मैट्रिक में 10 सालों का सबसे खराब रिजल्ट, 27.5 प्रतिशत की गिरावट, इस बार लड़कों ने लड़कियों को पछाड़ा

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 06/12/2018 - 20:19

Ranchi : झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा जारी रिजल्ट में इस बार कई सालों से जारी लड़कियों के बाजी मार जाने के मिथक को तोड़ दिया है. वहीं दस सालों के इतिहास में मैट्रिक का ये सबसे खराब रिजल्ट साबित हुआ है. लड़कियों का रिजल्ट जहां 57.29 प्रतिशत रहा, वहीं लड़कों का रिजल्ट प्रतिशत 61.79 प्रतिशत रहा.

चौंकाने वाली बात यह है कि लड़कों के मुकाबले परीक्षा में लड़कियां ज्यादा शामिल हुईं थी. कुल छात्रों की संख्या जहां 208701 थी, वहीं लड़कियों की संख्या 219688 थी. जिसमें कुल 128959 लड़के पास हुए, वहीं 125871 लड़कियों ने सफलता हासिल की.

दस साल में 27.5 प्रतिशत गिरा रिजल्ट

झारखंड एकेडमिक काउंसिल से शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने इंटर साइंस और कॉमर्स के खराब रिजल्ट के बाद जवाब तलब किया था. मैट्रिक की खराब रिजल्ट के बाद जैक शायद फिर से जवाब-तलब किया जा सकता है क्योंकि दस साल के इतिहास में जैक बोर्ड का ये सबसे खराब रिजल्ट है. 2008 में जहां छात्रों का सफलता प्रतिशत 86.99 जबकि 2018 में रिजल्ट का प्रतिशत 27.5 गिरकर 59.48 प्रतिशत रह गया है.

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स्टूडेंट्स ने बचा ली राजधानी की लाज, रांची को दूसरा स्थान

जिलावार रिजल्ट के मामले में जहां हजारीबाग पहले पायदान पर रहा, वहीं नक्सल प्रभावित जिला लातेहार को अंतिम स्थान मिला है. रांची के स्टूडेंट्स  का पास प्रतिशत 72.9 रहा. जिलावार दूसरे स्थान पर रहा. इंटर की परीक्षा में रांची जिलावार टॉप 5 में भी नहीं था, जिसके बाद राजधानी की खूब किरकिरी हुई थी. मैट्रिक में बेहतर कर छात्रों ने राजधानी की लाज बचा ली.

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कैटेगरी रिजल्ट में जेनरल के छात्रों ने मारी बाजी

कैटेगरी रिजल्ट में समान्य जाति के छात्रों का पास प्रतिशत 64.58 फीसदी रहा. जिसमें 44752 छात्रों में 28903 बच्चे पास हुए, वहीं कोटिवार में पिछड़ी जाति के छात्र 63.15 प्रतिशत सफल हुए, अत्यंत पिछड़ी के 63.15 प्रतिशत छात्र पास हुए. वहीं एससी के छात्रों का पास प्रतिशत सबसे खराब 50.40 रहा और एसटी छात्रों का पास प्रतिशत 54.21 प्रतिशत रहा.

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