चंदवा : कोयले के धंधे में वर्चस्व कायम करने को लेकर दो गुट आमने-सामने, अलर्ट मोड पर प्रशासन

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 15:55

Latehar : झारखंड में कोयले के काम में हाथ भले ही काले होते हों, लेकिन जमीन कई बार लाल हुई है. यह काम ऐसा है, जिसमें जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला सिद्धांत चलता है. चंदवा के जमीरा पंचायत स्थित बिराटोली रेलवे स्टेशन में कोयले के काम को लेकर दो गुट आमने सामने हैं. दोनों गुट अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे है. फिलहाल काम की जो रफ्तार है उसमें 10 आदमियों की भी जरूरत नहीं लेकिन सुबह से लेकर रात तक दोनों गुटों के लगभग 300 से ज्यादा लोग साइडिंग परिसर में जमा नजर आ रहे हैं. लोगों की ये जमघट कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लातेहार एसडीपीओ अनुज उरांव, इंस्पेक्टर कमलेश्वर पांडेय और बीडीओ देवदत्त पाठक ने कोल साइडिंग क्षेत्र पहुंचकर लोगों से वार्ता भी की.

जिसका प्रभाव होगा काम उसी को मिलेगा

अमूमन कोयला के काम में यही होता है कुछ लोग पब्लिक सपोर्ट तो कुछ लोग दबंगई कर कोयला का काम हथियाते है. अपने पक्ष को मजबूत रखने के लिए कोयला माफिया पर्दे के पीछे रहकर अपना सारा काम कर रहे हैं और उनका मोहरा बन रहे हैं ग्रामीण, जिन्हें सब्जबाग दिखाकर झांसे में लिया जा रहा है.

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गुंडागर्दी बर्दाश्त नही करेंगे : थाना प्रभारी

मौजूदा विवाद को लेकर थाना प्रभारी कोयला साइडिंग पहुंचे और दोनों पक्षो को बुलाकर कहा काम के लिए यदि किसी ने गुंडागर्दी की तो सीधा जेल भेज दूंगा. काम करने के लिए सारे कागजात सही करवा लें, सभी नियमों का पालन कर लें. कोई भी व्यक्ति यदि सारी अहर्ता को पूरा करता है तो उसे काम करने से कोई नही रोक सकता हैं.

कई खामियों के बावजूद काम को लेकर बेताब लोग

बता दें कि पूरा साइडिंग क्षेत्र साइडिंग बनने की किसी भी प्रक्रिया को पूरा नही करता और ना ही इसके लिए कोई कदम आगे बढ़ाया गया है. कोल माफियाओं को यही लगता है कि अगर ग्रामीणों का विरोध नही हुआ तो प्रशासनिक स्वीकृति के बिना भी काम कर लेंगे, जैसा चंदवा टोरी कोल साइडिंग में किया है. यहां ना ही बाउंड्रीवाल है ना ही लाइट, ना ही कोई आपातकालीन मुसीबत से बचने के उपाय. बाबजूद इसके प्रशासन के संरक्षण में कोयला चलता रहेगा.

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कृषि योग्य भूमि में होगा कोयले का काम

सरकार अपने बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में भी कृषि योग्य भूमि लेने से बचती है. जमीन को कृषि योग्य बनाने हेतु करोड़ो रूपये खर्च करती है. लेकिन इसके इतर बिराटोली में कृषि योग्य भूमि को कोयले का भंडारण स्थल बनाया गया है. अब देखना यह है कि किसी की रैयती जमीन जो कृषि योग्य है, उसे कोल भंडारण के उपयोग में लाया जा सकता है कि नही.

प्रशासन को जानकारी दिये बगैर काम शुरू

जानकारी के मुताबिक कोयला का काम बिना प्रशासन को जानकारी दिए ही कोल कारोबारी शुरुआत करने की फिराक में थे. उपजे विवाद के बाद सारा मामला सामने आया और प्रशासन का हस्तेक्षप हुआ. अब मौजूदा तनाव की स्थिति को काबू में रखना पुलिस और प्रशासन के लिए एक चुनौती है.

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