बच्ची की अम्मा कौन ? डीएनए टेस्ट से सच आएगा बाहर, साबित होने पर महिला सरपंच का छिन सकता है पद

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 03/14/2018 - 13:16

"कल तक जो बिटिया मां की लाडली थी, जिगर का टुकड़ा थी, आज अचानाक मां को क्यों बेगानी लगने लगी. बिटिया अभी 6 साल की ही है, पर ऐसा क्या हुआ कि मां ने उसे अपनी संतान मानने से इन्कार कर दिया. संतान होना गुनाह नहीं था, बल्कि तीसरी संतान होना ही गुनाह था. आखिर क्या मजबूरी है उस मां की ? ऐसा पहली बार होगा जब जैविक पिता की जगह जैविक मां का पता लाने के लिए होगा डीएनए टेस्ट"     

NEWS WING DESK : गुजरात के राजकोट में अपनी तरह का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. अमरेली जिले के एक गांव की महिला सरपंच ज्योति से सिर्फ इसलिए डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहा गया है ताकि ये साबित हो सके कि वो तीसरी संतान की मां है या नहीं.  अगर साबित नहीं होता है कि बच्ची उसकी नहीं, तो सवाल उठेगा कि आखिर किसकी है ? और अगर साबित हो गया कि वो तीसरी संतान की मां है, तो वह पद के लिए अयोग्य घोषित कर दी जाएगी. जिला विकास अधिकारी ने तोरी गांव की निर्वाचित सरपंच ज्योति राठौर को यह टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं. ज्योति पिछले साल 29 दिसंबर को अमरेली जिले के कूकावाव तालुका स्थित तोरी गांव की सरपंच चुनी गई थीं.  उनसे तालुका विकास अधिकारी एनपी मालवीय के सस्पेंशन ऑर्डर को चैलेंज करने के बाद डीएनए टेस्ट करवाने को कहा गया है. मालवीय ने ज्योति को बाला राठौर की एक शिकायत के बाद सस्पेंड किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ज्योति 6 साल की एक बच्ची की मां हैं, जो उनकी तीसरी संतान है.

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2 से ज्यादा बच्चों वाले अयोग्य
 ज्योति के खिलाफ शिकायत में आरोप है कि सरपंच ने बच्ची की मां का नाम नीता और पिता का नाम भारत दर्ज करवाया है. पंचायती राज ऐक्ट के मुताबिक दो से ज्यादा संतानें होने पर सरपंच को अयोग्य घोषित कर दिया जाता है. शिकायत करने वाले बालाभाई राठौर ने कहा, 'नीता ज्योति का ही दूसरा नाम है और पिता का नाम भारतभाई भी फर्जी है. ऐसे कागज तीसरे बच्चे की पहचान छुपाने के लिए तैयार किए गए हैं. मुझे भरोसा है कि अगर ठीक से डीएनए टेस्ट हुआ तो साबित हो जाएगा कि वह ज्योति की बेटी है.

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दस्तावेज में पायी गयी थी गड़बड़ी
सवाल का जवाब देते हुए टीडीओ एनपी मालवीय ने कहा कि डॉक्युमेंट्स के वेरिफिकेशन के बाद ही मैने उसे अयोग्य घोषित किया गया था, जिसके बाद मेरे ऑर्डर को डीडीओ के सामने चुनौती दी गई. वहीं इस प्रकरण में डीडीओ का कहना है कि सिर्फ शक के आधार पर एक चुने हुए व्यक्ति को हटाया नहीं जा सकता. कागजों से छेड़छाड़ की जा सकती है लेकिन डीएनए रिजल्ट्स के साथ नहीं. इससे सब साफ हो जाएगा.  
अब तक यही होता आया है कि ज्यादातर मामलों में डीएनए टेस्ट संतान का पिता साबित करने के लिए किए जाते  रहे हैं, यह अपनी तरह का पहला और हैरान करने वाला मामला है जब किसी महिला को जैविक मां साबित करने के लिए इस टेस्ट का सहारा लिया जा रहा है.

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