हाल खूंटी के बिरसा कॉलेज छात्रावास का : फर्श पर चटाई बिछा कर सोती हैं छात्राएं (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 12/22/2017 - 17:12

Sonu Ansari, Khunti : झारखण्ड में एक तरफ सरकार आदिवासियों के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है. वहीं दूसरी ओर आदिवासी जनजाति छात्राओं के लिए खूंटी के बिरसा कॉलेज परिसर में बने छात्रावास अनियमितताओं का दंश झेल रहा है. इस भवन को बने दस साल हो गये हैं फिर भी यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर आभाव है. यहां सुविधा उपलब्ध कराने के लिए छात्रसंघ हमेशा आवाज उठाते रहते हैं.

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छात्रावास में नहीं है पर्याप्त बेड और टेबल, बिजली भी रहती है गायब

छात्रसंघ के लगातार आवाज उठाने पर पीछले महीने छात्राओं को छात्रावास में रहने की अनुमति दी गयी. पर अब तक छात्राओं को बुनियादी सुविधा नहीं मिल पायी है. बुनियादी सुविधा बहाल करने की जिम्मेवारी के नाम पर संबंधित अधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेवार ठहराते हैं. छात्रावास में 80 से ज्यादा छात्राएं रह रही है. बेड और टेबल की कमी की वजह से छात्राएं कड़ाके की ठण्ड में भी फर्श पर चटाई बिछाकर सोने को मजबूर हैं. वहीं दूसरी तरफ खूंटी में लगातार चरमराती बिजली व्यवस्था भी छात्राओं की परेशानी बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है. बिजली की वजह छात्राएं शाम की पढ़ाई नहीं कर पा रही है.

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वार्डन और सुरक्षा गार्ड की भी है कमी

छात्रावास में वार्डन की कमी, रसोइया की कमी, सुरक्षा गार्ड की कमी, कॉलेज छात्राओं के लिये भय का वातावरण पैदा कर रहा है. छात्राओं का कहना है बगैर सुरक्षा गार्ड, वार्डन और रसोइया के किसी तरह छात्रावास में रहना पड़ रहा है. छात्राएं कहती हैं कि वे रनिया, सोदे, अड़की, तोरपा, कर्रा, बीरबांकी जैसे सुदूर इलाकों से आकर कॉलेज में पढ़ाई कर रहे है. लेकिन छात्रावास में बुनियादी सुविधा की कमी ने छात्राओं को परेशानी में डाल दिया है.

कॉलेज के नाम पर शुरू हो गयी राजनीति

खूंटी में बिरसा कॉलेज के नाम पर राजनीति भी शुरू हो गयी है. विपक्ष के झाविमो जिलाध्यक्ष का कहना है कि सरकार सिर्फ दिखावा करती है. आंकड़ों के आधार पर सुर्खियां बटोरने का काम कर रही है. सरकार आदिवासी छात्र-छात्राओं की शिक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाना मुनासिब नहीं समझती. वहीं बिरसा कॉलेज छात्रसंघ नेता मनोज बारला का भी कहना है कि छात्रावास में बुनियादी सुविधा बहाल करने के मामले में लिखित आवेदन जिला प्रशासन को दिया गया है. इसके बावजूद सुविधाएं उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. जैसे तैसे गरीब बच्चियां रहने को मजबूर हैं.

कॉलेज प्रबंधन भी इस मामले पर मौन धारण किये हुए है

खूंटी कल्यान विभाग आईटीडीए के डायरेक्टर भीष्म कुमार ने कहा कि बिरसा कॉलेज प्रबंधन इस मामले पर मौन धारण किये हुए है. वहीं समाज कल्याण भी गोलमोल जवाब देकर अपने कर्तव्य से बचते दिखाई दे रहे हैं. तो आईटीडीए के पदाधिकारी इस संबंध में पूछने पर व्यवस्था की बात जुबानी तौर पर कहते हैं. साथ ही छात्राओं की सुरक्षा के मामले पर सरकार के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं. अब देखना होगा कि कब तक आदिवासियों के नाम पर बने झारखंड में आदिवासी छात्राओं को उनका हक मिल पाएगा.

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