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18 साल में 18 घोटालों से राज्य की छवि दागदार, कई गये सलाखों के पीछे, कई को मिला सत्ता का संरक्षण

अलग राज्य के गठन के बाद राज्यभर में कई ऐसे घोटाले हुए हैं, जिससे राज्य की छवि देशभर में दागदार हुई है.

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Ranchi : झारखंड अलग राज्य के गठन के 18 वर्ष जल्द पूरे होंगे. 15 नवंबर को राज्यभर में झारखंड का स्थापना दिवस समारोह मनाया जायेगा. इसकी तैयारियां भी शुरू हो गयी हैं. अलग राज्य के गठन के बाद राज्यभर में कई ऐसे घोटाले हुए हैं, जिससे राज्य की छवि देशभर में दागदार हुई है. इन घोटालों में शामिल अफसर या तो सलाखों के पीछे हैं अथवा बेल पर हैं. इन घोटालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी रहे एनोस एक्का, भानू प्रताप शाही से लेकर जेपीएससी के तत्कालीन सभी टीम मेंबर, प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुरेंद्र सिंह मंदिलवार, तत्कालीन जेएसइबी अध्यक्ष एचबी लाल (अब स्वर्गीय), पुलिस अफसर पीएस नटराजन समेत अन्य का नाम प्रमुख है. इनके अलावा अलकतरा घोटाला, मनरेगा घोटाला, कौशल विकास मिशन के नाम पर फर्जी प्रशिक्षण दिये जाने का मामला भी है. प्रस्तुत हैं कुछ प्रमुख मामलों के अंश.

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माइनिंग स्कैम

राज्य के बहुचर्चित माइनिंग स्कैम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का नाम शामिल है. इनके दो वर्ष के कार्यकाल (2006 से 2008) में लौह अयस्क और कोयला खदान आवंटन में व्यापक हेरफेर के मामले सामने आये हैं. 4000 करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई की तरफ से की जा रही है. इतना ही नहीं इनके खिलाफ स्पेशल मनी लांड्रिंग का मामला भी चल रहा है, जिसमें दिल्ली में 144 करोड़ की संपत्ति सील की गयी है. श्री कोड़ा को 2013 में गिरफ्तार किया गया था. अब वे बेल पर हैं और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये हैं. इनके साथ अनिल वस्तावड़े, पुनमिया, विनोद सिन्हा और अन्य को भी गिरफ्तार किया गया था.

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जेपीएससी स्कैम

झारखंड लोक सेवा आयोग के घोटाले की जांच 2010 से शुरू हुई थी. इसमें पैसे लेकर 37 से अधिक युवक-युवतियों को बीडीओ, सीओ बनाने का मामला सन्निहित है. आयोग के सदस्य दिलीप प्रसाद, शांति देवी, राधा गोविंद नागेश, तत्कालीन सचिव एलिस ऊषा रानी सिंह, सोहन राम समेत अन्य को मामले में गिरफ्तार किया गया है. गोपाल प्रसाद सिंह ने अगस्त 2011 में न्यायालय के समक्ष आत्मसमपर्ण किया था. इनके कार्यकाल में 172 अधिकारियों को नियुक्त करने की अनुशंसा सरकार से की गयी थी.

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आरआरडीए स्कैम

रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) में नक्शा पास करने से संबंधित घोटाले की जांच सीबीआई की तरफ से की जा रही है. कांड संख्या 3-11 के तहत प्राधिकार के तत्कालीन सचिव सुरेंद्र सिंह मंदिलवार, इस्टेट ऑफिसर अजय शेखर,  दुर्गानंद मिंज, सहायक अभियंता शंकर प्रसाद, बिल्डर विभूति भूषण, विजय कुमार सिंह, विनय प्रकाश पर मामला चल रहा है. इतना ही नहीं एक अन्य मामला भी निगरानी में चल रहा है, जिसमें आरआरडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष समेत बिल्डर जीएस सलूजा के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

