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बिना इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे लगेंगे उद्योग, दावों और हकीकत में बड़ा फर्क : सीएजी रिपोर्ट- आठ

NEWS WING

RANCHI, 12 AUGUST :
 बिना आधारभूत संरचनाओं के औद्योगिक विकास संभव नहीं है. झारखण्ड सरकार शुरू से ही देशी-विदेशी कंपनियों के साथ कल-कारखाने लगाने के लिए एमओयू साइन करती रही है. सरकार केवल एमओयू करके खुश हो जाती है और जनता के बीच वाहवाही बटोर लेती है. लेकिन कितने एमओयू धरातल पर उतरे, इसका आंकड़ा देख कर राज्य में औद्योगिक विकास की असलियत का पता चलता है. सीएजी की ताजा रिपोर्ट में राज्य में औद्योगिक विकास के लिए जरूरी आधारभूत संरचनाओं की दयनीय स्थिति का खुलासा किया गया है. यह भी बताया गया है कि कैसे आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर की गई मौजूदगी में झारखण्ड का औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है. 

रोड नेटवर्क - बरही-बहरागोड़ा रोड जिसे झारखंड की लाइफलाइन कहते हैं, की फोर लेनिंग का काम चार सालों से अधूरा है.

सीएजी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें 
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9  ( सुनिये/देखिये वित्तीय गड़बड़ी के बारे में क्या कहा सीएजी नें )

एयर कारगो - इसका निर्माण रांची एयरपोर्ट पर किया जाना था. बोर्ड ऑफ कंन्ट्रोलर ऑफ एरोनॉटिक स्टैंडर्ड ने सुरक्षा मानकों को लेकर निर्माण पर आपत्ति जताई और निर्माण कार्य शुरु नहीं हो सका. जबकि सीएजी के ऑडिट में सरकार ने कहा कि 2016 तक कारगो का निर्माण पूरा हो जाएगा. यानी सरकार द्वारा गलत जानकारी दी गयी.

ट्रेड सेन्टर स्थापना की दिशा में नहीं हुआ काम- देवघर में व्यापार केन्द्र बनाया जाना था. राशि उपलब्ध करा देने के दो साल बाद भूमि का अधिग्रहण तक न हो सका. 

औद्योगिक क्षेत्र विकास के लिए आवंटित राशि खाते में – दुमका, जामताड़ा और जसीडीह में औद्योगिक क्षेत्र विकास के लिए तीन वर्ष पूर्व राशि उपलब्ध कराई गई. सीएजी ने ऑडिट में पाया कि राशि ज्यों की त्यों खाते में पड़ी हुई है. और संरचनात्मक विकास को लेकर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं.

नहीं बन सका वाटर ट्रीटमेन्ट प्लांट - औद्योगिक कचरों के निस्तारण और पानी के पुनः शुद्धिकरण के लिए सरकार ने अपनी नीति में बात कही मगर हकीकत में ऐसा कहीं देखने को नहीं मिला.

हर तरफ भय का माहौल - 24 में से 23 जिले अति उग्रवाद प्रभावित हैं. इन जिलों में कुल नौ संगठन सक्रिय हैं. इनके खौफ, लेवी, हिंसा और कानून-व्यवस्था की दयनीय स्थिति से निवेश प्रभावित हुआ है. सरकार निवेशकों को सुरक्षित माहौल देने में विफल साबित हुई.

कहीं बेच दी इंडस्ट्रीयल एरिया की जमीन तो कहीं पर कब्जा - सीएजी ने पाया कि इरबा इंडस्ट्रीयल एरिया की 113.06 एकड़ में से साढ़े चार एकड़ जमीन दलालों ने बेच डाली। बरही इंडस्ट्रीयल एरिया की 101.5 एकड जमीन पर कोबरा बटालियन का कब्जा है. 

सारा ध्यान आयरन-स्टील सेक्टर पर, अन्य उद्योग गर्त में

- झारखंड उद्योग नीति-2012 में ऑटोमोबाइल, वनोत्पाद व खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रोनिक्स, सूचना एवं संचार तकनीक, ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी संस्थान एवं निजी विश्वविद्यालय आदि क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई थी. सीएजी ने अपने ऑडिट में पाया कि सरकार द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया.

- उद्योगों की स्थापना में क्षेत्रीय संतुलन बनाने के मकसद से सभी जिलों उद्योगों को बढ़ावा देना था. 41 एमओयू जो अब तक रद्द नहीं हुए हैं वे केवल आठ जिलों में सीमित हैं. इनमें से 40 कोयलांचल और कोल्हान से संबंधित हैं. शेष झारखंड में औद्योगिक विकास के प्रति सरकार उदासीन है.

लैंड बैंक की हवा-हवाई घोषणा

लैंड बैंक की नहीं हुई स्थापना : उद्योग नीति-2012 में सभी जिलों में लैंड बैंक गठन का प्रावधान किया गया. 200 से 500 एकड़ भूमि को हर जिले में इंडस्ट्रियल इस्टेट के रूप में विकसित किया जाना था. मगर न तो लैण्ड बैंक का गठन हुआ और न ही इंडस्ट्रियल इस्टेट विकसित किए गए. 

 

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