हाईकोर्ट में दायर याचिका में सप्लिमेंटरी पीटिशन दाखिल कर कहा- सीएम और चीफ जस्टिस का मंच साझा करना गलत

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 04/10/2018 - 11:01

- जस्टिस चेलामेश्वर ने 21 मार्च को लिखे अपने खुले पत्र में कहा था, न्यायपालिका और सरकार के बीच भाईचारा लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी.

- 27 मार्च को मुख्यमंत्री रघुवर दास और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल ने गुमला में किया मंच साझा.

 

Akshay Kumar Jha    
Ranchi:
 विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का मंच साझा करने को लेकर न्यायलय में पहले से सेपरेशन अॉफ पावर को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में सप्लीमेंटरी पीटिशन (पूरक शपथ पत्र) दायर की गयी है. जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास, झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और अधिकारियोंं का मंच साझा किया जाना गलत है. इससे पहले 28 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री रघुवर दास के हाथों झारखंड हाईकोर्ट के न्याय सदन में 40 सिविल जजों को नियुक्ति पत्र बांटने को लेकर हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किया गया था. बोकारो निवासी दीवान इंद्रनील सिन्हा की तरफ से हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने याचिका दायर की है. उसी पीआईएल में दीवान इंद्रनील सिन्हा ने 27 मार्च को गुमला में हुए एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, चीफ जस्टिस और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का मंच साझा करने और कार्यक्रम में  1.86 अरब की परिसंपत्तियों का वितरण करने का मामला सप्लीमेंटरी पीटिशन में उठाया है. 

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27 मार्च को गुमला में बांटी गयी थी 1.86 अरब की परिसंपत्ति

सप्लीमेंटरी पीटिशन में कहा गया है कि 27 मार्च को गुमला में विधिक सेवा सह सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लाभुकों के बीच 1.86 अरब की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया था. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास, चीफ जस्टिस डीएन पटेल के अलावा जज एचसी मिश्रा, जज रंजन मुखोपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार बर्णवाल, कल्याण सचिव हिमानी पाण्डेय, महानिबंधक अंबुज नाथ, दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त डीसी मिश्रा और रांची रेंज के डीआईजी अमोल वेणुकांत होमकर मौजूद थे.  गुमला से पहले जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री और चीफ जस्टिस ने मंच साझा किया था.

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21 मार्च को क्या कहा था जस्टिस चेलामेश्वर ने अपने खुले पत्र में

अभी कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने मीडिया के सामने आकर अपनी बातों को रखा था. उन्होंने कार्यपालिका का न्यायपालिका में हस्तक्षेप का विरोध किया था. जिससे देशभर में भूचाल आ गया था. किसी तरह उस मामले को शांत कराया गया. इस बीच 21 मार्च को  जस्टिस चेलामेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने आगाह किया था कि  ‘न्यायपालिका और सरकार के बीच किसी भी तरह का भाईचारा लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी है.’ शीर्ष न्यायालय के 22 अन्य न्यायाधीशों को भी भेजे गये पत्र में कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य जज दिनेश माहेश्वरी द्वारा केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय के इशारे पर जिला एवं सत्र जज कृष्ण भट के खिलाफ शुरू की गई जांच पर सवाल उठाए गए थे. खत में लिखा गया था कि ‘हम न्यायालय के न्यायाधीशों पर कार्यपालिका के बढ़ते अतिक्रमण के सामने अपनी निष्पक्षता और अपनी संस्थागत ईमानदारी खोने का आरोप लग रहा है.

न्यायपालिका और सरकार के बीच किसी भी तरह का भाईचारा लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी है.

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रांची में आयोजित झालसा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास और चीफ जस्टिस डीएन पटेल (फाइल फोटो)

सीएम ने गुमला में कहा था, कार्यपालिका और न्यायपालिका एक साथ मिलकर काम करना सबसे बड़ी विशिष्टता

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गुमला के कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य का सबसे बड़ा ध्येय है, समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना. यह सबसे बड़ी विशिष्टता है कि आज शासन-प्रशासन के साथ न्यायपालिका भी एक साथ मिलकर साझा प्रयास कर रहे हैं. झारखंड राज्य में रांची और जमशेदपुर के बाद गुमला में यह तीसरा मौका था, जहां न्यायपालिका और कार्यपालिका एक साथ शिविर लगाकर लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण कर रहा था.  मुख्यमंत्री ने आगे कहा था कि एक लाख से अधिक लाभुकों के बीच 1.86 अरब रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण एक बड़ी उपलब्धि है और इसका श्रेय जिला प्रशासन के साथ-साथ झारखंड उच्च न्यायालय के प्रभारी मुख्य न्यायधीश जस्टिस डीएन पटेल और उनकी टीम को जाता है. 

चीफ जस्टिस ने कहा था, 1.86 अरब की संपत्ति का वितरण शिविर की सफलता
कार्यक्रम में बोलते हुए झारखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल ने कहा था कि पिछले 15 दिनों से प्रचार-प्रसार कर ग्रामीणों को जागरुक किया गया. प्रशासन एक लाख से अधिक लाभुकों के बीच 1. 86 अरब रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण कर रहा है. यही इस शिविर की सफलता है. देश से गरीबी दूर हो और लोग बुनियादी आवश्यकताओं को न केवल प्राप्त करें बल्कि खुशहाल भी बनें. 

क्रिमीनल केस दर्ज है रघुवर दास पर
हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि  ऐसे दो मामले हैं, जिनमें रघुवर दास के ऊपर क्रिमीनल केस दर्ज हैं. दोनों मामले जमशेदपुर जिले के हैं. पहला मामला 2007 का है. 24 अप्रैल 2007 को कदमा पुलिस स्टेशन में रघुवर दास के खिलाफ कांड संख्या- 44/2007 दर्ज किया गया था. इस मामले में रघुवर दास पर आईपीसी की धारा 147, 149, 363, 452, 342, 324 और 225 के तहत आरोप है.  कॉउंसिल ऑफ द स्टेट के मुताबिक जांच अभी तक लंबित है. दूसरा मामला 24 अप्रैल 2013 का है. टेल्को थाना क्षेत्र में रघुवर दास के खिलाफ कांड संख्या- 145/2013 दर्ज किया गया था. मामले में रघुवर दास पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 323 और 186 के तहत केस दर्ज है. इस मामले की जांच भी अभी लंबित है.

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सेपेरेशन ऑफ पावर का मामला
याचिका में कहा गया है कि संविधान में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तंभ माना जाता है. संविधान के मुताबिक किसी भी लोकतंत्र की सफलता के लिए जरूरी है कि उसके ये सभी स्तंभ मजबूत हों. सभी अपना-अपना काम पूरी जिम्मेदारी व निष्ठा से करें. यहां विधायिका जहां कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करता है और न्याायपालिका कानूनों की व्याख्या करता है और उनका उल्लंउघन करने वालों को सजा देता है. याचिकाकर्ता के मुताबिक न्यायपालिका और कार्यपालिका एक साथ मिलकर काम नहीं कर सकता है. संविधान की तरफ से दोनों को अलग-अलग अधिकार दिए गए हैं. ऐसे में न्यायपालिका और कार्यपालिका का मंच साझा करना अपने आप में पावर ऑफ सेपेरेशन का मामला बनता है.

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