सरकार गरीब उपभोक्ताओं से वसूलेगी बिजली विभाग के रेवेन्यू गैप की राशि और अदानी ग्रुप को 360 करोड़ रुपये की सलाना माफी 

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 02/06/2018 - 17:26

Akshay Kumar Jha

सरकार की इस नीति के क्या कहने...
Ranchi: मंगलवार सुबह जैसे ही झारखंड के लोगों ने अखबार पकड़ा होगा, उन्हें जोर का करंट लगा होगा. मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है एक अप्रैल से बिजली दरें दोगुनी. वहीं ग्रामीण इलाकों में तो ये दरें पांच गुनी होने जा रही हैं. शहरी इलाकों में जहां अभी तक बिजली दर प्रति यूनिट तीन रुपए है, वो एक अप्रैल से करीब सात रुपए हो जायेगी. ग्रामीण इलाकों में प्रति यूनिट करीब 1.25 रुपए बिजली है, वो बढ़कर करीब सात रुपए होने जा रही है. सरकार ने इसके पीछे जो तर्क रखा है, वो यह है कि सरकार अब बिजली बनाने से लेकर बिजली आम जनता के पास पहुंचने तक का जो रेवन्यू गैप आता था वो नहीं भरेगी. इसकी वसूली जनता से की जाएगी, जिससे बिजली महंगी होने वाली है.

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अब तक क्या होता आया है
अभी तक जो बिल की राशि आम उपभोक्ताओं से वसूली जाती थी,  वो बिजली उत्पादन और बिजली वितरण करने की लागत से काफी कम होती थी. बिजली कंपनियों को इसकी भरपायी सरकार करती थी, जिसे रेवन्यू गैप कहते हैं. यही कारण था कि देश भर में सबसे सस्ती बिजली झारखंड की होती थी. लेकिन अब सरकार ने यह राशि देने से मना कर दिया है. इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ने वाला है. सरकार ने 2017-18 का रेवन्यू गैप 766.34 करोड़ रुपए बताया है

गरीब जनता पर चला चाबुक और अदानी ग्रुप को 360 करोड़ की सलाना माफी
आखिर सरकार की इस नीति को क्या कहेंगे. सरकार आने वाले वित्त वर्ष से बिजली की दर दोगुनी से लेकर पांच गुनी तक करने वाली है. राज्य में दो निजी पावर प्लांट हैं. इंडलैंड पावर लिमिटेड और आधुनिक पावर एंड नैचुरल रिसोर्ससेज लिमिटेड. सरकार ने इन दोनों कंपनियों को जिस शर्त और नियमों पर झारखंड में थर्मल पावर प्लांट लगाने की अनुमति दी है. वो नियम और शर्त अदानी ग्रुप के मामले में सरकार ने ताक पर रख दी है. अदानी ग्रुप से करार करते वक्त सरकार ने जिन शर्तों और नियमों की अनदेखी की है, उससे सरकार को सलाना करीब 360 करोड़ का घाटा होगा. दूसरी भाषा में यह कहा जा सकता है, सरकार ने अदानी पावर को सलाना 360 करोड़ की रियायत दे दी. अदानी पावर झारखंड में बिजली बनाकर बांग्लादेश भेजेगा. बिजली बनाने में पर्यावरण को जो क्षति होगी उसकी भरपायी भी अदानी ग्रुप की तरफ से नहीं होगी. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों सरकार अपने राज्य की जनता को दी जाने वाली रियायत खत्म कर रही है और निजी कंपनी को सलाना 360 करोड़ रुपए की राहत दे रही है. 

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रियायत देने के लिए रघुवर सरकार ने विद्युत पॉलिसी से किया खिलवाड़
विद्युत पॉलिसी के क्लाउज-2 में इस बात का साफ उल्लेख है कि कोई भी निजी कंपनी अगर झारखंड में पावर प्लांट लगाती है, तो जितनी बिजली कंपनी उत्पादन करेगी, उसका 25 फीसदी निर्धारित दर पर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को देगी. अदानी ग्रुप झारखंड में 1600 मेगावट बिजली उत्पादन करने जा रहा है. क्लाउज-2 के मुताबिक अदानी को 400 मेगावाट झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. अदानी ग्रुप जो भी बिजली उत्पादन करेगा, वो सारा-का-सारा बांग्लादेश जायेगा. नियम और शर्तों को ताक पर रखते हुए झारखंड सरकार ने अपने करार में यह लिखा है कि अदानी ग्रुप दूसरे स्रोत से 400 मेगावट बिजली झारखंड को मुहैया करायेगा. 

