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#Jharkhand: 12 हजार युवा हर साल करते हैं ITI, चार साल में मात्र 14,310 को ही मिला नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम का लाभ

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Rahul Guru

Ranchi: रोजगार देने के मामले में झारखंड की डबल इंजन की सरकार की विफलता हर स्तर पर देखी जा सकती है. केंद्र सरकार की ओर से कौशल विकास योजना व नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम नाम से दो बड़ी रोजगार देनेवाली योजना की शुरुआत की गयी.

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झारखंड इन दोनों ही रोजगारपरक योजनाओं को धरातल पर उतारने में फेल रहा है. कौशल विकास योजना के तहत दो लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देने के बाद मात्र 18 हजार को नौकरी मिली.

ठीक इसी तरह अप्रेंटिसशिप योजना में भी झारखंड की सरकार असफल रही है.

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क्या है नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम

भारत सरकार ने 19 अगस्त 2016 को 10,000 करोड़ रुपये के साथ एक योजना शुरू की. इस योजना का नाम था नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम. इस योजना का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसर पैदा करना और युवा वर्ग को प्रशिक्षित करके उन्हें रोजगार प्रदान करना है.

इस योजना के तहत, मासिक वेतन पर प्रशिक्षुओं को रखनेवाली कंपनियों को स्टाइपेंड का 25 फीसदी (जो अधिकतम 1,500 रुपये प्रति महीने प्रति अप्रेंटिस) केंद्र सरकार द्वारा अदा किया जाता है.

इसके अलावा, 500 घंटे तक की ट्रेनिंग देनेवाले बेसिक ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को सरकार 25 प्रतिशत प्रतिपूर्ति रिइंबर्समेंट देगी, जो अधिकतम 7,500 रुपये होगा.

योजना की शुरुआत में केंद्र सरकार ने लक्ष्य रखा कि 2016-2017 के वित्तीय वर्ष के दौरान पांच लाख प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाये और 2017-18 में 10 लाख और 2018-2019 में 15 लाख प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाये.

इसी तरह वार्षिक रूप से प्रशिक्षुओं की संख्या में वृद्धि की जाये. 2020 तक 50 लाख प्रशिक्षुओं को तैयार किये जाने का लक्ष्य रखा गया.

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झारखंड से 14,310 को ही मिला लाभ

इस योजना के तहत आइटीआइ पास सहित अन्य का चयन कर प्रशिक्षण विभिन्न संस्थानों में कराया जाना था. इसके लिए चार साल में मात्र 14,310 का ही नामांकन हुआ है.

आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में 5193, 2016-17 में 4443, 2017-18 में 2983, 2018-19 में 1691 का ही प्रशिक्षण के लिए नामांकन किया गया है. जबकि  नेशनल काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग के तहत झारखंड में 400 से अधिक सरकारी व प्राइवेट आइटीआइ संचालित हो रहे हैं.

जहां से हर साल लगभग 12 हजार युवा निकलते हैं. किसी भी ट्रेड से आइटीआइ की निकलनेवाले छात्रों में से 9 से 12 फीसदी विद्यार्थियों को नौकरी मिल पाती है. ऐसे ही युवाओं के लिए नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशनल स्कीम थी. लेकिन इसका लाभ देने में भी सरकार विफल रही है.

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