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जारी रहा एमओयू के रदद् होने और लटकने का सिलसिला : सीएजी रिपोर्ट - चार

NEWS WING

RANCHI, 12 AUGUST : झारखण्ड बनने के बाद से अब तक करीब 80 एमओयू विभिन्न कंपनियों ने झारखंड सरकार के साथ किये. उन एमओयू का जमीन पर उतरने का रिकॉर्ड बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में विस्तार से इसका जिक्र किया है. रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि राज्य में औद्योगिक विकास की गति बेहद धीमी है. निवेश करार धरातल पर बहुत कम उतर पाए. सीएजी की रिपोर्ट में एमयूओ के रद्द होने, विभिन्न कारणों से अटक जाने का जिक्र किया गया है. जाहिर है ऐसे सरकारी रवैये से कोई भी राज्य विकास नहीं कर सकता. 

सीएजी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें 
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9  ( सुनिये/देखिये वित्तीय गड़बड़ी के बारे में क्या कहा सीएजी नें )

एमओयू के सन्दर्भ में सीएजी का खुलासा

- झारखंड गठन के बाद विभिन्न कंपनियों के साथ सरकार ने कुल 79 एमओयू करार किए. जिससे राज्य में कुल 3.51 लाख करोड़ रुपये निवेष की संभावना बनी. इनमें से अधिकतर या तो रद्द हो गए या अब भी किसी चरण में अटके हुए हैं. 

- सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 79 एमओयू में से 38 यानी 0.63 लाख करोड़ रुपये के करार कंपनियों द्वारा रद्द किए जा चुके हैं.

- 2.26 लाख करोड़ रुपये के कुल 23 एमओयू अब तक जमीन पर नहीं उतरे. ये उद्योग स्थापना के विभिन्न चरणों में अटके हुए हैं.

- शेष 18 एमओयू जिसके तहत 0.62 लाख करोड़ निवेश होना था, उनमें से अब तक केवल 0.33 लाख करोड़ ही असल में निवेश हुआ है. 

एमओयू की स्थिति-राज्य गठन के बाद से अब तक

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- झारखंड बनने के बाद से अब तक ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट्स में कुल 3.51 लाख करोड़ निवेश संभावना के विरुद्ध केवल 0.13 लाख करोड़ निवेश ही हो पाया.

- अब तक कुल निवेश करार का केवल 3.8 प्रतिशत ही वास्तव में जमीन पर देखने को मिला.

- सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतर वायदे और घोषणाएं केवल कागजी प्रतीत होते हैं. वास्तव में सरकार निवेश के लिए उचित माहौल तैयार करने में पूरी तरह विफल रही.

- 2011 से 2016 के दौरान केवल 22,011 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए. इनमें से अधिकांश की स्थिति स्पष्ट नहीं है. इससे नई उद्योग नीति-2012 की असलियत सामने आती है.

एमओयू और निवेश की वास्तविक स्थिति

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