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कई पूर्व मंत्री भी रहे हैं दागदार

राज्य के कई पूर्व मंत्रियों पर भी निगरानी, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से कार्रवाई की जा रही है. इसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही, तत्कालीन नगर विकास मंत्री हरिनारायण राय, तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दुलाल भुंईया के नाम प्रमुख हैं. प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से एनोस एक्का, भानू प्रताप शाही के रांची समेत अन्य जगहों (दिल्ली, गुड़गांव, नार्थ ईस्ट) में ली गयी संपत्ति को सीज भी किया गया है. इनपर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करते हुए अकूत संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप चल रहा है.

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पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार भी अछूते नहीं

पूर्व स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार भी भ्रष्टाचार के मामलों से अछूते नहीं रहे हैं. विभागीय सचिव रहते हुए एक खास लॉबी को मदद करने का इनपर आरोप है. हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से इनकी संपत्ति अटैच की गयी थी.

तत्कालीन मुख्य सचिव एके बासू और अपर मुख्य सचिव एके सरकार पर भी गंभीर आरोप

तत्कालीन मुख्य सचिव एके बासू पर खान आवंटन मामले में गंभीर आरोप लग चुका है. इन पर कोयला खदान आवंटन में गलत अनुशंसा करने की पुष्टि सीबीआई ने की थी. श्री बासू के खिलाफ उस समय के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के जरिये कोयला खदान आवंटन की संचिका दिल्ली भेजने की बातें भी कही गयी हैं. सीबीआई की तरफ से किये गये जांच में तत्कालीन खान निदेशक बीबी सिंह समेत अन्य पर भी कार्रवाई की गयी थी. कोयला खदान आवंटन मामले में झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशक आरएस रूंगटा और आरसी रुंगटा के खिलाफ सीबीआई कोर्ट ने दो वर्ष की सजा भी सुनाई थी.

इतना ही नहीं तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एके सरकार, जो कृषि और सहकारिता विभाग के सचिव थे. इन पर कृषि उपकरण खरीद और बीज घोटाले में दागी अधिकारियों को बचाने का गंभीर आरोप लग चुका है. इनके कार्यकाल को जांच एजेंसियों ने संदिग्ध बताया है. लगे आरोपों की वजह से ही श्री सरकार मुख्य सचिव नहीं बन पाये थे.

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संजीवनी बिल्डकॉन घोटाला

राजधानी रांची में संजीवनी बिल्डकॉन घोटाला भी महत्वपूर्ण रहा है. अरगोड़ा अंचल के पुनदाग मौजा में आदिवासियों की जमीन की गलत जमाबंदी करने के मामले की जांच सीबीआई कर रही है. इसमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के रांची, ओरमांझी, रातू और कांके अंचल के अंचल अधिकारियों समेत राजस्व कर्मचारी, अपर निबंधक शहदेव मेहरा का नाम भी शामिल है. तत्कालीन गृह सचिव जेबी तुबिद ने 12 सितंबर 2012 को सीबीआई निदेशक को पत्र लिखकर 100 करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच करने का आग्रह किया था. उस समय मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से इसकी सहमति भी ली गयी थी.

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जेएसईबी घोटाला

झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष एचबी लाल पर ग्रामीण विद्युतीकरण का काम देने में कंपनियों से मोटी रकम की वसूली का मामला भी सामने आया. इन पर आईवीआरसीएल समेत अन्य कंपनियों से काम आवंटित करने में अनियमितता बरतने का आरोप लगा है. निगरानी जांच में जेएसइबी के तत्कालीन अध्यक्ष वीएस वर्मा और अन्य की भूमिका संदिग्ध पायी गयी. सरकार ने अपने फैसले में श्री लाल को हटाकर आईएएस अफसर शिव बसंत को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था. उसी समय बैंक ऑफ इंडिया के नाम से 60 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी देने का मामला भी सामने आया था.

