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सिंगल विन्डो सिस्टम फेल, कैसे होगा औद्योगिक विकास : सीएजी रिपोर्ट- सात

NEWS WING

RANCHI, 12 AUGUST : नए वैश्विक दौर में सिंगल विन्डो सिस्टम एक अनिवार्य प्रणाली है. इसके जरिये देश-विदेश में बैठे निवेशक भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और विभिन्न चरणों में आवेदन की ट्रैकिंग भी कर सकते हैं. सिंगल विन्डो सिस्टम का मकसद सभी विभागों को मिलाकर एक एकीकृत प्रणाली में सेवा देना है. ताकि आवेदकों को कई विभागों के चक्कर न लगाने पड़े. सिंगल विन्डो का ढिंढोरा झारखंड सरकार बीते 10 सालों से पीट रही है. मगर वास्तव में अब तक सुचारू ढंग से इसका क्रियान्वयन नहीं किया जा सका है. सीएजी की रिपोर्ट से सिंगल विन्डो सिस्टम की सच्चाई पर से भी पर्दा उठाया गया है.

सिंगल विन्डो सिस्टम के सन्दर्भ में सीएजी का खुलासा

- उद्योगों को बढ़ावा और निवेशकों को बेहतर माहौल देने के मकसद से झारखंड सिंगल विंडो क्लियरेन्स एक्ट-2015 राज्य में लागू किया गया। इसके तहत तीन उच्च स्तरीय कमेटी गठन का प्रावधान किया गया था. सीएजी की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ कि सरकार जून 2016 तक न तो गवर्निंग बॉडी, न हाई पावर कमेटी और न ही सिंगल विन्डो क्लियरेन्स कमेटी का गठन कर पाई. 

- सिंगल विन्डो सिस्टम का व्यापक प्रचार नहीं किया गया. इस कारण बहुत कम अावेदन पोर्टल पर अाये.

- सिंगल विन्डो सिस्टम के क्रियान्वयन की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई. निवेशकों को यह तक पता नहीं कि उनका आवेदन किस स्तर पर और किस विभाग में पेंडिंग पड़ा है. यहां तक कि रिजेक्शन की भी कोई जानकारी आवेदकों को नहीं दी जाती.

सीएजी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें 
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9  ( सुनिये/देखिये वित्तीय गड़बड़ी के बारे में क्या कहा सीएजी नें )

- फॉरेस्ट क्लियरेन्स के लिए कोई एकीकृत पद्धति विकसित नहीं की गई. आवेदकों को पता नहीं होता कि उनका आवेदन किस स्तर पर लंबित है.

- सिंगल विन्डो सिस्टम के सुचारु रूप से काम न करने के कारण कुल 23 प्रोजेक्ट चार से 13 साल की अवधि से लंबित हैं. 

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