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पूर्व नक्सली जगा रहा है शिक्षा का अलख

गया (बिहार), 28 दिसम्बर | यूं तो आपने कई तरह के विद्यालय देखे होंगे लेकिन बिहार के गया जिले के नक्सल प्रभावित कहे जाने वाले इलाके में एक ऐसा विद्यालय चल रहा है जिसे एक पूर्व नक्सली चला रहा है। खास बात यह है कि यह नक्सली भिक्षाटन कर यह विद्यालय चला रहा है।

माओवादियों व टीपीसी के बीच मुठभेड़, 12 मरे

|| रणजीत वर्मा ||
रांची : भाकपा (माओवादी) संगठन को एक बड़ा झटका लगा है। उसके छह शीर्ष सदस्‍यों समेत दस लोग मार दिये गये हैं। इसी समूह से 2002 में छिटककर अलग हुए तृतीय प्रस्‍तुति कमिटी (टीपीसी) के उग्रवादियों ने चक्रव्‍यूह रचकर उनका कत्‍ल कर दिया। जिला पुलिस ने कहा कि इस संघर्ष में दो लोग और मारे गये हैं जो टीपीसी के सदस्‍य हो सकते हैं। छनकर आ रही खबरों के मुताबिक माओवादियों के इस दस्‍ते में टीपीसी का खबरी शामिल था जो इन्‍हें फंसाने की योजना रच चुका था।

बिना पानी खुद उड़ जाएंगे रंग

लखनऊ : अगर आप होली में महज इसलिए रंग खेलने से परहेज करते हैं कि कहीं रंग आपके चेहरे की रंगत न चुरा ले तो चिंता मत कीजिए। बाजार में इस बार ऐसे प्राकृतिक रंग उपलब्ध हैं जो एक घंटे तक आपके चेहरे को रंगीन रखेंगे और उसके बाद पानी से धोने की जरूरत नहीं है, रंग खुद उड़ जाएंगे।

मुम्बई हमले में संजय के जुर्म की पुष्टि

नई दिल्ली | सर्वोच्च न्यायालय ने 1993 में हुए मुम्बई बम विस्फोट के मामले में हथियार अधिनियम के तहत बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के जुर्म की पुष्टि की और उन्हें पांच साल की सजा सुनाई। उनसे चार सप्ताह के अंदर आत्मसमर्पण करने को कहा गया है। हथियार अधिनियम के अंतर्गत गैरकानूनी तरीके से हथियार रखने के दोषी पाए गए संजय को टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटिज (टाडा) अदालत ने छह साल की सजा सुनाई थी।

लड़कियां खौफ से करती हैं बंधुवा मजदूरी

रणजीत वर्मा || रांची ||
बीते सप्ताह तीन ऐसे मामले सामने आये जिससे पता चलता है कि नाबालिग लड़कियों को घर की मजबूरी या मालिक की जबरदस्ती की वजह से घरेलू नौकर बनाकर रखना आम बात हो गयी है। मामला रसूखदार परिवार का हो तो केस दर्ज करने से पुलिस भी घबराती है।

पहला वाकया दो मार्च का है जब कांग्रेस पार्टी के नेता और प्रमुख व्यवसायी में गिने जानेवाले निवारणपुर निवासी चंचल चटर्जी के घर से नाबालिग सुषमा भागी भागी थाना पहुंची, मारपीट, ज्यादतियों की रिपोर्ट लिखवाने। कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक उस वख्त लड़की मात्र कुछ चिथड़ों में लिपटी थी। अब कांग्रेस पार्टी की एक जांच कमेटी बनायी गयी है जो इस मामले पर रिपोर्ट पेश करेगी।

इस बीच सुषमा को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने प्रस्तुत कर परिजनों को सौंप दिया गया। आरोपी चंचल चटर्जी पर धारा 323 (मार पीट), 370 (गुलाम की तरह काम करवाना), 374 (गैरकानूनी तरीके से सहमति के बिना काम करवाना), 23 (जुविनायल जस्टिस एक्ट) जेजे अधिनियम और धारा 14 (बाल श्रम निषेध अधिनियम) के तहत मामला दर्ज हुआ है। गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इधर, चार मार्च(2013) की देर शाम, यानी पहली घटना के दो दिन बाद धुर्वा इलाके से दो बच्चियों को सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने मुक्त करवाया। उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सुकरो कुमारी (12 साल) को अशोक राय के क्वार्टर नंबर सीडी 79/खखख से जबकि सुनिता कुमारी (12 साल) को सीडी 78/खखख से बाहर निकाली गयीं। लगाये गये आरोपों के मुताबिक दोनों बच्चियों को घर में बंद रखकर बंधुवा मजदूर की तरह काम करवाया जाता था। बाहर जाने आने की छूट नहीं थी। दोनों बच्चियों का बयान लेने के बाद श्रम न्यायालय में बाल मजदूरी करवाने के जुर्म में मालिकों पर 20 हजार रूपया जुर्माना लगाया। दोनों बच्चियों को परिवारवाले वापस घर ले गये। जिसमें एक बच्ची की शादी करवा दी जायेगी।

