हर माह 30 करोड़ का डस्ट (चारकोल), कोयला के साथ मिलाकर कंपनियों को भेज रहा कोल ट्रांसपोर्टर

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 01/15/2018 - 10:35

राज्य पुलिस और रेलवे पुलिस के अधिकारियों के बीच हर माह बंटता है करीब 10 करोड़ रुपया.

रामगढ़ जिला में स्थित लगभग सभी रेलवे साइडिंग पर मिलाया जाता है कोयला में चारकोल.

Ranchi: कोयला कारोबार में बड़ा घपला हो रहा है. अच्छी क्वालिटी के कोयला में डस्ट (चारकोल) मिलाकर  बड़ी कंपनियों को प्रति माह करोड़ों रुपये का नुकासन पहुंचाया जा रहा है. अच्छी क्वालिटी के कोयला डस्ट मिलने का यह अवैध धंधा वैसे तो कमोबेश सभी रेलवे साइडिंग पर हो रहा है, लेकिन रामगढ़ में स्थित सभी रेलवे कोल साइडिंग पर सबसे अधिक हो रहा है. यह अवैध कारोबार हर माह करीब 30 करोड़ रुपया से अधिक का है. राज्य पुलिस से लेकर रेलवे पुलिस तक को हर माह करीब आठ-दस करोड़ रुपया रिश्वत के रुप में मिल रहा है. उल्लेखनीय है कि रामगढ़ जिला स्थित रेलवे साइडिंग से बजाज, जेपी, नालको, जीवीके जैसी बड़ी कंपनियों को कोयला भेजा जाता है. कुछ रैक कोयला हल्दिया भी भेजा जाता है. 

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एेसे होता है यह अवैध कारोबार

बड़ी कंपनियां कोयले की ट्रांसपोर्टिंग का जिम्मा ट्रांसपोर्ट कंपनियों को देती है. ट्रांसपोर्ट कंपनियां कोयला खादानों से ट्रक व हाईवा से कोयला को रेलवे साइडिंग पर जमा करते हैं. फिर उसे रैक पर लोड करके संबंधित कंपनियों तक पहुंचाया जाता है. एक रैक में करीब 4000 टन कोयला लोड होता है. जिसकी कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपया होता है. ट्रांसपोर्ट कंपनियां रेलवे साइडिंग में कोयला का डस्ट (चारकोल) को पहले से जमा करके रखती हैं. लोडिंग के वक्त एक रैक कोयला में करीब 500 टन डस्ट (चारकोल) मिला दिया जाता है. इस तरह आठ रैक कोयला लोडिंग के बाद अच्छी क्वालिटी का एक रैक कोयला साइडिंग में बच जाता है. जिसे बाद में खुले बाजार में या किसी कंपनी को रैक के जरिये ही पहुंचा दिया जाता है. इस तरह हर आठ रैक कोयला पर एक रैक कोयला का अवैध कारोबार किया जा रहा है. न्यूज विंग को मिली जानकारी के मुताबिक रामगढ़ में स्थित रेलवे साइडिंग (रजरप्पा, कुजू, भुरकुंडा, पतरतू  व बरकाकाना) में यह काम खुलेआम हो रहा है. कोल ट्रांसपोर्टरों का सिंडिकेट व नेटवर्क इतना मजबूत है कि कोई भी उनके खिलाफ मुंह नहीं खोलता. रामगढ़ में स्थित कोल साइडिंग से हर माह करीब 20-25 रैक कोयला डस्ट (चारकोल) के बदले जमा किया जाता है. जिसकी कीमत 30-35 करोड़ रुपये होती है.

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पुलिस व रेल पुलिस को क्यों मिलता है रिश्वत

सवाल यह कि इस अवैध कारोबार को करने वाला कारोबारी राज्य पुलिस और रेलवे पुलिस के अधिकारियों को क्यों खुश करता है. इसकी दो वजहें हैं. पहली कोल साइडिंग पर अच्छी क्वालिटी के कोयले में डस्ट (चारकोल) ना मिलाया जाए, इसे रेल पुलिस नियंत्रित कर सकती है. दूसरी यह कि कोल साइडिंग तक सिर्फ कोयला ही पहुंचे, डस्ट (चारकोल) नहीं, इसे राज्य पुलिस नियंत्रित कर सकती है. यही कारण है कि यह कारोबार दोनों पुलिस के अफसरों को मिलाने के बाद ही किया जाता है. चार दिन पहले रांची के पिस्का कोल सइडिंग पर इसी तरह अच्छी क्वालिटी के कोयला में डस्ट (चारकोल) मिलाया जा रहा था, जिसे रेलवे विजिलेंस ने पकड़ा. जिसके बाद पिस्का कोल साइडिंग को बंद करा दिया गया. सूत्रों के मुताबिक पिस्का साइडिंग पर छापा भी उसी सिंडिकेट की सूचना पर मारा गया, जो रामगढ़ में बड़े पैमाने पर यही काम कर रहा है.

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