दस दिनों में एक लाख शौचालय बनाने का सरकारी दावा झूठा, जानिए शौचालय बनाने का सच ग्रामीणों की जुबानी

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 02/11/2018 - 12:19

Ranchi : महज 10 दिनों में एक लाख शौचालय का निर्माण. ऐसा दावा सरकार ने एक हफ्ते पहले किया था. दावे से ऐसा लग रहा था कि मानो गांव के सभी लोग सारा काम छोड़ कर शौचालय बनाने का काम शुरू कर दिया हो. बात यूं ही हजम होने वाली नहीं थी. इसलिए न्यूज विंग की टीम ने जमीनी हकीकत जानने की ठानी. शहर की चकाचौंध से दूर करीब 20 गांवों का दौरा न्यूज विंग के रिपोर्टरों ने किया. न्यूज विंग के इस सर्वे में जो सच सामने आए वो चौंकाने वाले ही नहीं हैं, बल्कि सवाल भी खड़े करने वाले हैं. आखिर क्यों सरकार की तरफ से ऐसी बात की जाती है, जो जमीन पर कहीं दिखती ही नहीं है. क्यों ऐसे भ्रम में जनता को रखने की बार-बार कोशिश होती है, जो हुआ ही नहीं है. गांवों में शौचालय को लेकर आखिर हो क्या रहा है. जानिए पूरा सच न्यूज विंग की इस खास रिपोर्ट में.

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ओरमांझी के बी‍डीओ ने कहा 10 दिन में बने 280 शौचालयहकीकत में कई निर्माण अधूरे

ओरमांझी के बीडीओ मुकेश कुमार ने दावा किया है कि 10 दिनों में सरकारी योजनाओं के तहत एक लाख शौचालय का रिकॉर्ड बनाने में 280 शौचालय उनके प्रखंड के हैं. उन्‍होंने बताया कि प्रखंड में हर सप्‍ताह 140 से 150 नये शौचालय बनाये जा रहे हैं. बीडीओ मुकेश कुमार के इस दावे की हकीकत जानने से पहले हमने ओरमांझी के चकला पंचायत की मुखिया रीना देवी से मुलाकात की और वहां के शौचालय निर्माण की जानकारी ली. उन्‍होंने बताया कि पंचायत के करम टोला में 10 दिनों में 40 शौचालयों का निर्माण किया गया है. उन्‍होंने दावा किया कि इस दौरान मैंने खुद खड़ा होकर सभी शौचालयों को बनवाया है और बढ़िया क्‍वालिटी का काम हुआ है.

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हम रियलिटी चेक करने के लिए चकला पंचायत के बसुआटोली पहुंचे. वहां हमने देखा कि गांव में दो रंगों के शौचालय बने हुए हैं. पीले रंग के शौचालय पिछले साल के थे और नीले रंग के शौचालय कुछ महीने पहले के थे. वहीं कुछ शौचालय अधूरे भी मिले. यहां के एक अधूरे शौचालय के लाभुक सुरेश महतो की पत्‍नी सोनिया देवी ने बताया कि एक महीने से मेरे शौचालय का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है. मुखिया कहती है कि जितना शौचालय बना है वह काफी है. अब बाकी काम आपको ही बालू सीमेंट जुगाड़ कर पूरा करना है. मुखिया ने बालू सीमेंट देने से इनकार कर दिया है. वहीं कुछ लाभुकों ने यह भी शिकायत की है कि शौचालय के निर्माण कार्य में तीन नंबर ईंट यानी घटिया क्‍वालिटी के निर्माण सामग्रियों का इस्‍तेमाल किया गया है. चकला पंचायत के सरना टोली के मालेश्‍वर महतो ने कहा कि हमारा 10 परिवारों का संयुक्‍त परिवार है और मिला है सिर्फ एक शौचालय. हमारे लिए एक शौचालय से काम चलाना मुश्किल है. अभी भी हमें शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है.

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10 दिनों में शौचालय निर्माण संभव नहीं15-20 दिनों में पूरा होता है निर्माण कार्य

यहां पर शौचालय का निर्माण कर रहे राजमिस्‍त्री पुषाराम महतो ने बताया कि 10 दिनों में एक भी शौचालय नहीं बनाया जा सकता है. सरकारी योजना के तहत बनाये जा रहे शौचालय को बनाने में कम से कम 15-16 दिन लग जायेंगे. उन्‍होंने बताया कि शुरुआत गड्ढा खोदने में ही दो दिन का समय लगता है. जोड़ाई करने में 3 दिन लगता है. और ढलाई करने में एक दिन का समय लगता है. ढलाई को जमने में 8-10 दिन लग जाते हैं. उसके बाद एक दिन में प्‍लास्‍टर करने में लगता है और दो दिन रंगाई पुताई और फिनिशिंग में लग जाता है. कभी-कभी यह प्रोसेस पूरा होने में 20 दिन भी लग जाते हैं.

