खनन कर्मियों के संरक्षण में हो रहा धुरकी में बालू का काला कारोबार, हुआ हजारों ट्रक अवैध बालू का उठाव

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 02/02/2018 - 20:11

Nityanand Dubey

Garhwa : जिला खनन कार्यालय में कार्यरत कर्मियों के संरक्षण में धुरकी में बालू का काला कारोबार चल रहा है. कर्मियों के संरक्षण का ही प्रभाव है कि बालू माफियाओं ने बालू बंदोबस्ती के विपरीत अवैध रूप से हजारों ट्रक अधिक बालू का उठाव कर लिया है. हजारों ट्रक अधिक बालू का उठाव होने से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है. विभाग में कुंडली मारे बैठे कर्मी माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी राजस्व पर डाका डाल रहे हैं. मामला प्रकाश में आने पर अब खनन विभाग में कुंडली मारे बैठे लोग अवैध बालू उठाव मामले की लीपापोती करने में एड़ी-चोटी एक किये हुए हैं. खनन कर्मी कहते फिर रहे हैं कि ठेकेदार ने नहीं दूसरे लोगों ने बालू का उठाव किया होगा.

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मामले को लेकर एसडीओ व एसडीपीओ रहते हैं सख्त

सूत्र बताते हैं कि एसडीओ कमलेश्वर नारायण और एसडीपीओ नीरज कुमार दोनों अधिकारी अवैध बालू उठाव के मामले में हमेशा सख्त रहे हैं. दोनों अधिकारियों के द्वारा कई बार बालू घाटों पर छापेमारी की गई है तथा अवैध बालू लदे वाहनों को पकड़ा गया है. दोनों अधिकारियों द्वारा पकड़े गये वाहनों को खनन विभाग एवं परिवहन विभाग द्वारा मिलजुल कर मामूली जुर्माने की रस्म अदायगी की खानापूर्ति के बाद छोड़ दिया गया. गत सोमवार को एसडीपीओ नीरज कुमार ने धुरकी के केकरहवा घाट पर अवैध बालू का उठाव कर रहे आधा दर्जन ट्रैक्टरों को पकड़कर खनन विभाग को सूचित किया था. सूत्र बताते हैं कि  खनन विभाग में सक्रिय लोग मामूली जुर्माने की रस्म अदायगी कर आधा दर्जन ट्रैक्टर को छोड़ने वाले थे. लेकिन जिले की डीसी डॉ नेहा अरोड़ा एवं एसपी मो अर्शी की सख्ती के कारण खनन विभाग का सारा खेल बिगड़ गया.

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चार लाख रूपये में सेट हुआ था मामला

विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि चार लाख रूपये में बालू माफियाओं ने मामले को सेट कर लिया था और मात्र तीस हजार रूपये जुर्माने की राशि लेकर आधा दर्जन ट्रैक्टरों को छोड़ने की तैयारी हो चुकी थी. इसकी भनक लगने पर स्थानीय ग्रामीणों ने जिले के वरीय पदाधिकारियों को दूरभाष पर इसकी सूचना दी. जिसके आलोक में वरीय पदाधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप हुआ और जब्त किये गये आधा दर्जन ट्रैक्टरों पर मामला दर्ज किया गया. उनके चालकों को न्यायिक हिरासत में गढ़वा भेजा गया. जानकार बताते हैं कि खनन एवं परिवहन दोनों विभाग के पदाधिकारी इस बात को जानते हैं कि बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रैक्टर ट्राली का उपयोग सिर्फ कृषि कार्य के लिये ही है. बिना रजिस्ट्रेशन के ट्राली का व्यवसायिक उपयोग नाजायज है. इसकी जानकारी होने के बाद भी खनन एवं परिवहन विभाग के पदाधिकारी बिना किसी स्वार्थ के बिना रजिस्ट्रेशन वाले अवैध बालू ढो रहे ट्रैक्टर ट्रालियों को मामूली जुर्माना लेकर क्यों छोड़ते हैं? अब तक ऐसे किसी ट्रैक्टर मालिक के विरूद्ध कारवाई क्यों नहीं हुई है? खनन व परिवहन विभाग के खेल को अब लोग समझ गये हैं और इस तरह का खेल नहीं रुका तो विशुनपुरा की घटना की पुनरावृति संभव है.

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