नई दिल्ली, 21 फरवरी | शहरों में भारतीय नारीत्व के विचारों में बदलाव आया है। अब महिलाओं के लिए 'पॉवर मॉम' जैसे विशेषण इस्तेमाल किए जाने लगे हैं। अब तक पुरुषों के गढ़ रहे क्षेत्रों में महिलाएं प्रवेश करने लगी हैं, लेकिन आज भी इन शहरी महिलाओं और ग्रामीण महिलाओं के बीच बातचीत के दरवाजे बंद हैं। यह कहना है प्रख्यात पत्रकार और लेखिका मृणाल पांडे का।
नई दिल्ली, 22 जनवरी | भारतीय मूल के अमेरिकी विशेषज्ञ श्रीनिवास वर्धन का मानना है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली में लचीलापन नहीं हो पाने के कारण यहां अच्छे गणितज्ञों की कमी है।
पुणे, 1 जनवरी | आध्यात्मिकता भारत की जड़ों में इस कदर बसी है और उसे यहां से कभी खत्म नहीं किया जा सकता। यह कहना है क्रिया योग और सनातन धर्म के प्रसार में छह दर्शकों का समय गुजार चुके प्रमुख अमेरिकी योग गुरु स्वामी क्रियानंद का।
शिमला, 30 दिसम्बर | हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्रभावी लोकायुक्त व्यवस्था के साथ राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इस संस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वह अन्ना हजारे तथा उनके सहयोगियों से सुझावों के लिए उनके सम्पर्क में हैं।
New Delhi, Dec 26 : Minister for Overseas Indian Affairs Vayalar Ravi has warned that if basic principles were incorrectly applied, a Lokpal can potentially "destabilise the nation".
पटना, 22 दिसम्बर | बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभयानंद का मानना है कि आर्थिक अपराध ही भ्रष्टाचार की जड़ है। यदि इस पर लगाम लग जाए तो कई चीजें स्वत: ठीक हो जाएंगी।
|| डीएन गौतम से विशेष बातचीत || झारखंड पुलिस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा. सवाल दक्षता पर नहीं, लेकिन महकमा लुंज-पुंज दिखाई देने लगे तो सांगठनिक क्षमता पर उंगली उठेगी. जहां मातहत हवलदार की गुहार लगाती विधवा अफ़सरों के दर पर सालों भटकती रहे, वहां बेचारी जनता की दशा का अंदाजा लगाइए.
|| जी के पिल्लई, (सीएमडी, एचईसी) से किसलय की बातचीत ||
दस साल में, बदहाली, ढुलमुल राजनीति, कुशासन, भ्रष्टाचार, जनµधन की बंदरबांट झारखंड की पहचान बन गयी है. ऐसा पहले नहीं था। इलाका उपेक्षित जरूर था लेकिन यह हाहाकार नहीं था. याद कीजिए, जब इस इलाके की पहचान एचईसी से होती थी. 1958 में स्थापित उन संस्थानों में से एक जिसने जवाहर लाल को युगद्रष्टा की उपाधि दिलायी थी.
|| डा मुंडा से किसलय की बातचीत ||
राज्यसभा सांसद डा रामदयाल मुंडा को लोग राजनेता कम, शिक्षाविद् और झारखंड-मर्मज्ञ के रूप में अधिक जानते हैं. 14 साल अमेरिका में प्रोफेसर रह चुके सत्तर वर्षीय डा मुंडा आज भी टिपिकल आदिवासी सी सरलता और बेबाकी के लिये जाने जाते हैं. स्थानीय लोक संस्कृति और संगीत की चर्चा होते ही मुंडा केवल एक भावुक गंवई आदिवासी नजर आते हैं.