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नई दिल्ली: राष्ट्रपति चुनाव पर एनडीए का संकट पीए संगमा के मैदान में आने से और गहरा हो गया है। भाजपा ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष संगमा का राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन करना लगभग तय कर लिया है। मगर एनडीए के तीन अहम घटकों जनतादल यूनाइटेड, शिवसेना और अकाली दल संगमा का समर्थन करने के भाजपा के रुख से पूरी तरह असहमत हैं। इससे पहले, एनडीए का कुछ धड़ा प्रणव मुखर्जी के समर्थन पर घोषणा तक कर चुका है।
शिवसेना ने पहले ही प्रणब के समर्थन का ऐलान भी कर दिया है। नीतीश कुमार के इशारे पर चल रहे जदयू ने भी भाजपा को दो टूक कह दिया है कि वह संगमा का समर्थन करने के फैसले पर उसका साथ नहीं देगी। इस तरह राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी पर एनडीए में जारी संकट और गहरा हो गया है। इस संकट को बिखराव के रुप में सतह पर आने से रोकने के लिए ही बुधवार को होनेवाली एनडीए की बैठक टाल दी गई।
बृहस्पतिवार को भाजपा की अहम बैठक
एनडीए में जारी इस संकट के बीच संगमा की उम्मीदवारी पर निर्णायक फैसला करने के लिए बृहस्पतिवार को भाजपा की अहम बैठक बुलाई गई है। भाजपा सूत्रों से मिले संकेतों से साफ है कि लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज के प्रणब के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के रुख पर पार्टी अब लगभग राजी हो गई है। बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वाम मोर्चे की बैठक पर निगाह रख रही भाजपा के शिखर नेताओं की बैठक में संगमा के समर्थन का आधिकारिक फैसला लिया जा सकता है। साफ है कि एनडीए के उसके साथी नहीं माने तब भी पार्टी जयललिता और नवीन पटनायक के साझा उम्मीदवार संगमा का समर्थन करने को आतुर है। वैसे भाजपा ने सहयोगियों को समझाने में अब तक कोई कसर नहीं छोड़ी है।
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