मरीजों को असहनीय तकलीफ दे रहा रिम्स का बर्न वार्ड, चार एसी खराब, पंखे भी बेकाम

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 16:33

Ranchi : गर्मी के मौसम में आग लगने की समस्या आए दिन देखने को मिलती है. वहीं आग से जुड़े कई हादसे भी सामने आते रहते हैं. झारखंड में आग से झुलसे लोग बेहतर इलाज के लिए रिम्स के बर्न वार्ड में आते हैं, लेकिन रिम्स में आने वाले मरीजों को न बेहतर इलाज  मिल पा रहा है और न उनकी समस्कीयाओं को संजीदगी से लिया जा रहा है. प्रबंधन उनके जख्म को और नासूर बना रहा है. बर्न वार्ड में बेड की संख्या 18 है. सभी बेड पर आग से झुलसे मरीजों का इलाज तो हो रहा है, लेकिन मरीजों को असहनीय वेदना से गुजरना पड़ रहा है. बता दें कि जलने व झुलसने वाले मरीजों की त्वचा में काफी जलन होती है, ऐसे में उन्हें अस्पताल में एसी युक्त वार्ड में रखा जाता है ताकि ठंडक से जलन कम हो. लेकिन रिम्स में व्यवस्था होते हुए भी किसी काम की नहीं.

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छह में चार एसी खराब, प्रबंधन बेपरवाह

गर्मी बढ़ते ही रिम्स के बर्न वार्ड में इलाजरत मरीजों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. इस वार्ड में भर्ती मरीजों की तकलीफ कम होने के बजाय बढ़ गई है. इसकी खास वजह ये है कि बर्न वार्ड में लगे छह एसी में से चार एसी खराब पड़े हैं. वहीं वार्ड में लगे कई पंखे भी केवल देखने के लिए हैं. वार्ड के कुछ पंखे काम नही कर रहे हैं. वार्ड में भर्ती ज्यादातर मरीज 60 से 90 प्रतिशत तक जल जाने के कारण यहां भर्ती हैं.

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बर्न वार्ड में मरीज को पंखा झल रहे परिजन

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किसी ने लगाया टेबल फैन तो कोई हाथ से पंखा झलने को मजबूर

जले हुए मरीज के जख्म को ठंडक देने के लिए परिजनों को घर से पंखा लाने को कहा जा रहा है. हजारीबाग से आए एक मरीज सुमित के परिजन ने कहा कि कई बार नर्स को शिकायत की लेकिन यहां ध्यान देने वाला कोई नहीं है. लिहाजा अपने घर से पंखा लाकर मरीज की जान बचाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं 14 मई को आग से 90 प्रतिशत झुलसी महिला सोनी देवी के परिजन ने कहा कि वार्ड में पंखे तो है, लेकिन बेड तक हवा नहीं पहुंचती है. मजबूरन अपने मरीज को हाथ से पंखा झलना पड़ रहा है.

लालटेन से झुलसी महिला का बुरा हाल

कोडरमा जिले से आयी मरीज शकुंतला लालटेन से झुलस गई थी. आनन-फानन में उसे रिम्स इलाज के लिए लाया गया. महिला के पति ने कहा वार्ड में एसी तो है, लेकिन काम नहीं करता है. केवल वार्ड की दीवारों की शोभा बढ़ा रहा है. एसी ना होने के कारण मरीजों के जख्म ठीक होने की जगह और तकलीफदेह होते जा रहे हैं.

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