खूंटी : स्कूल में शिक्षकों की कमी और प्रशासन के उदासीन रवैये से नाराज सरजोमा ग्रामसभा ने बच्चों को स्कूल न भेजने का लिया निर्णय

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 04/11/2018 - 17:50

Pravin kumar

Khunti : खूंटी जिला में ग्रामसभा के द्वारा सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की मांग, शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में लागू होने के बाद से ही किया जाता रहा है. झारखंड में 1 अप्रैल 2010 को शिक्षा अधिकार अधिनियम कानून लागू किया गया, इसके बाद से ही ग्रामीण अंचल में शिक्षकों की मांग की जाती रही है. जिसे सरकार अनसुना करती रही है. ऐसे में ग्रामीण अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिये सरकारी विद्यालय में चंदा के पैसे से शिक्षक रख रहे हैं. वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी से शिक्षक की मांग के संबंध में सैकड़ों मांग पत्र सौंपा जा चुका है. जिसको विभाग के द्वारा अनसुना किया जाता रहा है. पत्थलगड़ी के बाद ग्रामीण इलाकों में अब सरकारी योजना के प्रति आमजनों का नजरिया बदल रहा है. सरकार के द्वारा शिक्षक बहाल नहीं करने के बाद अब सरजोमा ग्रामसभा से मांग उठी है कि सरकार अगर शिक्षक नियुक्त नहीं कर सकती है, तो टीएसी का पैसा सीधे ग्रामसभा को दे. ग्रामसभा बच्चों को सही शिक्षा देने के लिए शिक्षक नियुक्त करेगी.

राजकीयकृत्त उत्क्रमित मध्य विद्यालय सरजोमा खूंटी जिला के खूंटी प्रखंड में स्थित है. इस विद्यालय के लिये ग्रामसभा के द्वारा 2014 से शिक्षकों की मांग की जा रही है. सरोजामा ग्रामप्रधान घसीराम मुंडा कहते हैं कि हम ग्रामसभा के माध्यम से दो साल से विद्यालय में शिक्षकों की कमी के संबध में विभाग को आवेदन देते रहे हैं. हमारे गांव के विद्यालय में कक्षा एक से लेकर आठ तक की पढ़ाई होती है, जबकि वहां मात्र एक शिक्षक मो.नायर एजाज ही कार्यरत हैं.

विद्यालय में 86 बच्चों का नामांकन है. जब सरकार की ओर से इस पर पहल नहीं की गई तो ग्रामीणों ने 2014 में अपने स्तर से ग्रामसभा आयोजित कर आपस में चंदा कर दो व्यक्ति को एक-एक हजार के मानदेय पर शिक्षक नियुक्त किया. जिसमें से एक व्यक्ति ने अब पढ़ाना छोड़ दिया है. वर्तमान में गांव की ही एक महिला अब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रही है.

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शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामसभा ने कई बार विभाग को लिखा पत्र

ग्रामसभा के द्वारा 2014 से ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन अभी तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है. सितंबर 2017 में ग्रामसभा ने उपायुक्त खूंटी को वर्गवार एवं विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए लिखा था, लेकिन आज तक न ही डीसी और न ही जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस ओर ध्यान दिया.

ग्रामसभा मजबूरी में लेगा विद्यालय बंद करने का फैसला

विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामसभा ने अब तय किया है कि अब वे प्रशासन को और आवेदन नहीं देंगे. अगर गांव के विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती है तो मजबूरी में ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे.

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ग्रामीणों की मांग, ट्राईबल सब प्लान का पैसा ग्रामसभा को मिले

सरजोमा के ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पा रही है तो ट्राईबल सब प्लान (टीएसपी) की राशि को सीधे ग्रामसभा में भेज दे,  वे टीएसपी की राशि से स्वयं ही शिक्षकों की नियुक्ति कर लेंगे. 

इस संबंध में बुधवार को उपायुक्त खूंटी से बात हुई. जब उपायुक्त खूंटी को मामले की जानकारी दी गई तो डीसी सूरज कुमार ने शिक्षकों की नियुक्ति का आश्वासन दिया है.

सरकारी स्कूल के विलय से भी नाराज हैं ग्रामीण

जिले के 63 विद्यालयों का निकटतम विद्यालय में विलय किया जा चुका है और 88 विद्यालयों का निकटतम विद्यालय में विलय की तैयारी की जा रही है. खूंटी प्रखंड के हाबुडीह और बोगमान के विद्यालय का विलय कुरकुटा में किया गया है. गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि सरकार हमारे बच्चों को शिक्षा नहीं देना चाहती है. एक तो विद्यालय में शिक्षकों का अभाव है, उपर से मेरे गांव हाबुडीह का स्कूल को बंद कर दिया गया है, जो गलत है.

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खूंटी डीएससी सुरेश चंद्र घोष क्या कहते है

राजकीयकृत्त उत्क्रमित मध्य विद्यालय सरजोमा में शिक्षकों की कमी है, लेकिन ग्रामसभा के द्वारा विद्यालय में बच्चों को नहीं भेजने संबंध में जानकारी नहीं है. विद्यालय के विलय के बाद जहां बच्चों की संख्या अधिक है, वहां शिक्षक भेजे जायेंगे. जिला में 63 विद्यालय का निकटतम विद्यालय में विलय किया जा चुका है और 88 विद्यालय का विलय करना है. जल्द ही राजकीयकृत्त उत्क्रमित मध्य विद्यालय सरजोमा में शिक्षक उपलब्ध कराई जाएगी.

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