17 साल के झारखंड में पहली बार राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक अस्थिरता

Submitted by NEWSWING on Tue, 01/09/2018 - 13:49

लोग पसोपेश में है कि आखिर होगा क्या?

बातें हो रही हैं कि क्या सीएम सीएस पर कार्रवाई करेंगे?

अगर कार्रवाई नहीं हुई तो क्या विपक्ष सदन चलने देगा?

क्या सरकार के अंग ही सरकार के खिलाफ हो रहे हैं?

Akshay Kumar Jha

Ranchi:  रघुवर सरकार की बात छोड़ दी जाए तो यहां एक भी ऐसा सीएम नहीं हुआ जिसने 900 दिन भी कुर्सी संभाली हो. दो बार राष्ट्रपति शासन भी लगा. देशभर में झारखंड राजनीतिक अस्थिरता का पर्यायवाची बन गया था. इस बार पूर्ण बहुमत मिली है. लेकिन राज्य में प्रशासनिक अस्थिरता दिख रही है. पहली बार प्रशासनिक तौर पर राज्य की सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर कुर्सी को लेकर गॉसिप हो रही है. लोग पसोपेश में हैं कि आखिर होगा क्या? बातें हो रही हैं कि क्या सीएम सीएस पर कार्रवाई करेंगे? अगर कार्रवाई नहीं हुई तो क्या विपक्ष सदन चलने देगा? क्या सरकार के अंग ही सरकार के खिलाफ हो रहे हैं?

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मुख्य सचिव राजबाला वर्मा पर संकट
मुख्य सचिव राजबाला वर्मा पर संकट

 

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा फरवरी में रिटायर होने वाली हैं. इससे पहले उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है. चारा घोटाले में सीबीआई के करीब 22 रिमांडर का जवाब राजबाला वर्मा ने नहीं दिया है. जिसे लेकर सरकार के कार्मिक विभाग के तरफ से सीएस राजबाला वर्मा को एक नोटिस जारी किया गया है. जिसका जवाब सरकार ने 15 दिनों के अंदर मांगा है. जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो सरकार की तरफ से कार्रवाई हो सकती है. वहीं सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय भी लगातार सीएस पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इसके लिए सरयू ने सीएम रघुवर दास को एक पत्र भी लिखा है. अब मामले में सरकार की सहयोगी पार्टी आजसू की तरफ से भी कार्रवाई को लेकर बयान जारी किया जा रहा है. 17 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में विपक्ष इस मामले पर सरकार को घेरने की सारी तैयारी कर चुका है. आने वाले दो-तीन दिनों में सीएस की तरफ से सरकार को जवाब दिए जाने की पूरी उम्मीद है.

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सीएम के प्रधान सचिव की कुर्सी कौन संभालेगा

सीएम के प्रधान सचिव की कुर्सी कौन संभालेगा
सीएम के प्रधान सचिव की कुर्सी कौन संभालेगा

बिहार कैडर के आईएएस संजय कुमार सीएम के प्रधान सचिव हैं. झारखंड में उनके डेप्युटेशन का तीन साल 21 जनवरी को पूरा हो रहा है. उनके कार्यकाल के एक्स्टेंशन के लिए सरकार की तरफ से केंद्र को अभी तक नहीं लिखा गया है. केंद्र सरकार की कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने देश के हर राज्य सरकार को एक महीने पहले ही चिट्ठी लिख कर यह अवगत कराया है कि अगर किसी आईएएस की कार्यअवधि पूरी हो जाती है तो उसी दिन राज्य को उस अधिकारी को रिलीज कर देना है. अगर ऐसा नहीं होता है तो विभाग ने एजी विभाग को उस अधिकारी का पे स्लिप जारी करने से मना कर दिया है. ऐसे में आने वाले दस दिनों में सीएम के प्रधान सचिव की कुर्सी खाली हो सकती है.

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वित्त विभाग पर संकट

वित्त विभाग पर संकट
वित्त विभाग पर संकट

राज्य में बजट आने वाला है. बजट सत्र की तैयारी जोर-शोर से हो रही है. बजट तैयार करने में सबसे अहम भूमिका वित्त विभाग की ही होती है. लेकिन हाल ही में अपर मुख्य सचिव के पद पर काबिज हुए सुखदेव सिंह पर चारा घोटाला से संबंधित कुछ आरोप कोर्ट की तरफ से लगाए गए हैं. आरोप लगने के बाद सुखदेव सिंह ने सरकार को पत्र लिख कर कहा था कि उनपर ट्रेजरी से संबंधित आरोप लगे हैं. ऐसे में वित्त विभाग का जिम्मा वो नहीं निभा सकते हैं. सुखदेव सिंह की इस चिट्ठी से मीडिया और सरकार में खूब खलबली मची थी. बात हो रही थी कि फिर से अमित खरे को वित्त विभाग का जिम्मा दे दिया जाएगा. लेकिन सूत्र बताते हैं कि अमित खरे इस पद को दोबारा से लेना नहीं चाहते हैं. ऐसे में बजट तैयारी में सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. हालांकि सरकार की तरफ से सीएस ने यह साफ कर दिया है कि सुखदेव सिंह को वित्त विभाग के सचिव के पद पर अगले आदेश तक बने रहना है.

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सीएस को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों हमलावर

सीएस को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों हमलावर
सीएस को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों हमलावर

चारा घोटाले में सीएस सीबीआई की तरफ से करीब 22 बार रिमांइर देने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों दल मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हो गए हैं. सरकार की चिट्ठी से पहले ही सरकार के मंत्री सरयू राय ने सीएम को चिट्ठी लिख कर कार्रवाई करने की सलाह दी. चिट्ठी में कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो यह कानून और सरकार की अनदेखी होगी. दैनिक अखबारों में सरयू राय का लेख छप रहा है कि कैसे राजबाला वर्मा ने लालू यादव का चारा घोटाला में साथ दिया था. कैसे उनकी गिरफ्तारी नहीं होने दी जा रही थी. कैसे तत्कालीन डीएम राजबाला वर्मा लालू यादव की गिरफ्तारी के बाद फूट-फूट कर रोयी थी. इसे भी सरकार पर सीएस के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव की तरह देखा जा रहा है. वहीं सरकार में शामिल सुदेश महतो की पार्टी ने भी सीएस के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बयानबाजी की है. ऐसे में सरकार के लिए सीएस प्रकरण काफी मुश्किल साबित होने वाला है.       

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