सुकरो खूंटी में कर्रा प्रखंड में सांगोर की रहनेवाली है। उसने न्यूज विंग को बताया कि धुर्वा के सेक्टर दो में अशोक राय के घर से उसे एक योजना बनाकर छुड़ाया गया। पिछले साल (2012) दीपावली से पहले उसे घर का काम करने रांची लाया गया। सुकरो ने कहा, पिताजी ने किसी दूसरे से कर्जा लिया था। हम सोचे थे कि काम करके पैसे ...। पर हम किसी के घर नहीं आये ...। उसे जेली नाम के स्थानीय व्यक्ति ने पैसे का लालच देकर रांची लाया। यह कहते हुए कि इससे उसके पिता का उधार चुकता हो जायेगा। पिता से कहा गया कि बेटी को अच्छा खाना पीना मिलेगा। सुकरो ने आगे कहा कि गांव के स्कूल में दूसरे क्लास में पढ़ती थी। पर रांची आने के बाद पढाई छूट गयी। उसने बताया कि सर और मैडम घर पर पोछा, छाड़ू, बर्त्तन के अलावा घर के बाकी सारे काम करवाते थे। सुनीता आगे बताती है कि मारने के बाद वह गुस्सा होकर एकदम शांत हो जाती, एकदम चुपचाप। इसपर भी उसे पीटा जाता। थप्पड़ मारा जाता।
दूसरी बच्ची खुर्रा (गढवा) से आयी सुनीता संजीत नाम के आदमी के साथ मकर संक्रांति के दिन रांची लायी गयी। उसे अच्छे अच्छे कपड़ों का लालच दिया गया। यहां धुर्वा स्थित सीडी 78/खखख में राकेश सिंह के घर का सारा काम कर रही थी। जैसा उसने बताया कि मालिक उससे तेल मालिश करवाते थे। कुछ गलती करने पर पिटाई की जाती थी। खाने को आलू, चावल, रोटी मिलता था। घर पर उसे ज्यादा खाना खाने का ताना सुनना पड़ता। उसने आगे कहा कि हम विरोध नहीं करते थे। वो लोग बड़ा बड़ा आदमी है तो कैसे बोलेंगे?

पोक्टा कानून के तहत दर्ज हो मामला : बैद्यनाथ
दीया सेवा संस्थान के सदस्य बैद्यनाथ कुमार ने कहा कि इन क्वार्टरों में बच्चों को सेक्सुअल अब्यूस किया जाता था। यानी उनके सामने मालिक का कपड़े खोलकर आना। अपने शरीर में तेल लगवाना, मालिश करवाना। ये पूरी तरह से सेक्सुअल अब्यूस का मामला बनता है। इसके तहत पोक्टा कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए्। जिसमें आरोपियों को खुद को निर्दोष साबित करना होता है। रांची में चाइल्डलाइन हालत देखिये कि ये सालों से बंद है। बाल संरक्षण आयोग का गठन हुआ है लेकिन वो भी कागजों में सिमटकर रह गया है। अगर बाल अधिकार का हनन इसी प्रकार होता रहा तो बाल अधिकार संरक्षण आयोग का कोई मतलब नहीं रहा।

केस रजिस्टर्ड करवाना टेढी खीर : शालिनी संवेदना
लोक स्वर संस्था शालिनी संवेदना का बच्चियों को मुक्त करवाने में तत्परता दिखायी इस दौरान उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कर्रा की रहनेवाली सुकरो को लानेवाला सुरेन्द्र स्वासी का पेशा ही है कि लड़कियों को बेचना। जबकि सुनीता को लानेवाला संदीप उरांव गढवा में सहिया का बेटा है। उसने भी बच्ची को रांची में बेचा दिया था। शालिनी ने कहा कि दानों लड़कियों के अभिभावकों की काउंसीलिंग किया गया। ताकि उन्हें आगे पढाया जा सके। पर वो राजी नही हुए्। उन्होंने कहा कि पुलिस केस रजिस्टर्ड नहीं कर रही थी। इससे पहले कुछ दबंग लोगों ने हमारे घर पर हमला किया गया। पूरी व्यवस्था का ये हाल है। आखिरी में केस सीआईडी सेल में बयान लेने के बाद एसएसपी को सौंपा गया। बाद में एसएसपी ने थाना में केस रजिस्टर्ड दर्ज करने का आदेश दिया। तब केस रजिस्टर्ड हुआ।

