अटल के राज में नजदीक में खुला स्कूल, चेले के राज में वही स्कूल हो रहे दूर

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 04/11/2018 - 13:24

Latehar : लातेहार जिले में 168 स्कूलों को बंद करके दूर दराज के स्कूलों के साथ मर्ज करने की अनुशंसा की गई है. जिसका सीधा असर नन्हें नौनिहालों के भविष्य पर पड़ने वाला है. अब ये समस्या भी उत्पन्न हो गई है कि जो बच्चे सुविधा के अभाव में दूर के स्कूल तक नहीं जा पाएंगें उन्हें शिक्षा की रोशनी से वंचित ही रहना पड़ेगा. लिहाजा स्थानीय लोग सरकार के इस फैसले का जोरदार विरोध कर रहे हैं. गौरतलब है कि 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी के द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत जंगल गांव में स्कूल खोले गए थे ताकि उन इलाकों के बच्चों तक शिक्षा की ज्योति पहुंच सके और हर कोई मुख्यधारा से से जुड़ा रहे. लेकिन अब कई विद्यालयों को को बगल के किसी गांव में मर्ज किया जा रहा है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ेगा.

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स्कूल प्रबंधन समिति की सहमति बिना ऐसा करना उचित नहीं

अगर किसी स्कूल को बंद कर उसे दूसरे स्कूल से मर्ज किया जाना हो, तो पहले स्कूल प्रबंधन की सहमति भी ले लेनी चाहिए, ताकि आपत्तियों या अन्य समस्याओं का पता चल पाए, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. कहने को तो बाल शिक्षा का अधिकार कानून भी है, मगर इसको लेकर न तंत्र को फिक्र है और न किसी जनप्रतिनिधि को कि आखिर स्कूल दूर हो जाएगा तो बच्चे पढ़ाई कैसे कर पाएंगे. कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूल दूर हो जाने पर बच्चों को अकेले भेजना भी एक प्रकार से जोखिम लेने जैसा है.

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बता दें कि एक विद्यालय सदर प्रखंड के नवागढञ पांचायत स्थित घघरी गांव में है, जो पहाड़ों से घिरा हुआ है, जिसे हिरना छापर विद्यालय में मर्ज करने की अनुशंसा की गई है. परेशानी ये है कि घघरी गांव से लगभग 5 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता है जिसमें बच्चों का आना.जाना खतरों से खाली नहीं है. वहीं कई हिन्दी विद्यालयों को उर्दू विद्यालय मे मर्ज किये जाने की बात भी सामने आ रही है. कहना गलत नहीं होगा कि लातेहार में बच्चों को पढ़ाने के लिए अटल विहारी वाजपेयी के राज में जहां कई स्कूल नजदीक में खोले गए, अब उनके चेले के राज में उन्हीं स्कूलों को दूर किया जा रहा है. आशंका ये जताई जा रही है कि स्कूल दूर होने से बच्चे भी शिक्षा से दूर हो सकते हैं.

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