केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना हिंदुत्व को बढ़ावा तो नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 01/10/2018 - 16:06

New Delhi : केन्द्रीय विद्यालयों के सभी छात्रों के लिये कथित रूप से हिन्दू धर्म पर आधारित प्रार्थना अनिवार्य करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को केन्द्र सरकार से जवाब मांगा. न्यामयूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने मध्य प्रदेश निवासी विनायक शाह की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया. याचिका में कहा गया है कि देश भर में सभी केन्द्रीय विद्यालयों में प्रात:कालीन सभा मे प्रार्थना लागू की जा रही है.

कोर्ट ने क्या कहा है

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि केंद्रीय विद्यालयों में प्रार्थना क्यों होनी चाहिए? क्योंकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल किसी भी धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह एक गंभीर संवैधानिक मामला है.

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हिंदी में होने वाली प्रार्थना हिंदु धर्म को दे रही है बढ़ावा

उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता विनायक शाह ने यह आरोप लगाया है कि केंद्रीय विद्यालयों में जो प्रार्थना होती है वो हिंदी में होती हैंऔर ये हिंदू धर्म को बढ़ावा दे रही है. साथ ही इन प्रार्थनाओं में संस्कृत के शब्द भी होते है. सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्‍कूलों में ऐसा नहीं होना चाहिए. याचिका में कहा गया है कि ये संविधान के अनुच्छेद 25 और 28 के खिलाफ है और इसे इजाजत नहीं दी जा सकती है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की है कि सरकारी मदद से चलने वाले विद्यालयों में एक खास धर्म को बढ़ावा देने वाली प्रार्थना पर रोक लगनी चाहिए.

क्या है याचिका में

याचिका के अनुसार प्रार्थना की प्रथा छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में बाधा पैदा कर रही है क्योंकि ईश्वर और धार्मिक आस्था को बहुत ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है और छात्रों के सोचने समझने की प्रक्रिया में इसे उनके मन में बैठाया जा रहा है. याचिका में कहा गया है कि इसके परिणाम स्वरूप रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली बाधाओं के प्रति व्यावहारिक नतीजे विकसित करने की बजाये वे राहत के लिये ईश्वर की ओर मुखातिब होते हैं. याचिका के अनुसार चूंकि यह प्रार्थना लागू की जा रही है, इसलिए अल्पसंख्यक समुदायों और नास्तिक वर्ग के बच्चों और उनके अभिभावक इसे लागू करने को सांविधानिक दृष्टि से अनुचित पाते हैं. शाह ने यह भी तर्क दिया है कि सभी के लिये ‘एक प्रार्थना’ संविधान के अनुच्छेद 28 के अंतर्गत ‘‘धार्मिक निर्देश’’ है और इसलिए इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिये.

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