न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सरयू राय ने मुख्यमंत्री से कहा- पशुपालन घोटाला जैसा ही है कंबल घोटाला, सीबीआई जैसी एजेंसी से करायी जाए जांच

461

Ranchi : कंबल घोटाला को लेकर सूबे के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सीएम को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से लेने की सलाह मुख्यमंत्री को दी है. कहा है कि कंबल घोटाला ठीक उसी तरह का है जैसा पशुपालन घोटाला था. इसलिए पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से करायी जानी चाहिए.

इसे भी पढ़ें –  विकास आयुक्त ने सीएम से की थी एसीबी जांच की अनुशंसा, जांच वह विभाग करेगा जिसने अमित खरे की चिट्ठी के बाद चुप्पी साध ली थी

पशुपालन घोटाला जैसा ही है कंबल घोटालाः सरयू राय

समाचार पत्रों में छपी खबरों के विस्तार में जाने पर प्रतीत हो रहा है कि इस घोटाला में भी आरोपियों ने वही तरीका अपनाया है, जो तरीका बिहार के कुख्यात पशुपालन घोटाला के अभियुक्तों ने अपनाया था. आपको स्मरण होगा कि पशुपालन घोटाला मैंने उजागर किया था और घोटाले की सीबीआई जांच के लिए पटना उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त किया था. इस मामले में आज भी मुकदमे चल रहे हैं. इसलिए झारक्राफ्ट के इस घोटाला को गंभीरता से लेना चाहिए. लोगों में यह संदेश नहीं जाय कि जिन लोगों ने पशुपालन घोटाला के अभियुक्तों को सजा दिलवाई उन्हीं की सरकार में ऐसा घोटाला उजागर होने तथा सक्षम अधिकारी द्वारा इसकी निगरानी जांच कराने के निर्देश के एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. विकास आयुक्त के निर्देशों के आलोक में झारक्राफ्ट घोटाले की उच्चस्तरीय जांच अविलंब होनी चाहिए. जो व्यक्ति प्रथमदृष्टया इसमें संलिप्त प्रतीत हो रहे हैं, उनके विरुद्ध अविलंब कानून की सुसंगत धाराओं में आपराधिक कार्रवाई आरंभ कर देनी चाहिए. इसमें विलम्ब होने से लोगों में गलत संदेश जा रहा है.

इसे भी पढ़ें – NEWSWING EXCLUSIVE: झारखंड की बेदाग सरकार में हुआ 18 करोड़ का कंबल घोटाला, न सखी मंडल ने कंबल बनाये, न ही महिलाओं को रोजगार मिला

अभी तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं : सरयू राय

झारक्राफ्ट में भ्रष्टाचार एवं घोटाला की खबरें राज्य के प्रमुख अखबारों में विगत कई दिनों से विस्तार से छप रही है. ये खबरें नियंत्रक एवं महालेखाकार परीक्षक द्वारा अंकेक्षण के दौरान पाये गये घोटाला के प्रमाणों पर आधारित है. राज्य के विकास आयुक्त ने झारक्राफ्ट द्वारा कम्बलों के निर्माण एवं खरीद में हुई गड़बड़ी की निगरानी जांच कराने का आदेश करीब एक माह पूर्व सचिव उद्योग एवं खान विभाग सह प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय को दिया है. परन्तु इस पर कोई कार्रवाई होने की सूचना अबतक नहीं है.

Related Posts

#JharkhandElection: चौथे चरण की वोटिंग जारी, 15 विधानसभा सीटों पर सुबह 9 बजे तक 11.85 प्रतिशत मतदान

टुंडी में सबसे अधिक 14.91 और गिरिडीह में सबसे कम 6.60 प्रतिशत वोटिंग

Bharat Electronics 10 Dec 2019

इसे भी पढ़ें – NEWSWING IMPACT: कंबल घोटाला की खबर छपने के बाद हुई कार्रवाई, वापस लिए गए झारक्राफ्ट सीईओ के सारे पावर

सीईओ का त्यागपत्र ना करें स्वीकार, दर्ज होनी चाहिए एफआईआरः सरयू राय

विगत दो दिनों से घोटाला की आरोपी झारक्राफ्ट की सीईओ के त्यागपत्र देने और त्यागपत्र देने के बाद उद्योग निदेशक पर गंभीर आरोप लगाने की खबरें भी अखबारों में प्रमुखता से छप रही है. उद्योग निदेशक ने भी अपने बचाव में वक्तव्य दिया है. आरोप-प्रत्यारोप की ऐसी खबरों के सार्वजनिक होने पर भी सरकार का इस मामले पर कार्रवाई नहीं करने से तरह-तरह की चर्चाएं होनी शुरू हो गयी है. ऐसी परिस्थिति में झारक्राफ्ट के सीईओ का त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. इनका त्यागपत्र स्वीकार करने से संदेश जायेगा कि सरकार इनका बचाव कर रही है. मामले को रफा-दफा करना चाह रही है. इनके विरुद्ध अविलंब प्राथमिकी दायर कर कार्रवाई आरंभ होनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें – कंबल घोटालाः न्यूज विंग की खबर के 66 दिन व अनुशंसा के 22 दिन बाद सीएम ने दिये जांच का आदेश

आखिर झारक्राफ्ट की सीईओ ये बनीं कैसे : सरयू राय

इनकी नियुक्ति झारक्राफ्ट के सीईओ के पद पर किस परिस्थिति में, किस प्रक्रिया से और इनकी किस विशेषता को ध्यान में रखकर की गई. इसे भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए. झारक्राफ्ट में ये अनियमितताएं काफी दिनों से चल रही थी. नियंत्रक एवं महालेखाकार परीक्षक ने अंकेक्षण में इन्हें संपुष्ट किया. विकास आयुक्त ने इसपर संज्ञान लिया और कार्रवाई का निर्देश दिया. लेकिन आश्चर्य है कि उद्योग सचिव, जो मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव भी हैं, उनके ध्यान में ये अनियमितताएं इतने दिन में क्यों नहीं आई? क्या किसी ने जानबुझ कर इन जानकारियों को उद्योग सचिव से छिपाया या उद्योग विभाग के अधिकारी इसके प्रति लापरवाह रहे. इसका भी खुलासा होना चाहिए. विकास आयुक्त ने इस घोटाले की जांच निगरानी से कराने का निर्देश दिया है. लेकिन मुझे लगता है कि इसकी जांच सीबीआई. या किसी सक्षम केन्द्रीय एजेंसी से कराने की कार्रवाई राज्य सरकार को करनी चाहिए.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like