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गोरखालैंड अांदोलन से दिवालिया हुए होटल व चाय व्यवसाय

NEWS WING

Kolkalt, 14 September : गोरखालैंड अलग राज्य बनाने को लेकर चल रहे अांदोलन के कारण वहां का होटल व चाय व्यवसाय दिवालिया हो गया है. पुरा इलाका 85 दिनों से बंद है. इससे 1000 करोड़ से अधिक रुपये का नुकसान वहां के कारोबारियों पर प़ड़ा है. हड़ताल, बंदी के दौरान हुए हिंसा से ब्रांड डार्जिलिंग पर तो असर पड़ा ही है. होटल व्यवसाय पुरी तरह चौपट हो गया है. चाय उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले 100 साल में एेसी स्थिति कभी नहीं अायी थी. जो नुकसान हुअा है, उसे पाटने में तीन से चार साल का वक्त लग जायेगा. 

चाय व्यवसाय को 500 करोड़ का नुकसान

मॉनसून के मौसम में दार्जिलिंग में चाय पत्तियों की नीलामी होती है. बंद व हड़ताल के कारण यह नहीं हो पाया. दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के मुताबिक इस साल वहां 87 गार्डेन में 17600 हेक्टेयर भूमि पर चाय के पौधे लगाए गये हैं. यहां 84.50 लाख किलो चाय पैदा होती है. नीलामी प्रक्रिया पुरी नहीं हो पा रही है. 

90 हजार लोग हुए बोरोजगार

गोरखालैंड अांदोलन को लेकर दार्जिलिंग में हो रही हिंसा व बंद के कारण वहां काम करने वाले करीब 90 हजार चाय मजदूर बेकार हो गए हैं. इनमें 55 हजार के करीब परमानेंट मजदूर हैं, जबकि 35 हजार अस्थायी. परमानेंट मजदूरों को वेतन देने में दिक्कत होने लगी है. सबसे बुरी स्थिति अस्थायी मजदूरों की है. उनके सामने परिवार की रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. 

कमाई की सीजन में बंद हैं 300 होटल

मॉनसून अौर दुर्गा पूजा में दार्जिलिंग में चहल-पहल रहती है. पूजा के दौरान वहां लाखों सैलानी अाते हैं. पूजा में अाने वाले सैलानी पहले से ही होटलों में कमरा बुक करा लेते थे. इस बार यह नहीं हो रहा है. करीब 300 होटल बंद हैं. न एडवांस बुकिंग हुई है अौर न ही पूजा के दौरान वहां सैलानी के अाने की उम्मीद है. 

स्कूल संचालन भी हुअा मुश्किल

दार्जिलिंग में कई अावासीय स्कूल चलते हैं. जिसमें देश के दूसरे राज्यों के बच्चे पढ़ने अाते हैं. वहां चल रही अशांति के कारण उन स्कूलों के संचालन पर भी सवालिया निशान लग गया है. दर्जिलिंग में 52 अावासीय स्कूल एेसे हैं, जिसे बेहतरीन माना जाता है. इन 52 स्कूलों की बदौलत दार्जिलिंग पूर्वी भारत का एजुकेशन हब माना जाता है. 

 

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