Skip to content Skip to navigation

न्यूज विंग के जागरूक पाठक अपनी समस्या, अपने आस-पास हो रही अनियमितता की तस्वीर या कोई अन्य खबर फोटो के साथ वाहट्सएप नंबर - 8709221039 पर भेजे. हम उसे यहां प्रकाशित करेंगे.

मोदी के नाम जेठमलानी का ख़त, भगवान करे 2019 में आपकी शर्मनाक हार हो

देश के जानेमाने वकील और राजनीतिज्ञ राम जेठमलानी विभिन्न हाई प्रोफाइल मुकदमों की पैरवी के कारण हमेशा चर्चा में रहे हैं. एक बार फिर राम जेठमलानी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र के कारण खासे चर्चा में आ गये हैं. यहां प्रस्तुत है उनके द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गयी चिट्टी का सार....

यह चिट्टी 23 अगस्त 2017 को देश के जानेमाने राजनयिक और वकील राम जेठमलानी ने पीएम मोदी के नाम लिखी थी. 

मेरे प्रिय प्रधानमंत्री जी! यकीन है आप मेरी नाराजगी को समझने में सक्षम होंगे. आपकी नाकामी दिन-प्रतिदिन मुझे नये-नये सबूत मुहैया करा रहे हैं. अब मुझे ऐसा लगता है कि इस देश ने अपना भाग्य आपके असक्षम हाथों में दे दिया था. तीन सालों में दुर्भाग्य लगातार बढ़ता जा रहा है. देश को जिस तरह आप गुमराह कर रहे हैं, उसमें मैं और चुप नहीं रह सकता.

मैंने कुछ समय पहले संडे गार्जियन में कुछ लिखा था उसकी याद दिलाता हूं;

महाशय मोदी, आप की शानदार जीत पर आपको बधाई हो. मैं खुश हूं कि इस आपकी जीत में मेरा भी कुछ योगदान रहा. अब मैं जीवन के अंतिम दौर में हूं, जहां मैं आपसे कुछ नहीं चाहता. कुछ नहीं का मतलब कुछ नहीं. मगर आप उन वायदों को पूरा कीजिए जो आपने देशवासियों से किये थे.

मैं आपको आपकी नाकामियों के प्रमुख बिंदुओं की याद दिलाता हूं;

- आप 90 लाख करोड़ रुपये के काले धन को वापस लाने के वादों के बल पर चुनाव जीते थे. 15 लाख हर गरीब भारतीयों के खातों में जमा होंगे, ऐसा आपने कहा था. मगर इस दिशा में क्या कार्रवाई हुई.

- 2004 में संयुक्त राष्ट्र में कन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन हुआ था. यह मूलत: ब्लैक मनी को लेकर था. तब की कांग्रेस सरकार ने जानबूझ कर कन्वेंशन के दस्तावेजों की अवहेलना की थी. आपने भी इस फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं किया.

- 2008 में जर्मनी सरकार ने स्विस बैंकों में 1400 गुप्त खातों की सूची प्राप्त की थी. स्विस बैंकर्स एसोसिएशन और जर्मन सरकार ने कहा था कि सूची में भारत के कई नामचीन लोग हैं. जर्मन सरकार ने भारत को वह सूची प्राप्त करने का खुला ऑफर दिया था. तब की सरकार ने इस पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी. भाजपा की सरकार बनने के बाद भी जर्मनी सरकार से इस संबंध में कोई संपर्क नहीं किया गया है. यह एक पीड़ित राष्ट्र को आपके द्वारा ठगने जैसा काम है.

- स्विस वित्त मंत्री को कांग्रेस द्वारा आमंत्रित कर गुपचुप तरीके से गुप्त समझौते किये गए. इसके तहत ब्लैकमनी से जुड़ी पूर्व की सूचनाओं का नहीं बल्कि भविष्य में कालाधन संबंधी सूचनाएं साझा करने पर सहमति बनी. जब मैंने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया तो आप ने मुझसे संपर्क किया और इस दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया. मैने आपको बताया था कि कैसे अमेरीका और यूरोपीय देशों ने ब्लैकमनी की सूचना पर कार्रवाई करते हुए देश को समृद्ध किया.

- आप ने मुझे बहकाया और मैं आपकी बातों में आ गया. मैंने आप पर विश्वास किया और अनजाने में आपको देश का अगला प्रधानमंत्री भी स्वीकार कर लिया. इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि आपने ब्लैक मनी और विदेशों में जमा पैसों के मामले में कार्रवाई का विश्वास दिलाया था.

- प्रधानमंत्री महोदय, DTAT के मामले में आपकी चुप्पी संदेहास्पद है. दुनिया के कई देशों ने गुप्त खातों की सूची के लिए जर्मन सरकार से संपर्क किया था. आपने ऐसा ना कर एक गरीब देश के साथ चीटिंग की है.

- राज्य सभा में पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने भी देश को गुमराह किया. उन्होंने झूठ कहा कि वो कई देशों के साथ डबल टैक्सेशन एवाइडेंस ट्रीटी करने जा रहे हैं. यह कांग्रेस की ही तरह आपके द्वारा देश को ठगना हुआ.

- जून 2014 में जब आपने कुर्सी संभाली तो आपका सबसे पहला कर्तव्य काले धन पर टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करना था. मगर 2015 में तो भाजपा अध्यक्ष अमीत शाह ने खुलेआम कह दिया कि ब्लैक मनी सिर्फ चुनावी जुमला था. यह देश के साथ धोखाधड़ी की सार्वजनिक स्वीकृति जैसी थी.

- अब मैं खुद पर शर्मिंदगी महसूस करता हूं कि आपको पीएम बनाने में अपना बहुमुल्य समय लगाया. मैं अपनी मूर्खता पर शर्मशार हूं और 2019 में आपको शर्मनाक रूप से हारते हुए देखना चाहता हूं. भगवान इस बार मेरा साथ देगा.

देश को अब 2022 में काला धन लाने को लेकर बेवकूफ बनाना बंद कीजिये. आप यह इसलिए कह रहे हैं ताकि 2019 में आप फिर से जीत सकें.

2010 में आपने और अमीत शाह ने बीजेपी ज्वाइन कराने के लिए मुझसे संपर्क किया था. अब मुझे पता चल रहा है कि इसके पीछे आपकी नीयत क्या थी. अमित शाह हत्या के आरोप में फंसे थे. उन्हें उलझन से बाहर निकालने में आप मेरी पेशेवर सेवा लेना चाहते थे. उस वक़्त आपलोगों ने ब्लैक मनी मामले में मेरी लड़ाई में साथ देने का वायदा किया था. आगे चलकर आप इससे मुकर गए.

आपकी पार्टी ने भी मेरे खिलाफ षड्यंत्र किये. यह सब जानते हुए आप आंख मूंदे रहे. मगर शुक्र है कि मैं अपने बिहार के शुभचिंतकों की वजह से फिर से राज्यसभा पहुंच गया.

प्रधानमंत्री जी, अगर आपमें जरा भी नैतिकता बची है, तो अपने पापों का प्रायश्चित कीजिये.

Slide
Share

Add new comment

loading...