न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#LokSabha : #Sitharaman ने कहा, आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए कार्पोरेट कर में कटौती, विपक्ष बोला, वित्तीय घाटा बढ़ेगा

एशिया के कई ऐसे देशों में कार्पोरेट कर पहले से अपेक्षाकृत कम हैं जिनकी भारत के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा है.

55

NewDelhi :  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कार्पोरेट कर में कटौती के कदम को निवेश बढ़ने के लिए जरूरी करार देते हुए सोमवार को लोकसभा में कहा कि इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, पूंजी बाजार में धन प्रवाह बढ़ेगा और इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. वहीं, विपक्ष ने कहा कि इससे देश का वित्तीय घाटा बढ़ेगा और मुश्किल का सामना कर रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया जा सकेगा.

इसे भी पढ़ें : #CRISIL ने चालू वित्त वर्ष में #GDP वृद्धि का अनुमान 6.3 से घटाकर 5.1 प्रतिशत किया

JMM

कार्पोरेट कर में कटौती से निवेश बढ़ेगा और इससे रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे

कार्पोरेट कर में कटौती से जुड़े संशोधन वाले ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2019 को चर्चा एवं पारित कराने के लिए सदन में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में निवेश बढ़ाने के लिए कार्पोरेट में कर में कटौती की गयी है.
उन्होंने कहा कि एशिया के कई ऐसे देशों में कार्पोरेट कर पहले से अपेक्षाकृत कम हैं जिनकी भारत के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा है. निर्मला ने कहा कि कार्पोरेट कर में कटौती से निवेश बढ़ेगा और इससे रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे.  उन्होंने कहा कि कार्पोरेट कर के कटौती का लाभ विनिर्माण क्षेत्र की नयी इकाइयों को मुख्य रूप से होगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के इस कदम से पूंजी बाजार में धन का प्रवाह भी बढ़ेगा और इन उपायों से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. दरअसल, सरकार ने मौजूदा कंपनियों के लिए मूल कार्पोरेट कर की दर को मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत किया है. इसके साथ ही एक अक्टूबर 2019 के बाद लगने वाली नई विनिर्माण इकाईयों के लिए कर की दर को घटाकर 15 प्रतिशत पर ला दिया.  ऐसी इकाइयों को 31 मार्च 2023 को अथवा इससे पहले उत्पादन शुरू करना होगा.

इसे भी पढ़ें : #AverageWageGrowth : अगले साल भारत में 9.2 और एशिया में औसत वेतन वृद्धि 5.3 प्रतिशत  रहने का अनुमान

अधीर रंजन चौधरी ने कहा,  यह सरकार कार्पोरेट की है

विधेयक के संबंध में सांविधिक संकल्प रखने वाले कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह सरकार ‘कार्पोरेट की है, कार्पोरेट के लिए है और कार्पोरेट के द्वारा है.  उन्होंने दावा किया कि कार्पोरेट कर में कटौती से सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा जिससे वित्तीय घाटा बढ़ेगा.  चौधरी ने देश के एक प्रमुख उद्योगपति के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को यह स्वीकार करना चाहिए कि डर का माहौल है.

उन्होंने कहा कि जीएसटी दर में कटौती करनी चाहिए और ईमानदार करदाताओं और वेतनभोगी वर्ग को आयकर में राहत देनी चाहिए.  भाजपा के निशिकांत दुबे ने कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि यह दौर सतत आर्थिक कल्याण का है और इस पैमाने पर मोदी सरकार पूरी सफलता से काम कर रही है.  उन्होंने कहा कि इस सरकार में आम लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है. उज्ज्वला और स्वच्छ भारत मिशन तथा 2024 तक हर घर जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करना ऐसे काम हैं जो इसे प्रमाणित करते हैं.

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like