बकोरिया कांड का सच-07ः ढ़ाई साल में भी सीआइडी नहीं कर सकी चार मृतकों की पहचान

Submitted by ADMIN on Sat, 12/16/2017 - 11:23
bakoria

Ranchi : आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में कुल 12 लोग मारे गए थे. उनमें से एक डॉ आरके उर्फ अनुराग के नक्सली होने का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध था. जबकि सात के नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड अब तक पुलिस व सीआईडी नहीं ढ़ूंढ़ पायी है. इतना ही नहीं ढ़ाई साल में सीआइडी चार मृतकों की पहचान भी नहीं कर पायी है. एसटीएफ के आइजी आरके धान ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में मामले के अनुसंधानक को निर्देश दिया है कि उन चारों मृतकों की पहचान की जाए.

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ड्राइविंग लाइसेंस मिला पॉकेट से, दिखाया ईंट-भट्ठा से 

जानकारी के मुताबिक घटना में मारे गए चालक मो. एजाज के शव की पहचान नौ जून 2015 की सुबह 6.10 बजे ही हो गयी थी. इस घटना को लेकर दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक सुबह 6.10 बजे पंचनामा के वक्त मो. एजाज के पॉकेट से उसका पर्स मिला था. जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस था. ड्राइविंग लाइसेंस से उसकी पहचान हो गयी थी. पर, घटनास्थल पर बनाए गए जब्ती सूची के तथ्य बिल्कुल अलग हैं. जब्ती सूची में यह लिखा गया है कि मृत चालक मो. एजाज का ड्राइविंग लाइसेंस घटनास्थल से 100 गज की दूरी पर स्थित ईंट-भट्ठा से बरामद किया गया.

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प्राथमिकी में 117 खोखा मिलने की बात, जब्त एक भी नहीं

कथित मुठभेड़ की घटना के बाद पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की, उसमें घटनास्थल से गोलियों का 117 खोखा मिलने की बात कही गयी है. लेकिन घटना को लेकर जो जब्ती सूची तैयार की गयी है, उसमें घटनास्थल से जब्त किए गए खोखा का जिक्र ही नहीं है. इतना ही नहीं एक तस्वीर में एक मोबाइल फोन सही हालत में दिख रहा है, लेकिन जब्ती सूची में मोबाइल फोन को टूटा हुआ बताया गया है. जो फोन सही सलामत है, उसका जिक्र जब्ती सूची में किया ही नहीं गया. 

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