इंसानों का खून पीते हैं वैम्पायर चमगादड़  

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 02/21/2018 - 14:05

NW DESK : चमगादड़ रहस्‍़यमय जीव माने जाते हैं. ये डरावने जीव हैं. रात के अंधेरे में सामने आ जायें तो पसीने छूट जाते है आपको बता दें कि चमगादड़ों की दुनिया में वैम्पायर चमगादड़ों का भी अस्‍तित्‍़व है.  वैज्ञानिकों ने वैम्पायर चमगादड़ों का डीएनए का विश्लेषण करने के बाद पाया है कि वे सिर्फ़ ख़ून पीकर किस तरह जी लेते हैं.  वैज्ञानिकों के अनुसार वैम्पायर चमगादड़ हर दिन अपने वजन के आधे के बराबर खून पी जाते हैं. ये फल, फूल और कीड़े खाने वाले जीवों की श्रेणी में आते हैं, पर उनसे बिल्कुल अलग होते हैं. चमगादड़ों के  ख़ून में कम पोषक तत्व होते हैं और ये घातक वायरस के लिए पोषणकारी होते हैं. वैम्पायर चमगादड़ उन तीन में एक जीव हैं, जो सिर्फ़ ख़ून पीकर जीते हैं. वे रातों को मवेशियों और पशुओं का ख़ून पीने के लिए उड़ते हैं. कभी कभार वे इंसानों का ख़ून भी पीते हैं. वे नसों में अपने दातों से चीरा लगाते हैं और जैसे ही ख़ून बाहर निकलता है, उसे पी जाते हैं. यही कारण है कि वैम्पायर चमगादड़ अन्य जीवों से अलग होते हैं.  

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वैम्पायर के गुर्दे हाई प्रोटीन तत्वों को पचाने में सक्षम

खोज के अनुसार प्रतिरोधक क्षमता और पाचन के मामले में अन्य चमगादड़ों के मुकाबले वैम्पायर चमगादड़ के जीन अलग तरह से काम करते हैं. इस संबंध में शेाधकर्ताओं का कहना है कि चमगादड़ों की आंतों के कीड़े भी अलग-अलग तरह के होते हैं. वैम्पायर के गुर्दे हाई प्रोटीन तत्वों को पचाने में सक्षम होते हैं. शेाधकर्ताओं को  चमगादड़ों के  मल में 280 तरह के ऐसे बैक्टीरिया पाये जाने के सबूत मिले हैं,  जो अन्‍़य जीवों को बीमार बना सकते हैं. शोध पत्र  की  ले‍खिका  डेनमार्क की कोपनहेगन यूनिवर्सिटी की डॉक्टर मरी जेपेडा मैनडोजा कहती हैं, कि वैम्पायर चमगादड़ के अंदर ऐसे जीन होते हैं जो ख़ून के हानिकारक तत्वों का सामना कर सकते हैं. उनके ख़ून में हाई प्रोटीन (93%) और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट (1%) और विटामिन होते हैं.  चमगादड़ कैसे जीते हैं, इस पर काफी अध्ययन हुए हैं. पर उनके जीन पर बहुत कम शोध हुए हैं.  

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ख़ून पचाने की क्षमता भी अधिक होती है

अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने वैम्पायर चमगादड़ के जीन और उनके उनके आंत के कीड़ों, दोनों का विश्लेषण किया है. उन्होंने पाया कि इनके जीन अन्य चमगादड़ों के मुकाबले छोटे और अलग होते हैं.  इनके डीएनए में रोग से लड़ने की क्षमता अधिक होती है. इनमें ख़ून पचाने की क्षमता भी अधिक होती है और ये वायरल बीमारियों से लड़ सकते हैं. डॉ. मरी जेपेडा मैनडोजा कहती हैं कि वैम्पायर चमगादड़ के आंत के कीड़े फल, फूल और मांस खाने वाले चमगादड़ों से अलग होते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये कीड़े पाचन, प्रतिरोधक क्षमता और स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं. नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन जर्नल में वो लिखती हैं, ख़ून जैसे विशेष आहार को पचाने के लिए अलग तरह के जीन और आंत के कीड़ों की ज़रूरत होती है.

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