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अदानी ग्रुप तय करेगा कि वो किस दर पर देगा झारखंड को बिजली   
झारखंड विद्युत पॉलिसी के नियमों के तहत कोई भी निजी कंपनी अगर झारखंड में पावर प्लांट लगाती है, तो 25 फीसदी बिजली झारखंड सरकार को दो स्लैब में देगी. पहली स्लैब की बिजली दर निर्धारित दर और ऊर्जा दर पर सरकार तय करेगी. वहीं दूसरी स्लैब की दर अस्थिर रहेगी. वो कंपनी की लागत के मुताबिक घट और बढ़ सकती है, लेकिन अदानी ग्रुप के साथ जो करार हुआ है, उसमें सरकार नहीं तय कर सकती है कि झारखंड को जो दूसरे स्रोत से बिजली देने की बात ग्रुप कर रहा है, उसकी दर क्या होगी. पूरी तरह से यह कंपनी तय करेगी कि वो किस दर पर बिजली सरकार को देती है. 

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दूसरी कंपनियों के लिए ग्रीन सेस और अदानी के लिए सब फ्री
बेहद चौंकाने वाला करार सरकार ने अदानी ग्रुप के साथ किया है. इंडलैंड पावर लिमिटेड और आधुनिक पावर एंड नैचुरल रिसोर्ससेज लिमिटेड के साथ सरकार ने जो करार किया है,  उस करार और अदानी ग्रुप के साथ करार में काफी फर्क है. जाहिर सी बात है पावर प्लांट लगाने के बाद उस क्षेत्र के पर्यावरण को काफी क्षति पहुंचती है. इंडलैंड पावर लिमिटेड और आधुनिक पावर एंड नैचुरल रिसोर्ससेज लिमिटेड से सरकार ग्रीन सेस के रूप में छह पैसा प्रति यूनिट वसूलती है. इस पैसे से सरकार पर्यावरण बेहतर करने की दिशा में काम करती है, लेकिन अदानी ग्रुप से सरकार पर्यावरण पर हो रहे असर का कोई का सेस चार्ज नहीं करेगी, जबकि अदानी ग्रुप 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगा. इसी हिसाब से पर्यावरण पर असर भी उतना ही ज्यादा पड़ेगा. 

एनटीपीसी के रहते किसी पावर प्लांट की कोई जरूरत नहीं झारखंड को
रघुवर सरकार बनते ही पीटीपीएस (पतरातू थर्मल पावर स्टेशन) का एनटीपीसी से अधिग्रहण करने का क्रेडिट रघुवर सरकार ने लिया. कहा गया कि पीटीपीएस के अधिग्रहण के बाद से यहां का उत्पादन 4000 मेगावाट हो जाएगा. बताते चलें कि अगर पीटीपीएस का उत्पादन 4000 मेगावाट हो जाता है, तो झारखंड को कहीं और से बिजली लेने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. ऐसे में सवाल यह कि जब झारखंड ने सरप्लस बिजली के लिए पीटीपीएस का अधिग्रहण एनटीपीसी से करा ही दिया, तो बाद में अदानी ग्रुप से गोड्डा में पावर प्लांट लगाने के करार की क्या जरूरत थी. वो भी 360 करोड़ सलाना रियायत देने की शर्त पर. 

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ऐसे समझे कैसे होगा 360 करोड़ रुपए का घाटा

360 करोड़ रुपए का घाटा
समझे कैसे होगा 360 करोड़ रुपए का घाटा


अगर इस राशि में ग्रीन सेस की राशि को जोड़ दिया जाये, तो कुल राशि 360 करोड़ रुपए सलाना हो जाती है. इस राशि को सरकार ने रियायत के तौर पर अदानी ग्रुप को दे दिया है, जबकि दूसरी तरफ सरकार रेवन्यू गैप खत्म करने के नाम पर जनता से दोगुनी से लेकर पांचगुनी तक बिजली की दर थोपने की तैयारी में है.

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