ग्लूकोमा के मरीजों की बढ़ रही है संख्या, रिम्स में हर दिन आते हैं हजारों मरीज  

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 04/21/2018 - 17:19

Ranchi : ग्लूकोमा यानि कि काल मोतिया एक खतरनाक बीमारी है. इस बीमारी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यदि पारिवारिक इतिहास में यह बीमारी है तो खतरा ज्यादा रहता है. लेकिन 40 साल के बाद इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है. वैसे तो इस बीमारी के कई लक्षण हैं. लेकिन यदि पूरे दिन काम करने के बाद शाम के वक्त आंखों व सिर में दर्द लगातार रहे तो यह  ग्लूकोमा के लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा बल्‍ब के चारों ओर इंद्रधनुष दिखना ग्‍लूकोमा की निशानी हो सकती है. 

दरअसल  हमारी आंख एक गुब्बारे की तरह है और इसके अंदर एक तरल पदार्थ भरा होता है. आंखों का यह तरल पदार्थ लगातार आंखों के अंदर बनता रहता है और बाहर निकलता रहता है. जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन यदि इसी तरल पदार्थ के बनने में कोई समस्या आने सलगती है तो आंखों पर दबाव बढ़ जाता है. जिससे ग्लूकोमा का खतरा हो सकता है. 

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ऑप्टिक नर्व से दिमाग को मिलता है संकेत 

 आंखों में कुछ ऑप्टिक नर्व भी होते हैं, जिनकी मदद से किसी भी वस्तु के बारे में संकेत दिमाग तक जाता है. आंखों पर बढ़ा दबाव इन ऑप्टिक नर्व को डैमेज करने लगता है और आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. अगर इसके शुरूआती लक्षणों का पता न चले तो आदमी अंधा हो सकता है.

 ओपेन एंगल ग्लूककोमा

 जब कभी आंखों के बढ़े प्रेशर की वजह से आंख की ऑप्टिक नर्व खराब हो जाती है, जिससे नजर भी खराब होती है तो उसे ओपन ऐंगल ग्लूकोमा कहा जाता है. इसमें धीरे-धीरे नजर कमजोर होती जाती है. इसमें तरल पदार्थ को सूखाने वाली कनैल ब्लॉक हो जाती है और आंखों का प्रेशर बढ़ जाता है.

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क्लोज एंगल ग्लूकोमा

 इस प्रकार के ग्लूकोमा में एक्वस ह्यूमर (एक प्रकार का तरल पदार्थ जो आंखों को पोषण देता है) का प्रवाह एकदम से रुक जाता है. तेज सिरदर्ददिखाई देना बंद होना, आंखें लाल होनाउल्टी और चक्कर आनाधुंधलापन आने की शिकायत होती है. यदि ऐसे में लापरवाही बरती जाये तो एंगल्स पूरी तरह से बंद हो जाते हैं.

 ग्लूकोमा के लक्षण

 ओपेन एंगल ग्लूकोमा का कोई लक्षण नहीं होता हैइसमें दर्द नहीं होता और न ही देखने में कोई खास परेशानी महसूस होती है.

ग्लूकोमा के कुछ लक्षण ये हो सकते हैं:

 ·       चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव.

·       पूरे दिन के काम के बाद शाम को आंख में या सिर में दर्द होना.

·       बल्ब के चारों ओर इंद्रधनुषी रंग दिखाई देना.

·       अंधेरे कमरे में आने पर चीजों पर फोकस करने में परेशानी होना.

·       साइड विजन को नुकसान होना और बाकी विजन नॉर्मल बनी रहती है.

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किसे हो सकता है ग्लूकोमा 

 अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा है तो बच्चे को ग्लूकोमा होने की ज्यादा संभावना होती है. यह एक आनुवांशिक बीमारी है40 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा होने की आशंका ज्यादा होती है. इसलिये 40 साल की उम्र के बाद आंखों का रेग्युलर चेकअप कराते रहना चाहिये.इसे अलावा अस्थमा या आर्थराइटिस के रोगी यदि लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं तो उनमें भी ग्लूकोमा होने की आशंका बढ़ जाती है. 

साथ ही जिन लोगों को मायोपियाडायबिटीज या ब्लडप्रेशर की शिकायत रहती है तो उनमें दूसरे लोगों के मुकाबले ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान ज्यादा हो सकता है.

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 हर साल 4500-5000 की संख्या में ग्लूकोमा के मरीज आते हैं रिम्स

 रिम्स नेत्र विभाग के सह प्रध्यापक डॉ राहुल प्रसाद ने इस बारे में बताया कि रिम्स में हर दिन 10 से12 ग्लूकोमा के पेशेंट इलाज के लिए आते हैं. जिसमें नये और फॉलोअप मरीज भी होते हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा का इलाज अब बहुत ही सरल हो चुका है. नई दवाएं अब उपलब्ध हैं, जिसे देने पर आंख का प्रेशर कम हो जाता है. इसके अलावा लेजर सर्जरी और कन्वेंशनल सर्जरी है, जो आंख के प्रेशर को घटाने में मदद करता है. डॉ राहुल ने कहा कि हर साल   4500-5000 की संख्या में ग्लूकोमा के मरीज झारखंड और आसपास के राज्य से अपना इलाज करवाने रिम्स आते हैं.

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