उग्र भीड़ द्वारा पुलिस पर हमला करने का मामला : दोषियों को सात साल तक सश्रम कारावास की सजा

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 05/10/2018 - 17:03

Tenughat / Bokaro :   तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय गुलाम हैदर ने नर्रा के चर्चित पुलिस पर हमला करने के मामले में पिंटू कोइरी महतो, सूरज बरनवाल, नेमचंद साव, पवन सिंह, भुनेश्वर रविदास, डहरू महतो, जितेन्द्र महतो, बबलू रजक भोला महतो, चंदन दसौंधी, भीम नायक, हरि बर्णवाल, मोची ठाकुर उर्फ लालचंद ठाकुर, दीपू पंडित, केवल तुरी, महेंद्र महतो, सागर तुरी, मनोज तुरी एवं राजकुमार कोरी को सिद्ध दोषी पाने के बाद सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

क्या था थाना प्रभारी का बयान ?

मालूम हो कि चन्द्रपुरा के निवर्तमान थाना प्रभारी द्वारिका राम ने चन्द्रपुरा थाना में 4 अप्रेल 2017 को बयान दर्ज कराया, जिसमें उनकी ओर से कहा गया था, पता चला कि ग्राम नर्रा में ग्रामीण बच्चा चोर कहकर एक युवक को पकड़ कर मारपीट कर रहे हैं. जानकारी प्राप्त होने के बाद सशस्त्र दल बल के साथ नर्रा तुरी टोला पहुंचे तो देखा कि करीब तीन-चार सौ महिला पुरूष नाजायज मजमा बनाकर एक युवक को घेर कर बच्चा चोर कह कर मारपीट कर रहे हैं, जिससे वह बुरी तरह से जख्मी हो गया है. पूछने पर उसने अपना नाम शमसुद्दीन अंसारी बताया. उक्त युवक के साथ मारपीट कर रहे लोगों से उसे बचाकर इलाज के लिए ले जाना चाहा तो नाजायज मजमा में शामिल लोगों के द्वारा पुलिस बल को चारों ओर से घेर कर गाली गलौज करते हुए धक्का मुक्की देते हुए जख्मी को इलाज हेतु ले जाने से रोक दिया और गाड़ी नम्बर JH 09AD  2251 को लाठी से प्रहार करते हुए शीशा तोड़ कर छतिग्रस्त करते हुए पलट दिया.

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समझाने पर भी नहीं मानी बेकाबू भीड़

थाना प्रभारी द्वारिका राम ने में आगे कहा था, भीड़ को बार बार कानून हाथ में न लेने की बात पर समझाने एवं अनुरोध के बावजूद भी लोगों ने बात नहीं सुनी और उत्तेजित होकर होकर हमलोगों के ऊपर जान से मारने की नीयत से एवं सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की नीयत से पत्थरबाजी करने लगे, जिससे मेरे सिर पर एवं हाथ में पत्थर लगा, साथ ही पुलिसकर्मी उमाशंकर सिंह को पीठ पर, कर्ण कुमार को पैर में चोट लगी. सूचना मिलने पर बेरमो, नावाडीह, दुग्दा से सस्त्र बल वहां पहुंचा और भीड़ को खदेड़ दिया. ततपश्चात जख्मी को इलाज हेतु अस्पताल भेजा गया. पूछताछ के क्रम में स्थानीय ग्रमीण द्वारा सभी बीसों अभियुक्तों का नाम एवं अन्य 300-400 ग्रामीण द्वारा नाजायज मजमा लगाकर घटना को अंजाम देने की बात बतायी गयी.

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कोर्ट ने सुनाया फैसला

उक्त बयान के आधार पर चन्द्रपुरा थाना में मामला दर्ज किया गया. आरोप पत्र समर्पित होने के बाद मामला स्थानांतरित होकर श्री हैदर के न्यायालय में आया. न्यायालय ने उपलब्ध गवाह एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद सभी 19 अभियुक्तों को पुलिस बल पर हमला करने के मामले में सिद्ध दोषी पाने के बाद अपराध की धारा 147 में 2 वर्ष सश्रम कारावास एवं 500 रुपये जुर्माना की सजा व जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त सजा, धारा 323 में एक वर्ष की सजा एवं 500 रुपये का जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त सजा, धारा 325 में तीन साल की सजा एवं 1000 रुपये का जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 332 में तीन साल की सजा एवं 1000 रुपये का जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 333 में सात साल सश्रम कारावास एवं 2000 रुपये जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त कारावास, 353 में दो साल की सजा एवं 1000 रुपये का जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 427 में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये का जुर्माना, नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा, 3(2) में तीन साल की सजा एवं 1500 रुपये का जुर्माना, नहीं देने पर तीन महीने की सजा का फैसला सुनाया. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. सभी अभियुक्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सजा सुनाई गई. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस की.

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