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Traders Deed : Shoppers Need
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कराची, 26 फरवरी | मैं पाकिस्तान की व्यावसायिक राजधानी कराची पहुंचा। पूर्वाह्न् के लगभग 11 बज रहे थे। मुझे भूख लगी थी और भोजन की तलाश करते हुए मैं पोर्ट ग्रैंड फूड स्ट्रीट में दाखिल हुआ। यह समुद्र किनारे नवविकसित भोजन एवं मनोरंजन का एक बेहतरीन ठिकाना है।
पोर्ट ग्रैंड फूड स्ट्रीट का परिसर 13 एकड़ से अधिक दायरे में फैला है। इस परिसर में तकरीबन 50 बिक्री केंद्र हैं जहां लोकप्रिय पाकिस्तानी व्यंजन परोसे जाते हैं। यहां मांस के भुने हुए टुकड़े, कबाब, तंदूरी चिकेन, नान और बासमती चावल से तैयार स्वादिष्ट पकवान की मीठी खूशबू हर वक्त महसूस की जा सकती है। इनके अलावा यहां और भी बहुत कुछ हैं।
मैं शाकाहारी भोजन की तलाश में था, लेकिन दुर्भाग्यवश लगभग एक अरब रुपये की लागत से विकसित इस परिसर में वह कहीं नहीं मिला। कम से कम व्यंजन-सूची में भी किसी शाकाहारी व्यंजन का नाम नहीं मिला। लेकिन जो मिली, वह थी पाकिस्तान के लोगों की गर्मजोशी!
जब एक रेस्तरां के मालिक को पता चला कि मैं भारत से आया हूं तो उसने कहा, "मुझे सिर्फ 15 मिनट दीजिए। मैं थोड़ा शाकाहारी खाना लाता हूं।" उस रेस्तरां की व्यंजन-सूची में हालांकि किसी शाकाहारी व्यंजन का जिक्र नहीं था। खर, उसने तय समय के भीतर एक स्वादिष्ट खाना परोसा।
जब आप लाहौर, कराची या इस्लामाबाद में घूमेंगे तो महसूस करेंगे कि ये भारतीय शहरों से अलग नहीं हैं। कराची तो बिल्कुल मुम्बई की तरह लगता है। लाहौर को तो आप पुरानी दिल्ली ही मान लीजिए। यहां का जो मशहूर अनारकली बाजार है, वह दिल्ली के चांदनी चौक का अहसास दिलाता है।..और लोग भी ऐसे कि उन्हें देखकर आपके लिए यह कहना मुश्किल होगा कि ये भारत के हैं या पाकिस्तान के।
लाहौर के फोर्ट रोड के एक रेस्तरां के मालिक इसरार हुसैन ने कहा, "हम अपनी जड़ों को फिर से तलाशना चाहते हैं। हमारे पूर्वज दिल्ली से यहां आए थे। हम वहां जाना चाहते हैं। लेकिन बहुत मुश्किल है। मैं हिंदुस्तान की सैर के लिए वीजा पाने के काबिल नहीं हूं।"
यहीं हीरो कारपोरेट सर्विसेज के सुनील कांत मुंजाल मिले। उन्होंने कहा, "सचमुच, मैं पाकिस्तानी खातिरदारी से बहुत प्रभावित हूं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार की बेहद जरूरत है।"
- ज्ञानेंद्र कुमार केशरी
भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता कम्पनी भारती एयरटेल समूह के प्रबंध निदेशक रंजन भारती मित्तल ने कहा, "दो पड़ोसी देशों के लोगों को एक-दूसरे के यहां जाने-आने की सुविधा मिलनी चाहिए। अगर सरकार इसकी अनुमति दे दे तो हमें अत्यंत प्रतियोगी दर पर रोमिंग सुविधा मुहैया कराने में बहुत खुशी होगी।"
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व ने वीजा की शर्तो को आसान बनाने के वादे कई बार किए। व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देने के लिए 1947 में एक संधि पर दोनों पक्ष के हस्ताक्षर भी हुए, लेकिन बात बन नहीं पा रही है।
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