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चटकपुर में बनने हैं 450 शौचालय, बने सिर्फ 60, 11 दिनों में एक भी निर्माण नहीं

चटकपुर पहुंच कर हमने पंचायत की मुखिया रीना कच्छप से मुलाकात करने की कोशिश की. पता चला कि वो पंचायत के दौरे पर हैं. जानकर अच्छा लगा कि प्रतिनिधि जनता के बीच हैं. पर ख़ुशी उस वक्त दूर हो गयी, जब ये पता चला कि लाभुकों को शौचालय के लिए दिए जाने वाले 12 हजार रुपये न देकर अपने पास ही रख ले रही हैं. पांच बोरा सीमेंट, ईंटा और राज मिस्त्री वो दे रही हैं. बाकी लाभुकों को खुद व्यवस्था करनी है. लाभुकों का कहना है कि पांच बोरा सीमेंट में कुछ नहीं होता, हमें दो बोरा अपने से लेना पड़ता है, साथ ही मजदूरी भी खुद ही करनी पड़ती है. जब हमने मुखिया से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि इसमें गलत क्या है. अगर कुछ गलत है तो आप हमें बताएं कि क्या करें. उन्हें समझाने से ज्यादा जरूरी हमें दूसरे गांव का सच जानना जरूरी लगा तो हम निकल पड़े सुंडील पंचायत.

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गड्ढ़ा नहीं हो सकता है, इसलिए शौचालय नहीं बनेगा

रातू प्रखंड के सुंडील पंचायत में 11 दिनों में एक भी शौचालय नहीं बना है. हम सुंडील पंचायत में मुखिया के घर पहुंचे. मुखिया सिबिरिया केरकेट्टा घर से बाहर निकली और हमें कह दिया कि मुखिया जी घर पर नहीं हैं. जबकि वो खुद ही मुखिया थीं. इस बात की जानकारी हमें बाद में हुई. वहां हमें कमलदेव नामक बुजुर्ग ने सच्चाई बतायी. उन्होंने कहा कि यहां हमें यह बोल कर शौचालय नहीं दिया जाता कि यह पहाड़ी इलाका है और यहां गड्ढा नहीं हो सकता, इसलिए शौचालय का निर्माण नहीं हो पाएगा. बताया कि मैंने गड्ढा कर लिया था, लेकिन फिर भी शौचालय बना कर नहीं दिया गया. एक दूसरी महिला ने यही बात दुहरायी. उसके बाद हम शिवशंकर लोहरा के निर्माणरत शौचालय के पास पहुंचे, जहां ये बताया गया कि तीन महीने से ये निर्माण कार्य किया जा रहा है. पैसे मुखिया के ही पास है. वहां भी ये साफ हो गया कि पैसे लाभूकों को नहीं दिया जा रहा है.

कांके के मनातू में भी दावे में नहीं दिखी सच्चाई

जब हमने कांके प्रखंड के मनातू पंचायत का दौरा किया तो यहां की तस्वीर और ही भयावह थी. हमें लगा कि कम-से-कम एक शौचालय का निर्माण तो यहां हुआ होगा. लेकिन ऐसा नहीं था. यहां भी इन 11 दिनों में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ था. यहां पहुंचकर हमने बीए के एक छात्र से बात की, उसने कहा कि यहां फिलहाल शौचालय का कोई निर्माण नहीं हो रहा. जो हुआ भी उसका भी भुगतान नहीं किया गया है. भीओ ने कहा कि हम तीन वार्ड का काम देख रहे हैं. यहां 273 शौचालय का निर्माण होना है. शुरुआत से लेकर अब तक 94 शौचालयों पर ही काम हुआ है.

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नामकुम के चार पंचायतों में सर्वे के बाद भी नहीं बन पाया है 1040 लाभुकों का शौचालय

हमारी दूसरी टीम के मो. असगर खान और सौरभ शुक्ला नामकुम प्रखंड पहुंचे. यहां इन्होंने चार पंचायतों का दौरा किया. नामकुम प्रखंड के चार पंचायत में सर्वे के बावजूद भी 1040 लाभुकों का शौचालय अब तक नहीं बन पाया है. इनमें से ज्यादातर ऐसे परिवार हैं, जिनसे विभाग के अधिकारियों ने आधार कार्ड से लेकर बैंक खाता तक का डिटेल्स ले लिया है. पर इनके घर में सरकारी शौचालय कब बनेगी, इसका इंतजार इन परिवारों को है. नतीजा ये है कि परिवार खुले में शौच करने पर मजबूर हैं.

