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#Bihar: नवरूणा हत्याकांड में #CBI ने खड़े किये हाथ, जानकारी देने वाले को 10 लाख का इनाम देने की घोषणा

करीब 6 साल की जांच और मामले में 6 लोगों को जेल भेजने के बाद भी सीबीआइ के हाथ खाली

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Muzaffarpur: बिहार के मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित नवरूणा हत्याकांड की लम्बी जांच के बाद सीबीआइ ने अपने हाथ खड़े कर दिये हैं. 14 फरवरी 2014 से मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी ने अब इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में मदद करनेवाले को 10 लाख का इनाम देगी.

बिहार की राजधानी पटना स्थित सीबीआइ दफ्तर के आरक्षी अधीक्षक द्वारा नवरूणा चक्रवर्ती की तस्वीर वाला पोस्टर मुजफ्फरपुर में चिपकाया गया है. इसमें उसके अपहरण और हत्या की गुत्थी सुलझाने में मदद करने वाले को दस लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की गयी है.

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पौने छह साल की जांच के बाद भी हाथ खाली

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10 लाख के इनाम वाले पोस्टर को लेकर सीबीआइ चर्चा में हैं. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी द्वारा पौने 6 साल की जांच व नवरूणा कांड में 6 लोगों को जेल भेजने के बाद इस तरह के पोस्टर चस्पा करने की खूब चर्चा हो रही है.

बता दें कि नवरूणा की हत्या 2012 में हुई थी. और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 14 फरवरी 2014 को मामले में सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरु की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार हत्याकांड की जांच के लिए मोहलत दी. वहीं तीन महीने पहले उच्चतम न्यायालय ने 21 नवंबर 2019 को सीबीआई को जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा था. अब डेडलाइन के महज 15 दिन पहले सीबीआइ ने इस अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने में मदद करने वाले को इनाम देने की घोषणा की है.

इधर नवरूणा के पिता अमूल्य ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी पुत्री के अपहरण और हत्या में नौकरशाहों, राजनेताओं और भूमाफियाओं का हाथ होने का आरोप लगाया तथा कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर विश्वास है.

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2012 में नवरूणा की हुई थी हत्या

मुजफ्फरपुर की रहनेवाली नवरूणा चक्रवर्ती की 2012 में हत्या हुई थी. 18-19 सितंबर की रात्रि घर की खिड़की तोड़कर नवरूणा का अपहरण हुआ था. मुजफ्फरपुर शहर के जवाहर लाल रोड निवासी अमूल्य चक्रवर्ती की पुत्री नवरूणा का शव 26 नवंबर 2012 को उसके घर के सामने नाले से बरामद किया गया था.

CBI से पहले जिला पुलिस और CID भी कर चुकी है जांच

नवरूणा अपहरण और हत्याकांड काफी सुर्खियों में रहा. मामले को लेकर जिला पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार ने मामले की जांच का जिम्मा सीआइडी को सौंपा था. सीआइडी जांच में भी जब मामले की गुत्थी नहीं सुलझती दिखी तब राज्य सरकार ने सीबीआइ जांच की अनुशंसा की.

हालांकि, राज्य सरकार की अनुशंसा पर सीबीआइ ने पहले से कई केस का दबाव बताते हुए जांच से इनकार कर दिया था. लेकिन नवरूणा केस से जुड़े लॉ के छात्र अभिषेक रंजन ने मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. जिसके बाद  सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ ने 14 सितंबर 2014 को मामले की प्राथमिकी दर्ज की थी.

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