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झारखंड के 1,306 ग्राम पंचायतों में अब भारत ब्राड बैंड लिमिटेड के जरिये मिलेगी इंटरनेट सेवाएं

पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड बिछा रहा है ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क

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400 करोड़ रुपये होंगे खर्च,राज्य में हैं कुल 4,423 ग्राम पंचायत

Ranchi : झारखंड के 1306 ग्राम पंचायतों में अब भारत ब्रॉड बैंड निगम लिमिटेड (बीबीएनएल) के भारतनेट योजना से इंटरनेट सेवाएं मिल पायेंगी. केंद्र सरकार की तरफ से 2011 में शुरू की गयी योजना के अंतर्गत तीन चरणों में झारखंड के 4423 ग्राम पंचायतों में ब्रॉड बैंड सेवाएं शुरू होंगी. झारखंड में इस योजना को लेकर एक स्पेशल परपज वेहीकल (एसपीवी) झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड का गठन किया गया है. यह एजेंसी सूचना प्राद्योगिकी विभाग की एक इकाई है. भारतनेट योजना में अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क केबुल, एरियल फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट नेटवर्क तथा अन्य माध्यमों से ग्रामीण इलाकों में ब्रॉड बैंड की सेवा उपलब्ध कराया जाना है. इसके जरिये पंचायतों में ई-गवर्नेंस, ई-हेल्थ, ई-एजुकेशन, ई-बैंकिंग, इंटरनेट की सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी. सरकार की तरफ से योजना में 400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च किये जा रहे हैं.

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पहले चरण का 80-90 फीसदी काम पूरा

भारतनेट के तहत पहले चरण में 1417 ग्राम पंचायतों को लिया गया था. रांची, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, देवघर और साहेबगंज में ये पंचायत अवस्थित हैं. पहले चरण में 80 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है. अब पहले चरण का फेज-1 प्लस शुरू हुआ है. इसमें धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, लातेहार, लोहरदगा और पलामू जिला शामिल है. अन्य जिलों में फेज-2 के अंतर्गत भारत नेट योजना को अंजाम दिया जायेगा. राज्य के झारखंड कम्युनिकेशन नेटर्वक लिमिटेड की तरफ से प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जा रहा है.

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एक ग्राम पंचायत को मिलेगी एक जीबीपीएस बैंडविड्थ क्षमता की स्पीड

भारत नेट योजना के तहत राज्य के ग्राम पंचायतों में एक गिगाबाइट (जीबीपीएस) क्षमता का बैंडविड्थ उपलब्ध कराया जायेगा. वायरलेस रेडियो के लिए न्यूनतम 100 एमबीपीएस क्षमता का बैंड विड्थ पंचायतों को उपलब्ध कराया जायेगा. राज्य सरकार की तरफ से 24 गुना सात गुना 365 दिनों तक निर्बाध तरीके से ग्रामीणों को इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी. इसके लिए केबुल बिछानेवाली कंपनियों को सात वर्ष तक ऑप्टिकल फाइबर मेंटेनेंस का जिम्मा भी वहन करना पड़ेगा. यह सुविधा वार्षिक रख-रखाव कार्यक्रम के जरिये उपलब्ध होगा.

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