366 करोड़ से बनने वाला हाईकोर्ट भवन का टेंडर आरके कंस्ट्रक्शन को देने के लिए भवन निर्माण विभाग ने मुंबई की कंपनी के बारे में बोकारो के बैंक से मांगी जानकारी

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/26/2018 - 12:27

झारखंड हाईकोर्ट निर्माण टेंडर घोटाला- पार्ट 2

Ranchi: कंपनी कहीं की और बैंक गारंटी की जानकारी कहीं और से मांगे जाने के पीछे क्या वजह हो सकती है. किसी कंपनी का सारा काम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से होता है. लेकिन कंपनी की बैंक गारंटी यूनियन बैंक से मांगे जाने के पीछे क्या वजह हो सकती है. जी हां, ऐसा ही कुछ कुछ हुआ आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को झारखंड हाईकोर्ट बनाने के लिए टेंडर देने में. इससे पहले आपने पढ़ा कि कैसे दिग्गज-दिग्गज कंपनियों को झारखंड भवन निर्माण विभाग ने मामूली बातों पर और गलत तरीके से टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया. अब पढ़िए कि विभाग ने कैसे-कैसे हथकंडे अपनाए आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को भवन निर्माण का काम देने में. 

इसे भी पढ़ेंः 366 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला हाईकोर्ट भवन का टेंडर आरके कंस्ट्रक्शन को देने के लिए दूसरी कंपनियों को गलत तर्क देकर अयोग्य बताया गया !

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यूनिटी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड, मुंबई

Unity Infra Project Ltd. Mumbai ने खटखटाया है हाईकोर्ट का दरवाजा
Unity Infra Project Ltd. Mumbai को टेंडर प्रक्रिया से बड़े ही चालाकी से दूर किया गया. विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद और टेकनिकल बिड शुरू होने से पहले कंपनी की बैंक गारंटी मांगी. गौर करने वाली बात यह है कि कंपनी मुंम्बई की है और विभाग ने बैंक गांरटी की जानकारी मांगी बोकारो स्टील सिटी के एक बैंक से. जाहिर तौर पर बैंक ने बैंक गारंटी देने से मना कर दिया. इसी को आधार बनाते हुए कंपनी को टेंडर प्रक्रिया से दूर कर दिया गया. मामले को लेकर कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 2015 में ही कंपनी ने एक याचिका दायर की. जिसपर सुनवाई लंबित है. 

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केपीसी प्रोजेक्ट लिमिटेड

एक कंपनी को बिना बैंक गारंटी के किया टेंडर में शामिल
Unity Infra Project Ltd. Mumbai को बैंक गांरटी ना देने के आधार पर टेंडर प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. वहीं M/s KPC Projects Ltd. Hyderabad कंपनी के लिए भी एक बैंक से बैंक गांरटी मांगी गयी. बैंक ने गारंटी देने से मना कर दिया. लेकिन कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों एक कंपनी को बैंक गारंटी की वजह से टेंडर से बाहर किया गया. वहीं दूसरी कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया. 

इसे भी पढ़ेंः BJP MP महेश पोद्दार ने कहा, सोलर पावर मामले में बरगलाया जा रहा है, प्रति यूनिट दर 2.94 रु. से कम होनी चाहिए, 5 रु. प्रति यूनिट खरदीना कितना जायज ?

जो सवाल उठ रहे हैं
- टेकनिकल बिड से पहले प्री बिड मीटिंग का आयोजन किया गया. लेकिन उस मीटिंग में क्या हुई, इसकी जानकारी विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया. 
- सिर्फ दो ही कंपनी Unity Infra Project Ltd. Mumbai और M/s KPC Projects Ltd.  Hyderabad के लिए ही बैंकों से गारंटी के लिए पत्राचार किया गया. जबकि टेंडर प्रक्रिया में 12 कंपनियां शामिल थीं. आखिर क्यों बाकी कंपनियों के बैंकों से पत्राचार नहीं किया गया. 
- विभाग के अधिकारी इस बात को कैसे जान गए कि Unity Infra Project Ltd. Mumbai और M/s KPC Projects Ltd. Hyderabad ने ही बैंक गारंटी नहीं दिया है. जबकि टेंडर अभी सील बंद लिफाफे में ही था. क्या विभाग सील बंद लिफाफे के अंदर से भांप गया कि इन्हीं दोनों कंपनियों ने बैंक गारंटी नहीं दी है. 
- क्या बैंक से पत्राचार ईमेल से किया गया. अगर किया गया तो कौन सी ईमेल आईडी से जिसपर बैंक ने जवाब दिया. 
- करारनामे के नियम 4.5-A (B) और 4.5-A (C) के मुताबिक आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के पास सरकारी भवन बनाने का कोई अनुभव नहीं है. इसके बावजूद कंपनी को काम करने दिया गया. 
- KPC Project Ltd. ने बैंक गांरटी नहीं दी. फिर भी उसे टेक्निकल बिड में हिस्सा लेने दिया गया. 
- टेंडर डालने के लिए DEC Infrastructure and Project Ltd. Hyderabad को चयनित किया गया. जबकि विभाग की तरफ से कंपनी के बारे लिखा गया था कि कंपनी का काम अच्छा नहीं है. कंपनी का काम घटिया है. जो निर्माण कंपनी ने किए हैं वो क्षतिग्रस्त हो गए हैं. 
-  M/s RKC ने प्री बिड में स्वीकार किया है कि कंपनी के पास सरकारी भवन बनाने का कोई अनुभव नहीं है. बावजूद इसके कंपनी को टेंडर में हिस्सा लेने दिया गया. ऐसे में M/s RKC को दिया गया काम क्या National Competitive Bidding Document Standard Bidding Document, Standard Bidding Document for Civil Works, Intruction to Bidders का उल्लंघन नहीं है. 
- प्री बिड में M/s Ramkey Infrastructure के एक सवाल के जवाब में विभाग ने कहा था कि  झारखंड हाईकोर्ट भवन निर्माण कार्य के लिए कंपनी को सरकारी भवन बनाने का अनुभव जरूरी है. ऐसे में बिना अनुभव वाली कंपनी को काम कैसे दे दिया गया.

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