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राजनीति के चक्‍कर में विश्‍वप्रसिद्ध 'गुलाबी गैंग' का बंटाधार

बांदा, 21 मार्च | 'सिर मुंडाते ही ओले पड़े' वाली कहावत अब गुलाबी गैंग पर चरितार्थ हो गई है। देश ही नहीं, इटली और पेरिस में भी महिलाओं के मुद्दों पर जमीन तैयार करने वाला बुंदेलखण्ड का सशक्त महिला संगठन 'गुलाबी गैंग' कमांडर सम्पत पाल के विधानसभा चुनाव हारते ही बिखर गया है।

चुनाव हराने के कथित आरोप से आहत गैंग के राष्ट्रीय संयोजक जे.पी. शिवहरे ने वाइस कमांडर सुमन चौहान की अगुआई में 'डेमोक्रेटिक गुलाबी गैंग' नाम से नया संगठन बनाकर सम्पत के सामने भारी मुसीबत खड़ी कर दी है।

बुंदेलखण्ड का सशक्त महिला संगठन 'गुलाबी गैंग' अपनी आक्रामक कार्यशैली से देश ही नहीं, बल्कि इटली और पेरिस में भी जमीन तैयार कर चुका है। सम्पत पाल को शोहरत इतनी मिली कि लंदन के अखबार 'द गार्जियन' ने पिछले साल विश्व की सौ सशक्त प्रेरक महिलाओं में कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ इस गैंग की कमांडर को भी चयनित किया था। तभी तो अपनी बराबरी देख सोनिया ने तमाम स्थानीय कांग्रेसी नेताओं विरोध को नजरअंदाज कर सम्पत पाल को चित्रकूट जनपद की दस्यु प्रभावित विधानसभा सीट मऊ-मानिकपुर से टिकट थमा दिया। लेकिन वह विधानसभा की ड्योढ़ी तक तो नहीं पहुंच पाईं, अलबत्ता गैंग को बिखराव के संकट का सामना जरूर करना पड़ा।

इस चुनाव में सम्पत पाल महज 23,003 मत पाकर चौथे पायदान पर खिसक कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के चंद्रभान सिंह पटेल से चुनाव हार गईं। चुनाव में हार का ठीकरा सम्पत अपने संयोजक जे.पी. शिवहरे पर फोड़ रही हैं। सम्पत पाल का कहना है, "बाबू जी (जे.पी.) मुझे नीचा दिखाने के लिए विपक्षी उम्मीदवारों से मिलकर चुनाव में समर्थकों और मतदाताओं को गुमराह करते रहे हैं, इसलिए उन्हें गैंग से हटा दिया गया है।"

सम्पत ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव हराने में दिल्ली के थॉमस नाम के एक पत्रकार की भी अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा, "सुमन चौहान भी महोबा सीट से कांग्रेस का टिकट मांग रही थीं। मगर, सोनिया ने नहीं दिया, जिससे वह नाराज हैं।"

उधर, जे.पी. शिवहरे ने कहा, "चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस ने लगभग 35 लाख रुपये दिए थे, मतदान के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस कार्यालय लखनऊ से सम्पत के बेटे कामता पाल के हाथ नकद भेजे गए 15 लाख रुपये बचा लिए गए। यह रकम हजम करने की नीयत से मुझ पर चुनाव हराने के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। रकम की ही बचत करने से संसाधनों में कमी आई और सभी मतदाताओं तक नहीं पहुंचा जा सका, जिस वजह से वह चुनाव हारी हैं।"

उन्होंने बताया कि सम्पत की वाइस कमांडर रहीं सुमन सिंह चौहान की अगुआई में 'डेमोकेट्रिक गुलाबी गैंग' नामक नया महिला संगठन बना लिया गया है, जो महिला मुद्दों पर धरातल पर काम करेगा।

सुमन सिंह चौहान ने आरोप लगाया, "सम्पत पाल ने धन के लालच में हमेशा मुद्दों से समझौता किया है और कभी भी लड़ाई को अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया।"

विधानसभा चुनाव में सम्पत के साथ रहीं कानपुर परिक्षेत्र की कमांडर आशा निगम कहती हैं कि चुनाव हारने के कई कारण हैं। एक तो वहां के स्थानीय कांग्रेसी कार्यकर्ता भितरघात करते रहे, दूसरा ऐन वक्त पर मतों का बसपा व सपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हो गया था।

उन्होंने कहा कि सम्पत व जेपी के मध्य उपजे विवाद को सुलझा लिया जाएगा। गैंग की ज्यादातर महिला सदस्य जे.पी. की समर्थक हैं। हालांकि सम्पत पाल शुरू से ही विवादित रही हैं, उन्हें अगर महिला मुद्दों पर पुलिस को बंधक बनाने की आक्रामकता से शोहरत मिली है तो उन पर नीलम जैसी दलित किशोरी को अपने घर में बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुराचार कराने के आरोप भी लगे हैं।

इन सबके बावजूद उनके कदम पीछे नहीं हटे, पर यह बिखराव जहां सम्पत पाल को भारी मुसीबत में डाल सकता है, वहीं गुलाबी गैंग के अस्तित्व के लिए खतरा भी बन सकता है।
- रामलाल जयन

This Article Posted on: March 21st, 2012 by admin in : Sections.

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