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रेगुलर माध्यम से पढ़ाई संभव नहीं तो एनआइओएस है ना

Kumar Rahul

Ranchi, 12 September: लड़कियों, महिलाओं, ग्रामीण युवाओं, कामकाजी महिलाओं एवं पुरुषों, अनुसचित जाति व अनुसूचित जनजाति, दिव्‍यांग शिक्षार्थियों तथा अन्‍य अक्षम व्‍यक्तियों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की स्थापना की. 1989 में शुरू हुआ यह संस्थान आमजन के बीच एनआइओएस के नाम जाना-पहचाना जाता है. यह शिक्षा प्राप्त करने का ऐसा माध्यम है, जहां अाप अपने मन के मुताबिक पढ़ाई कर सकते हैं. यहां न तो पाठ्यक्रम की बाध्यता है और न ही तय समय पर परीक्षा की. एक शिक्षार्थी अपनी तैयारी के अनुसार जब चाहे परीक्षा दे सकता है. एनआइओएस माध्‍यमिक तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक स्‍तर पर एक विशेष एकीकृत पाठ्यक्रम  प्रदान करने वाला एकमात्र बोर्ड है.

पांच वर्षों तक नामांकन की वैधता

यह ऐसा बोर्ड ने जो माध्यमिक के लिए 9वीं एवं 10वीं तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक के लिए 11वीं एवं 12वीं  दोनों वर्षों की प्राप्‍त दक्षता को देखता है. जबकि अन्य बोर्ड केवल कक्षा 10 या कक्षा 12वीं को ही देखते हैं. एनआइओएस की शिक्षण प्रणाली में विभिन्‍न सुविधाएं हैं. माध्‍यमिक तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक स्‍तर पर शिक्षार्थियों को निरंतर शिक्षा प्राप्त करने योग्य बनाने के लिए एनआइओएस की अध्‍ययन प्रणाली योजना में निर्देश के माध्‍यम का चयन, सीखने की गति, शैक्षिक तथा व्‍यवसायिक विषयों का संयोजन, परीक्षा की लचीली योजना (शिक्षार्थी को उत्‍तीर्ण होने के लिए) परीक्षा में बैठने तथा ग्रेड सुधारने के 9 अवसर, क्रेडिट संचयन, अन्‍य बोर्डों से क्रेडिट स्‍थानांतरण, पांच वर्षों तक नामांकन की वैधता, आंशिक प्रवेश जैसी सुविधाएं हैं. यह वर्ष में दो बार सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करता है तथा शिक्षार्थी वर्ष भर जब चाहो, तब परीक्षा की सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं. शिक्षार्थी जब भी किसी विषय विशेष की परीक्षा देने के लिए तैयार हो वह अपनी परीक्षा की तिथि तथा स्‍थान चुन सकता है और परीक्षा दे सकता है.

अधिकतम नौ अवसर में पास करें परीक्षा

पांच वर्षों की अवधि में एक शिक्षार्थी को सार्वजनिक परीक्षा में बैठने के लिए अधिकतम नौ अवसर मिलते हैं. प्राप्‍त किये गये क्रेडिट तब तक एकत्रित रहते हैं जब तक शिक्षार्थी प्रमाणपत्र के लिए आवश्‍यक क्रेडिटों में उत्तीर्ण नहीं हो जाता. एनआइओएस एकमात्र ऐसा बोर्ड है जो यह सुविधा प्रदान करता है. अध्‍ययन सामग्री अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू माध्‍यम तथा अन्‍य क्षेत्रीय माध्‍यमों में उपलब्‍ध करायी गयी है. जब चाहो तब परीक्षा प्रणाली माध्‍यमिक तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक स्‍तर पर वर्ष भर चलती है. एनआइओएस उच्‍चतर माध्‍यमिक परीक्षाओं के लिए हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्‍ला, गुजराती तथा ओडिया माध्‍यम में 30 विषय चलाता है. इसके अतिरिक्‍त, एनआइओएस में शैक्षिक विषयों के साथ-साथ व्‍यवसायिक विषयों में शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है.

किसी भी उम्र में ले सकते हैं नामांकन

प्रवेश के लिए अधिकतम आयु की कोई सीमा नहीं है, फिर भी माध्‍यमिक पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक पाठ्यक्रम के लिए 15 वर्ष है. एनआइओएस के परीक्षा उपनियमों के अनुसार इसने विशुद्ध शैक्षिक कारणों से मॉडरेशन के लिए एक वैज्ञानिक पद्धति अपनायी है और उसी पद्धति का वर्षों से अनुसरण कर रहा है. इसका उद्देश्‍य विभिन्‍न विषयों के शिक्षार्थियों को सं‍बंधित विषयों में समान प्रतिशत के समान अवसर प्रदान करना है ताकि सभी परीक्षार्थियों समान स्‍तर की स्थिति उपलब्‍ध करायी जा सके. प्रश्‍नों की कठिनाई के स्‍तर, विषयों में उचित अंक देने के बाद शिक्षार्थियों के संपूर्ण लाभ को देखते हुए कुछ ही थे, जिन्‍हें मॉडरेशन के लिए मानदंडों की आवश्‍यकता होगी. मॉडरेशन अंक मुख्‍य रूप से उन शिक्षार्थियों के लिए हैं जो उत्‍तीर्ण नहीं हो सके अथवा जो बिल्‍कुल हाशिए पर परीक्षा उत्‍तीर्ण कर सके.

जब चाहो तब परीक्षा

एनआइओएस पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन पांच वर्ष की अवधि के लिए मान्‍य है तथा शिक्षा‍र्थी नौ सार्वजनिक परीक्षाओं में बैठ सकता है तथा प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने के लिए पांच विषयों में उत्‍तीर्ण होने के लिए जब चाहो तब परीक्षा के माध्‍यम से जितनी बार चाहे अथवा जितने चाहे उतने अवसर लेकर परीक्षा में बैठ सकता है, क्‍योंकि वर्तमान परीक्षा के लिए विषयवार उत्‍तीर्ण प्रतिशत प्रमाणित प्रतिशत से भिन्‍न हो सकता है. एनआइओएस में माध्‍यमिक तथा उच्‍चतर माध्‍यमिक पाठ्यक्रम परीक्षा प्रमाणपत्र केवल एक बार परीक्षा में बैठने के आधार पर ही निर्धारित नहीं होता बल्कि यह प्रवेश की पांच वर्ष की मान्‍य अवधि के दौरान पूर्व परीक्षाओं संचित क्रेडिटों को भी स्‍वीकार करता है. अतः एनआइओएस में उत्तीर्ण प्रतिशत विभिन्‍न विषयों में प्राप्‍त अंकों के आधार पर होता है जो सदैव प्रमाणित प्रतिशत से हमेशा अधिक होता है.

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