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दार्जिलिंग: चाय उत्पादकों को उम्मीद सुधरेगी स्थिति

News Wing

Kolkata, 21August: पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाके की पहाड़ियों पर जारी अशांति के कारण चाय के निर्यात पर बुरा असर पडा है. गिरते निर्यात के बीच दार्जिलिंग के चाय उगाने वाले किसानों को उम्मीद है कि भौगोलिक परिस्थिति भविष्य में बाजार में उनकी साझेदारी जरूर बढ़ाएगी.

बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय उपलब्ध नहीं 

पिछले दो महीने से राज्य में लगातार बंद के कारण 9 जून से अब तक 87 बागानों में चाय उगाने और तोड़ने का काम लगभग बंद कर दिया गया है. इस कारण निर्यात के लिए बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय उपलब्ध नहीं है. यह इस क्षेत्र की कंपनियों और दूसरे देशों में इसके खरीदारों के लिए तगड़ा झटका है. समूचा दार्जिलिंग 8 जून से ही उबल रहा है. अलग गोरखालैंड राज्य के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन इसकी वजह है. इस आंदोलन के तहत मोर्चे ने 12 जून से राज्य में पूर्ण बंद का आह्वान किया था.

दूसरे देश की चाय बना सकती है बाजार में जगह 

दुनिया की सबसे बड़ी चाय उत्पादक कंपनी मैकलियोड रसेल इंडिया के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आदित्य खेतान के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दार्जिलिग की चाय की उपलब्धता नहीं होने से इसके खरीदार इससे वंचित हर जाएंगे और तब दूसरे देश, जैसे नेपाल, श्रीलंका और केन्या की चाय बाजार में अपनी जगह बना सकती है. साल 1984 में बने हालात का हवाला देते हुए आदित्य ने कहा कि उस दौरान सरकार ने चाय की सबसे मशहूर किस्म के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. इस कारण सुनने में आया था कि प्रतिबंध के कारण बहुत सी अंग्रेजी बाजार की खरीदार कंपनियों ने केन्या की चाय खरीदनी शुरू कर दी थी. लेकिन अब उन हालात से पार पाना सभी के लिए मुश्किल होगा, जैसा साल 1984 में रहा. आदित्य ने आगे कहा कि अब अगर खरीदार दूसरे देश की चाय खरीद लेता है, तो दार्जिलिंग के लिए आने वाले समय में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

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