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जानिए कितनी खास होगी भारत की पहली बुलेट ट्रेन

News Wing

Ahmedabad, 14September: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुरुवार को अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी. इसके साथ ही देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक नए युग का सूत्रपात हो गया. जापान के सहयोग से इस प्रोजेक्ट के पूरा होने में लगभग पांच साल लगेंगे और आम जनता को 2022 तक बुलेट ट्रेन चढ़ने का मौका मिलेगा.

बुलेट ट्रेन ज्यादा सुरक्षित 

वैसे दुनिया के जिन देशों में फिलहाल हाई-स्पीड ट्रेन चल रही हैं उनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चाइना, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ताइवान, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. पांच साल बाद भारत का नाम भी इसमें शुमार हो जाएगा. इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहयोग के लिए जापान को चुनने के पीछे उसकी तकनीक और सुरक्षात्मक पहलू हैं. जापान की बुलेट ट्रेन ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं और अब तक कोई भी बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है.

हाई-स्पीड ट्रैक वाले नेटवर्क में चीन सबसे आगे

वैसे दुनियाभर में सबसे बड़े हाई-स्पीड ट्रैक वाले नेटवर्क की बात करें तो चीन सबसे आगे है. चीन के पास लगभग 22,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक है. दुनिया में सबसे तेज बुलेट ट्रेन भी चीन में ही चलती है. लगभग 350 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली यह ट्रेन 1250 किमी की यात्रा साढ़े चार घंटे में ही पूरी कर लेती है.

देश की पहली बुलेट ट्रेन में यह होगा खास

रफ्तार: बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.

क्षमता: शुरुआती दौर में बुलेट ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे. इनमें 750 यात्री बैठ सकेंगे.

रूट : बुलेट ट्रेन का रूट साबरमती रेलवे स्टेशन से लेकर मुंबई-बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स तक रखा गया है. कुल लंबाई 508 किलोमीटर है. महाराष्ट्र में इसका 156 किमी और गुजरात में 351 किमी लंबा रूट रहेगा.

स्टेशन: फिलहाल ट्रेन चार स्टेशनों पर रुकेगी और दो घंटे सात मिनट में अहमदाबाद की दूरी तय कर लेगी. बाद में 12 स्टेशन होंगे. ये हैं- मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भड़ौच, वडोदरा, आनंद,

अहमदाबाद तथा साबरमती

ट्रैक की खासियत: पूरे ट्रैक का 96 प्रतिशत यानी 468 किमी एलिवेटिड होगा. 6 प्रतिशत मार्ग सुरंग में होगा. 2 प्रतिशत यानी 12 किमी ट्रैक जमीन पर होगा.

समुद्र के नीचे भी: 21 किलोमीटर का सबसे लंबा टनल और 7 किलोमीटर समुद्र के नीचे से रूट रहेगा. पटरियां जमीन से 20 मीटर (करीब 70 फीट ऊपर) एलिवेटेड रहेंगी.

समय: अहमदाबाद से मुंबई की 508 किमी की रेलयात्रा में फिलहाल 7 से 8 घंटे लगते हैं. बुलेट ट्रेन चालूहोने पर 2.07 से 2.58 घंटे लगेंगे.

लागत

परियोजना की कुल लागत 1.08 लाख करोड़ रुपए है. जापान 88 हजार करोड़ रुपए का ऋण (0.1 फीसदी ब्याज दर, यानी हर महीने 7-8 करोड़ रुपए मात्र पर दे रहा है. बाकी धन भारत सरकार खर्च करेगी.

रोजगार

4,000 कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए बड़ोदरा में हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है. इस प्रोजेक्ट से 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना है. परिचालन शुरू होते ही रेलवे के रखरखाव व ऑपरेशन के लगभग 4000 कर्मचारियों की जरूरत होगी. वहीं 20,000 कंस्ट्रक्शन वर्कर की जरूरत होगी.

अगला चरण: सरकार ने अगले चरण में दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-नागपुर, मुंबई-चेन्नई और मुंबई-नागपुर रूटों पर भी बुलेट ट्रेन चलाने की रूपरेखा तैयार की है. नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन इन सभी पर काम कर रहा है

हर साल की लागत

आगे चलकर बुलेट की परियोजना पर हर साल 20,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. हर दिन 36,000 लोग बुलेट ट्रेन से यात्रा कर पाएंगे. 2053 तक यह क्षमता बढ़कर 1,86,000 हो जाएगी.

 

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