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पलामू: आस्था पर महंगाई की मार, सूप-दउरा के भाव छू रहे आसमान

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Palamu: लोक आस्था का महापर्व छठ गुरुवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया. चार दिवसीय महापर्व में महंगाई की मार दिख रही है. आस्था पर महंगाई इस कदर हावी हो गयी है कि व्रतधारी और उनके परिवार के सदस्य कमोवेश ढंग से किसी तरह हिम्मत जुटाकर पर्व की तैयार में लगे हुए हैं.

बाजारों में बुधवार और गुरूवार को कद्दू के दाम आसमान छूते नजर आये. 60 रुपये किलो से कम में कद्दू नहीं बिक रहे थे. कुछ जगहों पर तो कद्दू के भाव 80 रूपये किलो तक बिके.

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सूप और दउरा की कीमत में लगी आग

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सूप और दउरा की कीमत में तो आग लगी है. 400 रूपये जोड़ा सूप-दउरा बिक रहे हैं. छठ पर्व को देखते हुए सूप-दउरा की कीमत आसमान छू रही है. पर्व से चार-पांच दिन पहले तक 50-60 रूपये पीस बिकने वाला सूप और दउरा की कीमत 200 और 250 रूपये हो गए.

बांस का बना पंखा, मिट्टी की ढकनी के भी भाव काफी बढ़े हुए हैं. पंखा जहां 50 रूपये पीस के हिसाब से बिक रहा है, वहीं ढकनी 250 से 300 रूपये जोड़ा बिक रहा है.

फल-फलहारी के दाम भी आसमान पर हैं. सेब 80 से 120 रूपये किलो, केला 50 से 60 रूपये दर्जन के हिसाब से उपलब्ध है. फलों की तरह हरी सब्जी के दाम में भी रफ्तार देखने को मिल रहा है. 20 से 30 रूपये पीस मिलने वाले नारियल का भाव भी काफी बढ़ गया है.

छठ व्रतियों ने कद्दू-भात का भोग लगाया

लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है. छठ व्रतियों ने गुरुवार को व्रत के पहले यानी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को कद्दू-भात का भोग लगाया. इसके बाद प्रसाद स्वरूप इसे स्वंय भी ग्रहण किया और दूसरों को भी दिया.

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गुरुवार से अगले चार दिनों तक सूर्य देव और छठ भईया की उपासना की जायेगी. मान्यता है कि छठ पूजा करने से छठी मईया प्रसन्न होकर सब मनोकामनाएं पूर्ण कर देती है. शनिवार यानी कार्तिक शुक्ल पंचमी को छठव्रती खरना का त्योहार करेंगे. व्रती इस दिन शाम के समय एक बार भोजन ग्रहण करेंगी.
इस दिन व्रती का पूरे दिन निर्जला व्रत है. शाम को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खायी जाती है. इसे प्रसाद रूप में वितरित भी किया जाता है.

अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया जायेगा अर्ध्य

छठ पर्व के तीसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल पष्ठी को पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं. इस दिन व्रती शाम के समय किसी नदी, तालाब में जाकर पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्ध्य देते हैं और रातभर जागरण किया जाता है.

इसके अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह भी पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. अर्ध्य देने के बाद व्रती सात बार परिक्रमा भी करते हैं. इसके साथ ही लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व का समापन हो जाएगा.

छठ व्रतियों की सुविधा के लिए प्रशासन सजग

इधर, छठव्रतियों की सुविधा के लिए प्रशासन सजग है. प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि छठ घाटों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं और उन्हें सुविधाजनक बनाने पर जोर दे रहे हैं. एसडीएम मेदिनीनगर सुरजीत सिंह, एसडीपीओ संदीप गुप्ता, नगर निगम के सहायक आयुक्त गनोज तिवारी ने शहर थाना प्रभारी आनंद मिश्रा, सदर थाना प्रभारी विष्णु सिंह, सर्किल इंस्पेक्टर मनोज तिवारी, यातायात प्रभारी आर.एन सरस, स्वच्छता निरीक्षक कृष्ण मुरारी शर्मा, टीओपी प्रभारी सुधीर कुमार, केन्द्रीय दुर्गा पूजा महासमिति और पलामू चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष दुर्गा जौहरी एवं पार्षदों के साथ कोयल नदी और अमानत नदी के छठ घाटों का निरीक्षण किया.

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