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38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को चार महीने से नहीं मिला पैसा, बच्चों की खिचड़ी और दलिया पर भी आफत

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Ranchi : झारखंड के पांच वर्ष तक के 9,98,400 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में खिचड़ी और दलिया खाने में दिक्कतें हो रही हैं. महीने में 25 दिन 38400 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को खिचड़ी और दलिया दिया जाता है. वहीं सात लाख धातृ माताओं को रेडी टू ईट फूड पंजीरी दिया जाता है.

आंगनबाड़ी केंद्रों को चार महीने से उनके खर्च की राशि नहीं मिली है. इससे केंद्र की सेविका और सहायिका जैसे-तैसे केंद्र संचालित कर रही हैं. अब उन्हें राशन दुकानदार भी उधार में चावल, दाल और अन्य सामग्रियां नहीं दे रहे हैं.

सरकार प्रत्येक बच्चे के हिसाब से आंगनबाड़ी केंद्रों को खिचड़ी की सामग्रियों की खरीद करने के लिए चार रुपये उपलब्ध कराती है. एक केंद्र में 26 बच्चे औसतन पहुंचते हैं. इन केंद्रों में उन्हें खिचड़ी, दाल-भात के अलावा अंडा भी दिया जाता है. पर अंडे खिलाने का काम अप्रैल के बाद से बंद है.

महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से केंद्रों में 300 दिनों तक बच्चों और धातृ माताओं को पूरक पोषाहार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. केंद्र चलानेवाली सेविका, सहायिका की परेशानी समय पर राशि नहीं मिलने से और बढ़ जाती है.

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वाउचर और बिल दिखाने पर भेजा जाता है पैसा

सरकार की तरफ से आंगनबाड़ी चलानेवाली सेविका और सहायिका को यह निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी राशन दुकानदार से चावल, दाल, नमक और मसाले की खरीद से संबंधित बिल प्रपत्र अवश्य लें.

इस बिल प्रपत्र का सत्यापन जिलों में पदस्थापित जिला बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) करते हैं और उस पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी का अनुमोदन लिया जाता है. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी की अनुशंसा के बाद ही आंगनबाड़ी केंद्रों को बिल का भुगतान किया जाता है.

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विभाग की दलील

महिला और बाल विकास विभाग के अवर सचिव लालो प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि सभी जिलों को केंद्र के संचालन संबंधी राशि आवंटित कर दी गयी है. पूर्व में अनुमति नहीं मिलने और आदर्श आचार संहिता के लागू रहने की वजह से जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के पास आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन का पैसा नहीं भेजा जा सका था.

मई माह के अंत में राशि सभी जिलों में भेज दी गयी है. जिला स्तर पर ही केंद्रों की वास्तविक मांग के अनुरूप राशि आवंटित करने का निर्देश भी दिया गया है.

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