झारखंड के पैडमैन हैं मंगेश झा, नौकरी छोड़ ग्रामीण आदिवासी महिलाओं की कर रहे मदद

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/08/2018 - 14:06

Anita Tanvi

Ranchi: फिल्म पैडमैन में अक्षय कुमार की भूमिका और पैडमैन के नाम से विख्यात अरूणाचलम की बातें तो खूब हो रही हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि अरूणाचलम जैसे ही एक पैडमैन झारखंड में भी हैं. जी हां इनका नाम हैं मंगेश झा. 2009 में भुवनेश्वर से  होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके मंगेश झा ने अच्छी खासी नौकरी और बेहतरीन पैकेज को ना बोल दिया और झारखंड के दूर-दराज के गावों में ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं और लड़कियों के बीच पीरियड्स को लेकर स्वास्थ्य जागरूकता फैला रहे हैं.

 

इसे भी पढ़ेंः 'पैडमैन' के जरिये घरों के अंदर अर्से से दबे “पीरियडस” जैसे अहम मुद्दे पर खुलकर बातचीत शुरू होने के आसार

पैड की जगह जंगली घास और भूसी का इस्तेमाल करती हैं ग्रामीण आदिवासी महिलाएं

मंगेश झा कहते हैं कि आपको जानकार आश्चर्य होगा की ग्रामीण आदिवासी महिलाएं आज भी पीरियड्स के दौरान पैड की जगह जंगली घास और भूसी का इस्तेमाल करती हैं. कुछ महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती हैं. ऐसा जागरूकता की कमी की वजह से तो है ही उनकी खराब आर्थिक स्थिति भी उनकी इस परिस्थिति के लिए कम जिम्मेदार नहीं.

अपनी प्लेट में महंगे खाने को छोड़ उठ जाते हैं अमीर

मंगेश झा कहते हैं अमीर वर्ग के लोग महंगे-महंगे होटलों में खाना खाने आते हैं और उसके लिए काफी पैसे भी खर्च करते हैं. यही नहीं पैसे देने के बावजूद वे अपनी प्लेटों में इन महंगे खाने को छोड़ उठ जाते हैं. ऐसी स्थिति को देख कर उन्हें काफी दुख हुआ जबकि देश और राज्य में कितने गरीब ऐसे हैं जो कि ढंग का भोजन करना तो दूर पेट भर कर खाना भी रोज नहीं खा पाते. लोगों को इस विषय पर खुद ही आत्ममंथन करने की जरूरत है.

इसे भी पढ़ेंः पीएम मोदी के लिए अक्षय ने रखी स्पेशल स्क्रीनिंग, साथ देखेंगे 'पैडमैन'

पहले मंगेश की मां इस काम में करती थी उनकी मदद

बता दें कि मंगेश झा ग्रामीण महिलाओं व लड़कियों के बीच पैड का वितरण भी करते हैं. मंगेश बताते हैं कि पहले उनकी मां इस काम में उनकी मदद करती थी. वह ही पैडस बनाकर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाने के लिए देती थीं लेकिन अब उनके साथ विभिन्न गांवों की वॉलिंटियर्स भी जुड़ गयीं हैं और वे भी इसमें मदद करती हैं. जल्द ही विभिन्न गांवों में पैडस बनाने की युनिट खोलने की मंगेश की योजना है जिसपर काम कर रहे हैं. ताकि बीहड़ ग्रामीण इलाके की महिलाओं और लड़कियों को कम कीमत पर आसानी से पैडस उपलब्ध हो सके.

इसे भी पढ़ेंः पैडमैन को लेकर बोली ट्विंकल खन्ना, फिल्म के जरिए रूढ़िवाद सोच पर एक गहरी चोट लगेगी

ग्रामीण इलाके के लिए कुछ करने की चाह को दिशा मिली

मंगेश कहते हैं कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य के लोगों के जीवनशैली में अंतर ने उन्हें झकझोर दिया. आदिवासियों को वे करीब से समझना चाहते थे. इसी कारण अपने माता-पिता के साथ वे रांची में रहने लगे. इस दौरान विभिन्न ग्रामीण इलाकों की यात्रा की. तब यह जानकर उन्हें बहुत हैरानी हुई कि यहां की ग्रामीण महिलाएं और लड़कियां अपने पीरियडस के दौरान जंगली घास और भूसी तक पर निर्भर हैं. यह जानने के बाद उन्हें ग्रामीण इलाके के लिए कुछ करने की चाह को दिशा मिली और ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों की इस परेशानी को खत्म करने की मुहिम मंगेश ने शुरू कर दी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

top story (position)