छोटे परदे पर भी नजर आयेगी - तनुश्री दत्ता

मुंबई: अभिनेत्री तनुश्री दत्ता बड़े परदे पर धमाल मचाने के बाद अब अपना रूख छोटे परदे की तरफ कर ली है। ‘आशिक बनाया आपने’ व ‘चॉकलेट’ जैसी चर्चित फिल्मों से बॉलीवुड में हॉट और सेक्सी इमेज कायम करने के बाद अब तनुश्री धारावाहिक ‘हमने ली है शपथ’ में नजर आयेंगी।

गीता के संदेशों का गवाह वट-वृक्ष उद्धार की जोह रहा बाट

कुरुक्षेत्र | हरियाणा के कुरुक्षेत्र इलाके में सैकड़ों वर्ष पुराने एक वट वृक्ष को वन विभाग के विशेषज्ञों ने पुनर्जीवित करने का उपाय खोज लिया है। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी वट वृक्ष के नीचे अर्जुन को गीता का महान उपदेश दिया था।

स्वतंत्र पुलिस या पुलिसिया राज?

|| श्रीनिवास || 
भारत में तरह तरह के सुधारों - राजनीतिक सुधार, न्यायिक या कानूनी सुधार, प्रशासनिक सुधार, चुनाव सुधार तथा पुलिस सुधार आदि - की चर्चा अक्सर होती रहती है। दिल्ली में हुए गैंग रेप के बाद पुलिस सुधार पर अधिक जोर है। उस हादसे के बाद गठित जस्टिस वर्मा कमेटी ने जो सुझाव दिये, उनमें भी एक प्रमुख सुझाव यह था कि पुलिस को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर दिया जाये; और इस पर, टीवी चैनलों पर जारी बहसों के दौरान, अमूमन आम सहमति दिख रही है। इसलिए कि लोगों की नजर में राजनीतिक जमात की साख बेहद खराब हो चुकी है; और देश-समाज की तमाम गड़बड़ियों के लिए हम सत्ता प्रतिष्ठान या अपने शासकों को जवाबदेह मानने लगे हैं। नतीजतन हम यह भी भूल जाते हैं कि इसी पुलिस पर हम आये दिन संवेदनहीन, भ्रष्ट, जनविरोधी व जुल्मी होने के आरोप लगाते रहते हैं। तो क्या पुलिस में ये सारी गड़बड़ियां महज इस कारण हैं कि वह सरकार, यानी राजनीतिक नेतृत्व के नियंत्रण में है? और क्या नियंत्रण मुक्त होते ही हमारी वही पुलिस ईमानदार, जनपक्षी और सक्षम हो जायेगी?

न्‍यूज विंग साप्‍ताहिक समाचार पत्र का 35वां अंक बूक स्‍टॉल पर

रांची: न्‍यूज विंग साप्‍ताहिक का 35वां अंक बुक स्‍टॉल पर पहुंच चुका है। इस अंक की मुख्‍य रिपोर्ट है, झारखंड के खूंटी में नक्‍सलियों की फिर से दस्‍तक। पुलिस महकमा ने अभी पिछले दिनों यहां दस उग्रवादियों/नक्‍सलियों को आत्‍मसमर्पण करवाया था।

ऐसा लगा कि इस घटना से पुलिस में आत्‍मविश्‍वास बढ़ेगा, लेकिन एकबार फिर से नक्‍सली उसी इलाके में अपना दबदबा बढ़ाने लग गए हैं, बेखौफ! इसके अलावा कई अन्‍य रिपोर्ट और स्‍थायी स्‍तंभ भी।

 

न्‍यूज विंग साप्‍ताहिक समाचार पत्र का 25वां अंक बूक स्‍टॉल पर

न्‍यूज विंग साप्‍ताहिक समाचार पत्र का 25वां अंक बुक स्‍टॉल पर पहुंच चुका है। इस अंक की कवर स्‍टोरी है: महुआ माजी के उपन्‍यास 'मैं बोरिशाइल्‍ला' पर सवाल?' वरिष्‍ठ साहित्‍यकार डा श्रवणकुमार गोस्‍वामी ने पाखी पत्रिका में एक लेख लिखकर इस उपन्‍यास पर सवाल उठाया है कि इसका मूल लेखक कौन है? इस सवाल ने न केवल रांची या झारखंड बल्कि पूरे देश में हिंदी जगत में खलबली मचा दी है। महुआ माजी ने डा गोस्‍वामी को कोर्ट में घसीटने की चुनौती दी है। रांची के अखबारों में लगातार सूर्खियां बनती रहीं, लेकिन डा गोस्‍वामी चुप थे। न्‍यूज विंग की पहल पर डा गोस्‍वामी ने चुप्‍पी तोड़ी और एक खास बातचीत में उन्‍होंने बताया कि कैसे उन्‍हें यह पता चला कि मैं बोरिशाइल्‍ला की मूल लेखक महुआ नहीं कोई और भी है। पूरे विवाद की पड़ताल पढि़ये न्‍यूज विंग के 25वें अंक में..