रजरप्पा=महतोपुर: आधा करोड़ का खेल हर रोज

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 03/25/2018 - 05:28

TP Singh
Rajrappa:
CCL का एक महत्वपूर्ण प्रक्षेत्र है रजरप्पा. यहां से हर दिन लगभग 500 गाड़ी कोयला निकलता है. लेकिन अगर आप महतो नहीं है,  तो DO नहीं लगा सकते हैं, वरना आपका DO लेप्स हो जाएगा. अन्यथा DO बचाने के लिये किसी महतो का मुलाज़िम बनना पड़ेगा. यह कड़ा कानून यहां लागू है. यहां लेबर लोडिंग के नाम पर 8000 रु प्रति गाड़ी लिया जाता है और हर दिन 40 लाख की उगाही होती है, जो माफिया, प्रशासन-पुलिस, नेता और सरकार के बड़े नुमाइंदों के बीच बांटता है. इसलिये कहीं से कोई आवाज सुनाई नहीं देती है. सरकार यहां फेल हो जाती है. 

तत्कालीन DIG ने मैनेज किया सारा खेल
यहां तत्कालीन DIG ने अपने DSP के नेतृत्व में पुलिस भेजा था. पुलिस को कोयला माफिया ने पीट डाला. केस भी हुआ  लेकिन बाद में तत्कालीन डीआईजी ही मैनेज हो गए. DSP वरुण प्रसाद मुंह ताकते रह गए. DIG  मैनेज होकर माल खा गए. असल में टीम को मैनेज के लिये ही भेजा गया था. इसके अलावे चोरी का कोयला अलग से निकलता है, उसकी कमाई अलग से बंटती है. यानी हर रोज महतोपुर में आधा करोड़ का अवैध बंदरबाट होता है. और सबसे बड़े माफिया तो ओहदे पर बैठे हैं. लिहाजा पुलिस प्रशासन सजदा करने को विवश है. 

मौसा के आगे सब नतमस्तक 
रजरप्पा प्रोजेक्ट के अंदर पांच पॉइंट चलते है. हज़ारीबाग-रामगढ़ का यह पहला कोलियरी है जिसमें रेट महतो मित्र सेट करते हैं CCL नहीं. पहले यहां RNC चलता था रिझु नाथ चौधरी अब CPC चलता है चन्द्र प्रकाश चौधरी.  और CPC के सामने झारखंड की सरकार और पुलिस विवश है. घुटना टेके है क्योंकि वो सरकार के मौसा हैं . पहले लाल टोपी देखकर ही छुप जानेवाले शख्स की निगहबानी आज आईपीएस कर रहे है. रजरप्पा के खदानों में ROM , slack, slury  के नाम और पेपर पर स्टीम कोयला निकलता है. कोई चूं नहीं कर सकता है. और लेबर के लोडिंग के नाम पर लिए गए 8000 रु जबकि काम JCB करता है 5 मिनट में, मज़दूरों के पैसे हाकिम और उनके चट्टे-बट्टे खादिम से लेकर स्टेट हेड तक को जाता है .

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कोयला लोडिंग की फाइल फोटो

खस्सी, दारू, साड़ी-कंबल बांटकर ही चल जाता है काम
जातीय वर्चस्व तो हर कोलियरी लोडिंग पॉइंट पर है. लेकिन यहां का साइडिंग आरक्षित है केवल महतो के लिए. मज़दूरों को रिझाने पटाने फुसलाने के लिये बीच-बीच में खस्सी, मुर्गा, दारू, साड़ी-कम्बल धुनकर बांटा जाता है. क्यों नहीं बांटा जाएगा एक दिन की आमदनी में सभी लोग खुश- बमबम. यहां एक साथ कोयले में सात मजदूर दबकर मर गये. लेकिन ना उनकी लाश निकाली गई, ना ही केस दर्ज हुआ, ना ही उनके परिवार को रोने दिया गया. उनकी आंसुओं को गांधी जी के मोनोग्राम में कैद कर लिया गया. ऐसा अक्सर होता है. क्योंकि मां छिन्नमस्ता का आशीर्वाद है इनपर, भैरवी और झारखंड की गंगा ( दामोदर) का संगम है इनके पास. जिसके दामन में कोयला है और कोयला काला होते हुए भी चमक और चमन का मालिक होता है.

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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