झारखंड के सबसे बड़ी गौशाला के सचिव ने कहा - "गौ माता को सरकारी कागज या आश्वासन तो खिला नहीं सकते"

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 05/07/2018 - 09:07

Hazaribag: गाय की अवैध खरीद-बिक्री न हो, तस्करी न हो, इसके लिए झारखंड सरकार ने कानून बनाये हैं.  सरकार के निर्देश पर राज्य भर की पुलिस लगातार छापामारी कर रही है. वहीं छापामारी कर बड़ी संख्या में गायों को जब्त कर रही है. लेकिन यह पता लगाने की कोशिश कभी नहीं होती है कि जब्त गायों को कहां और किस हाल में रखा जा रहा है. इस बीच झारखंड के सबसे बड़े गौशाला प्रबंधन के सचिव ने एक त्राहिमाम संदेश जारी किया है. जिसके तथ्य इस सच्चाई पर से परदा उठा देता है कि झारखंड सरकार गायों को संरक्षित करने में कितना गंभीर है. 

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झारखंड की सबसे बड़ी गौशाला हजारीबाग के पिंड्राजोर में है. यह गौशाला कई तरह की परेशानियों का शिकार हो गयी है. गौशाला में 300 गाय को रखने की क्षमता है. जो पहले से वहां रखे गये हैं. हाल में प्रशासन ने विभिन्न स्थानों से पकड़ कर और 400 गायों को पिंड्राजोर गौशाला में पहुंचा दिया है. जिससे यहां की स्थिति चरमरा गयी है. गौशाला प्रबंधन के पास इतने फंड भी नहीं बचे हैं कि वह गायों को ठीक से खिला सके. सरकार पर पहले से ही 25 लाख रुपया बकाया है. अब चारा खरीदना भी मुश्किल हो गया है. गौशाला के सचिव ने एक त्रािहमाम संदेश जारी किया है. जिसे पढ़ने से यह जाहिर हो जाता है कि झारखंड की भाजपा सरकार गाय को लेकर जितना गंभीर भाषणों और कानून बनाने में हैं, शायद उसके रख-रखाव के प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखाती. हम यहां सचिव का त्राहिमाम संदेश को हू-ब-हू प्रकाशित कर रहें हैं.

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hazaribag gaushala
गौशाला के सचिव द्वारा जारी त्राहिमाम संदेश.

त्राहिमाम संदेश

अफनी हजारीबाग गौशाला विषम परिस्थिति से गुजर रही है. आये दिन विभिन्न पुलिस थानों द्वारा जब्त कर गौ वंश भेजे जा रहे हैं. गोशाला में इसकी क्षमता से करीब गो गुने गौवंश हो गए हैं.

उपायुक्त महोदय एवं जिला पशुपालन पदाधिकारी की अनुशंसा एवं अन्य सभी जरुरी कागजातों को जमा करने के बावजूद करीब 26 लाख का सरकारी अनुमोदित दर से पशु खोराकी  बिल का भुगतान गौ सेवा आयोग में लंबित पड़ा है. इस समस्या के संबंध में हम से कोई मिलना भी नहीं चाहता. सिर्फ कागजी कार्यवाही की खानापूर्ति जिला प्रशासन द्वारा की जाती है. इससे हमारी समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है. "हम गौ माता को सरकारी कागज या आश्वासन तो नहीं खिला सकते. "

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परेशानी इस तरह बढ़ गई है कि हम कहां गुहार लगाये कुछ समझ में नहीं आता. हमने प्रशासन से भी अनुरोध किया कि आप जिले के सभी दरागो को निर्देश दें कि कोई भी गौ वंश पकड़े तो कम से कम दो महीने की खुराकी के साथ गौशाला भिजवायें. परंतु एेसा नहीं किया जाता है. "ये पकड़ कर हमारी गौशाला को भेज देते हैं और हम ही को बोला जाता है कि कागजी कार्यवारी तथा सभी अन्य बंदोबस्त कीजिये."

इस कागजी कार्यवाही में 6-6 महीने से ज्यादा हो जाते हैं, सरकार की तरफ से पैसा आने में. वो भी सरकार सिर्फ 6 महीने का ही भुगतान गौशाला को देती है. उसके बाद की कोई जिम्मेदारी सरकार की नहीं. इस 6 महीने हम गौ माता को हवा पानी खिलाकर तो जीवित नहीं रख सकते. छह महीने के बाद उनका क्या होगा ?

"हम सरकार से गुहार लगाते हैं कि कम से कम गौवंश को खिलाने तथा उनकी चिकित्सा की व्यवस्था की जाये, फिर चाहे जितनी भी गौ माता आये हम निःस्वार्थ निःशुल्क सेवा करने को तैयार हैं."

प्रशासन गौवंश को जब्त कर अपनी गौशाला भेजकर उसकी कोई सुध नहीं लेता है. जैसे की पालन पोषण की सारी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ गौशाला चलाने वालों की ही है. इस संबंध में बात करने का भी समय किसी पदाधिकारी के पास नहीं है. स्थानीय जन प्रतिनिधियों का भी कोई सहयोग गौशाला को नहीं मिलता है. जबकि "अन्य गौशालाओं को वहां के स्थानीय जन प्रतिनिधि अपने फंड से पूरा सहयोग देते हैं."

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सरकार ने अुदान की राशि छह माह बढ़ाकर एक साल तथा 50 रुपया प्रति गाय प्रति दिन खर्च को बढ़ा कर 100 रुपया प्रति गाय प्रतिदिन कर देने की घोषणा की है. लेकिन पिछले से अधिक महीनों से यह भी सिर्फ घोषणा तक ही सीमीत है. इस संबंध में अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है. पुरानी अनुमोदित सरकार दर पर जमा जब्त गौवंश का खोराकी बिल पिछले  एक साल से लंबित हैं. नए गोसदन तथा बाउंड्री मरम्मत का हमारा एस्टीमेट भी पिछले तीन वर्षों से सरकारी लालफीताशाही का शिकार है. जबकि सरकार ने प्रत्येक निबंधित गौशालाओं को प्रत्येक वर्ष 50 लाख रुपया इस मद में देने का प्रावधान किया हुआ है.

लगता है गौभक्तों को अब इसके लिए सड़क पर उतर कर आंदोलन करना होगा.

"भगवान गौमाता की रक्षा के लिए कार्य करने की शक्ति दें."

जै गोपाल. जै गौमाता

सचिव

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