी से प्रखंड के लोग काफी परेशानः नंदकिशोर मेहता

राजनीतिक कार्यकर्ता नंदकिशोर मेहता का कहना है कि डीबीटी से प्रखंड के लोग काफी परेशान हैं. राशन का पैसा बैंक खाते में नहीं आता है, तो लोग ब्याज में पैसा लेकर अनाज लेने को मजबूर होते हैं. पैसा किस खाते में आयेगा यह परिवार के सदस्यों को पता नहीं चलता है. बहुत बार तो बच्चों के छात्रवृत्ति वाले अकाउंट में आ जाता है, तो कभी परिवार के ऐसे सदस्य के अकाउंट में आ जाता है जो बाहर काम करने के लिए गए हैं. ऐसे में गरीबों को राशन लेने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और इस पूरी योजना से ग्रामीणों के मन में सरकार के प्रति काफी आक्रोश है.

26 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास तक विरोधमार्च करेंगे ग्रामीण

नगड़ी प्रखंड में डीबीटी को लेकर हो रही परेशानी के विरोध में कई सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों ने 26 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास तक विरोधमार्च निकालना तय किया है. इस पद यात्रा को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है. उन्हें बैंक और प्रज्ञा केंद्र के चक्कर लगाने के साथ-साथ राशन लेने में 4 से 5 दिन जाया करने से मुक्ति मिलने की आशा है. पदयात्रा कटहल मोड़ से मुख्यमंत्री आवास तक 8 किलोमीटर की होगी.

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