बड़ाम पंचायत में 560 परिवार, लेकिन शौचालय एक भी नहीं

बड़ाम पंचायत की मुखिया अंजू कुजूर ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2015 में सर्वे हुआ. सर्वे में 262 घर ऐसे हैं, जिसे आजतक शौचालय बनाकर नहीं दिया गया. 2016 के आखिर में पीएचईडी विभाग से एक बार फिर सर्वे किया गया, जिसमें 643 और पिछले 262 घरों को शौचालय बनाकर देने की बात कही गयी थी. सिर्फ 643 लाभुकों को ही शौचालय बनकर दिया गया. अंजू कुजूर ने कहा कि इन लाभुकों से अक्टूबर 2017 में पीएचईडी विभाग के जूनियर इंजीनियर समेत बीडीओ और दूसरे अधिकारियों ने मुलाकात कर आश्वासन भी दिया था कि इनका शौचालय बन जायेगा. साथ ही इनसे आधार कार्ड और बैंक खाता का डिटेल्स भी लिया गया था. लेकिन शौचालय का अबतक एक भी रुपया नहीं आया है. उन्होंने कहा कि नये सर्वे में भी करीब 300 घर ऐसे हैं, जिसे शौचालय बनाकर अभी तक नहीं दिया गया है. वहीं बड़ाम पंचायत के लाभुक पुतूल टोप्पो, पार्वती देवी, शांति देवी, पुष्पा टोप्पो, रीना टोप्पो, रिंकी कच्छप, अंजली कच्छप और कैरी कहती हैं कि उन्होंने अपने पैसे से शौचालय का आधा निर्माण तो करा लिया है, लेकिन अब उन्हें सरकारी सहयता का इंतजार है. शौचालय के नाम पर कहीं सिर्फ गड्डा तो कहीं सिर्फ दीवार ही खड़ी है.

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बरगांवा में 140 शौचालय का काम एक साल से है अधूरा

नामकुम प्रंखड के बरगांवा पंचायत में पिछले एक साल से बालकृष्ण महतो, पुनित महतो, सुदामा महतो, सुनीता देवी, राजेश्वरी देवी, विनोद महतो समेत 140 लाभुकों को शौचालय नहीं मिल पाया है. इनमें ज्यादातर घरों में शौचालय का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ है, लेकिन अधूरा पड़ा हुआ है. पंचायत की मुखिया अनिता तिर्की ने कहा कि 2016 के अंत में 290 लाभुकों को पीएचईडी विभाग से चयनित किया गया था, जिनमें से लगभग 150 परिवार को ही शौचालय मिल पाया है.

239 घर को अब भी शौचालय का इंतजार

स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर घर में हो शौचालय का सपना नामकुम प्रखंड में दम तोड़ रहा है. नामकुम के आरा पंचायत में 239 परिवार को अब भी शौचालय का इंतजार है. दरअसल यहां भी 2016 में सरकार की तरफ से शौचालय के लिए सर्वे किया गया था. जिसमें 364 परिवारों का चयन हुआ था. इसमें से 125 परिवार को सरकार की तरफ से शौचालय नसीब हुयी. 239 लाभुकों को अब भी इंतजार है कि सरकार पैसा देगी तो उनका शौचालय बन पायेगा. इनमें से 50 ही घर ऐसे हैं, जहां शौचालय निर्माण कार्य चल रहा है, मगर ये निर्माण कार्य भी पिछले एक साल से चल रहा है. मुखिया विजय टोप्पो ने कहा कि भक्तो टोप्पो, रामू संगा, अनिल कच्छप, बंधू कच्छप, अशोक कच्छप, रामजून टोप्पो, सुनील टोप्पो, चेतन नायक, नकूल मुंडा समेत 239 लोगों को सर्वे के बाद भी शौचालय बनकर नहीं मिल पाया है. उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें शौचालय बनाकर दे दी जायेगी.

 सर्वे के मुताबकि महिलौंग में 100 लाभुक हैं वंचित

नामकुम के महिलौंग पंचायत की मुखिया ने बताया कि 2016 के सर्वे के मुताबिक 100 घर ऐसा है, जहां शौचालय नहीं बन पाया है. उन्होंने कहा कि पंचायत में 850 घरों को शौचालय देना था. इनमें से 705 लाभुकों का नाम फाइनल हुआ, जिसमें लगभग 650 लोगों का शौचालय बनकर तैयार है. जबकि 50 घरों में शौचालय निर्माण कार्य चल रहा है.

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