सिंदरी कारखाना शुरू करने के लिए झारखंड सरकार करे 210 करोड़ की स्टांप ड्यूटी माफ, 1250 मीट्रिक पानी हर घंटे चाहिए

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/17/2018 - 16:44

हाल झारखंड सरकार के परियोजनाओं का -1

Akshay Kumar Jha

Ranchi: 2002 में सिंदरी खाद परियोजना पर जो ग्रहण लगा था, उसके हटने के आसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद दिखने लगे थे. सिंदरी खाद को फिर से शुरू करने की कवायद केंद्र सरकार की तरफ से की गयी. झारखंड सरकार की इस काम को लेकर काफी तारीफ भी हुई. लेकिन जो हालात हैं, उससे यह नहीं लगता कि सिंदरी के अच्छे दिन इतनी जल्दी वापस आने वाले हैं. सिंदरी खाद कारखाना को फिर से शुरू करने में केंद्र सरकार का पेट्रोलियम मंत्रालय एक अहम भूमिका निभा रहा है. खाद परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए मंत्रालय की तरफ से झारखंड सरकार को मदद करने को कहा गया है. जितनी जल्दी पेट्रोलियम मंत्रालय की शर्तों को झारखंड सरकार मानेगी, उतनी ही जल्दी प्लांट लगना संभव हो पायेगा. इसे लेकर मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्य स्तर के शीर्ष अधिकारियों के साथ रांची प्रोजेक्ट भवन में एक बैठक की. बैठक के दौरान मंत्रालय ने सरकार के अधिकारियों के सामने सारी समस्याओं को रखा.

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210 करोड़ के स्टांप ड्यूटी को छोड़ने को कहा

केंद्र सरकार की पेट्रोलियम मंत्रालय कारखाना फिर से शुरू करने के लिए 7050 करोड़ का निवेश करने जा रहा है. निवेश करने से पहले मंत्रालय ने कहा है कि नये कारखाने के लिए जो जमीन मंत्रालय ग्रहण करेगा, उसकी स्टांप ड्यूटी माफ की जाये. ये स्टांप ड्यूटी करीब 210 करोड़ की है. इतने बड़े कारखाने और हजारों रोजगार के लिए सरकार को यह नुकसान सहना ही पड़ेगा. लेकिन सरकार जब अपने खाली खजाने की ओर देखती है तो, एक बार में इतनी बड़ी रकम छोड़ना आसान नहीं लगता है.

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1250 मीट्रिक पानी हर घंटे चाहिए

सिंदरी खाद परियोजना से दामोदर नदी महज दो किमी पर है. इससे पहले कारखाने को हर रोज नदी से 30 मीलियन गैलन की सप्लायी होती थी. मंत्रालय ने सरकार से कहा है कि नये सिरे से कारखाने को शुरू करने के लिए उन्हें हर घंटे 1250 मीट्रिक पानी चाहिए. यूं तो दामोदर आम दिनों में इतना पानी देने के लिए सक्ष्म है. लेकिन सरकार को पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के इसके लिए बात करनी होगी. पश्चिम बंगाल दामोदर नदी से काफी मात्रा में पानी सिंचाई और दूसरे कामों के लिए पानी ले लेता है. जब से त्रिणमूल की सरकार पश्चिम बंगाल में आयी है, सरकार की नजर दामोदर नदी पर है. प्राकृतिक रूप से सिंदरी से पश्चिम बंगाल की तरफ ढ़लान है. इसका फायदा भी बंगाल को मिलता है.

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पूरे शहर की ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त की जाये

मंत्रालय ने सरकार से कहा है कि सिंदरी की ड्रेनेज व्यवस्था काफी खराब है. बरसात के दिनों में हाल और बदतर हो जाता है. खास कर एसके-4, रांगामाटी, जयहिंद मोड़ की बात की जाये तो ज्यादातर घरों का ड्रेनेज खुले नालियों में बहता है. मंत्रालय का सरकार से कहना है कि जितनी जल्दी हो सके, शहर की ड्रेनेज व्यवस्था ठीक की जाये. शहर के साथ फैक्ट्री से जो ड्रेनेज बाहर निकलता है, उसकी समुचित व्यवस्था की जाये.

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फैक्ट्री शुरू होने से पहले बने यह सभी सड़कें

मंत्रालय ने सरकार के अधिकारियों के सामने सिंदरी की कुछ सड़कों को फिर से बनाने को कहा है. उनका कहना है कि ये सभी सड़कें फैक्ट्री की एपरोच सड़क के रूप में काम करती हैं. ऐसे में सभी सड़क दुरुस्त होने चाहिये. मंत्रालय ने खासकर हिरक रोड जो बलियापुर-भिखराजपुर से होते हुए कांड्रा को जोड़ेगी उसे नये सिरे से बनाया जाये. खालसा मोड़ से आरएमके-4 की सड़कों को भी नये सिरे से बनाने के लिए सरकार को कहा गया है. हिरक से रोड़ाबांध की सड़कों को भी बनाने को कहा गया है और न्यू रोड-एसएल 2 से शहरपुरा हटिया तक की सड़क को बनाने के लिए मंत्रालय ने सरकार से कहा है.         

सिंदरी खाद कारखाना को एनटीपीसी, कोल इंडिया, एफसीआई, ओएनजीसी, आईओसी के ज्वाइंट वेंचर से शुरू किया जा रहा है. ये कारखाना गैस आधारित है, जिससे करीब 12 लाख 70 हजार मीट्रिक टन खाद का उत्पादन किया जायेगा. 2018 तक गैस पाइपलाइन बिछा लिया जायेगा. अब बस इंतजार है, उस पल का जब पीएम मोदी और सीएम रघुवर के हाथों इस खाद कारखाने में लगा ताला हमेशा के लिये खुल जायेगा.

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