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आईपीएस अफसर पीएस नटराजन भी रहे दागदार

आईपीएस अफसर पीएस नटराजन पर एक जनजातीय महिला के साथ संबंध स्थापित करने के मामले ने पुलिस महकमे की छवि धुमिल की. इन्हें सरकार की तरफ से 24.3.2012 को निलंबित किया गया था. हालांकि अब ये मामले से बरी हो चुके हैं.

बकोरिया कांड

लातेहार के बकोरिया मुठभेड़ कांड ने भी पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है. हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने घटना की सीबीआई जांच कराने के आदेश दिया है. इसमें तत्कालीन डीआईजी हेमंत टोप्पो, एसआई हरिश पाठक के बयान संदिग्ध पाये गये. हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एस जे मुखोपाध्याय ने पुलिस, सीआईडी और कोबरा बटालियन की कार्रवाई के विपरीत पारदर्शी जांच करने का आदेश भी दिया.

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अलकतरा घोटाला

राज्य में अलकतरा खरीद घोटाले में पथ निर्माण विभाग समेत इससे जुड़ी एजेंसियों के 77 अधिकारी और 48 गैर सरकारी व्यक्तियों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है. सीबीआई की तरफ से 125 व्यक्तियों के खिलाफ 22 प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच की जा रही है. इसमें राज्य के एक मंत्री के भाई ज्योति इंदर सिंह, साले अनुज, पूर्व विधायक सतेंद्र तिवारी और पूर्व विधायक के भाई पुरुषोत्तम लाल नामजद अभियुक्त हैं. इन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अलकतरा खरीदने और भुगतान करने का आरोप है.

मनरेगा घोटाला

गुमला में 19 से अधिक स्वंयसेवी संस्थानों को 2008-09 में 13 करोड़ रुपये का भुगतान किये जाने का मामला भी चल रहा है. तत्कालीन उपायुक्त हिमानी पांडेय और राहुल शर्मा के कार्यकाल में गुमला में जैट्रोफा की खेती के लिए स्वंयसेवी संस्थानों को अग्रिम के रूप में जिला प्रशासन की तरफ से भुगतान कर दिया गया था. मनरेगा के तहत पौधारोपण किया जाना था. हालांकि जिला प्रशासन ने सफाई दी है कि जनवरी 2009 में स्वंयसेवी संस्थानों पर दिये गये अग्रिम की वसूली को लेकर सर्टिफिकेट केस भी किये जा चुके थे.

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देवघर भूमि घोटाला

देवघर जिले में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के भूमि घोटाले की भी जांच चल रही है. इसमें 64 सरकारी अफसर और उनके अधीनस्थ कर्मी शामिल हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने घोटाले की जांच के आदेश दिये थे. इतना ही नहीं उन्होंने संताल परगना काश्तकारी अधिनियम के नियमों की अनदेखी कर पाकुड़, साहेबगंज, गोड्डा, देवघर, दुमका और साहेबगंज में जनजातीय आबादी की जमीन की अवैध जमाबंदी करने की जांच का भी आदेश दिया था.

पूर्व सीएम हेमंत सोरेन पर भी चल रहा है मामला

पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है. यह मामला दुर्गा उरांव की तरफ से अरगोड़ा में ली गयी जमीन के विरुद्ध किया गया था. इतना ही नहीं तत्कालीन कृषि मंत्री नलिन सोरेन पर भी आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है.

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130 करोड़ का दवा घोटाला

तत्कालीन राज्यपाल के शंकर नारायण के आदेश के बाद राज्य में 130 करोड़ रुपये के दवा घोटाले की बातें सामने आयीं. उस समय आईएएस अधिकारी शिवेंदू की रिपोर्ट पर डॉ विजय शंकर नारायण सिंह, सचिव डॉ प्रदीप और 19 दवा आपूर्तिकर्ता कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए जांच की जा रही है.

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