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70 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से बनेंगे सिंदरी और बरौनी में हर्ल के उर्वरक कारखाने

सिंदरी में 6500 करोड़ से बन रहे खाद कारखाना का निर्माण समय पर पूरा करने के लिए समीक्षा बैठक हुई

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Dhanbad : यूरिया के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने हर्ल की सिंदरी और बराैनी इकाई को समय पर पूरा करने की कवायद तेज कर दी है.

सिंदरी में 6500 करोड़ की लागत से बन रहे खाद कारखाना का निर्माण समय पर पूरा करने के लिए गुरुवार को समीक्षा बैठक हुई. बैठक में स्थानीय इकाई के साथ-साथ बरौनी इकाई की भी समीक्षा की गयी.

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फ्रांस व तुर्की देशों से आये हुए डेलिगेट्स के साथ प्रोजेक्ट की प्रगति का निरीक्षण किया गया तथा एल एंड टी व पीडीआइएल कंपनियों के साथ सिंदरी व बरौनी प्रोजेक्ट का रिव्यू भी किया गया.

हर्ल के सलाहकार एनटीपीसी के एके झा ने देश को यूरिया के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए समय से सिंदरी और बरौनी इकाई पूरा करने का निर्देश दिया.

बैठक में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (हर्ल) के सलाहकार सह पूर्व सीएमडी, एनटीपीसी के एके झा, एमडी हर्ल एके गुप्ता, सीजीएम बरौनी अतुल तिवारी, हेड बरौनी और सिंदरी प्रोजेक्ट दिप्तेन राय, जीएम मुख्यालय अनिल वर्मा, हर्ल सिंदरी के वरीय महाप्रबंधक एमसी कर्ण के  अलावा फ्रांस की कंपनी टेक्निप और टेक्निप के भारतीय सहयोगी लार्सन एवं टूब्रो के उच्च पदाधिकारियों ने भाग लिया.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2018 को हर्ल की सिंदरी इकाई की नींव रखी थी. इसके बाद कारखाना का निर्माण चल रहा है. 2021 में कारखाना से यूरिया और अमोनिया उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.

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मेक इन इंडिया के तहत हर्ल प्रोजेक्ट

समीक्षा बैठक और साइट निरीक्षण के उपरांत हर्ल एमडी एके गुप्ता व हर्ल सिंदरी प्रोजेक्ट के अपर महाप्रबंधक मुकेश चंद्र कर्ण ने संयुक्त रूप से एसएमपी हर्ल गेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि इस प्रोजेक्ट में लगने वाले लगभग 70 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी होंगे.

उन्होंने कहा कि देश में बनने वाले सामान गोदरेज जैसी कंपनियों में तैयार हो रहा है, वहीं कुछ हिस्सा जापान, जर्मनी व तुर्की जैसे देशों में बन रहा है. उन्होंने बताया कि आगामी नवंबर 2019 तक टर्बाइन सिंदरी आ जायेगी.

दो से ढाई हजार मजदूर कार्यरत होंगे

हर्ल एमडी एके गुप्ता के अनुसार हर्ल सिंदरी प्रोजेक्ट अत्यंत आधुनिक तकनीक से लैस होगा. इसलिए इसमें स्थायी कर्मचारियों की संख्या मात्र 350 होगी. बाकी सभी विभागों में रख-रखाव के लिए आउटसोर्सिंग की मदद ली जायेगी.

इसमें स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से स्थानीय लोगों को महत्ता मिलेगी. हर्ल एमडी एके गुप्ता ने बताया है कि अभी वर्तमान स्थिति में 1500 मजदूरों में 900 मजदूर स्थानीय हैंं जो व्यवस्थित रूप से कार्य कर रहे हैं और प्रोजेक्ट के पूरा होने तक लगभग दो हजार से ढाई हजार मजदूर कार्यरत होंगे.

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स्किल डेवलपमेंट का कार्य होगा 

हर्ल एमडी एके गुप्ता के अनुसार भविष्य में स्थानीय स्तर पर एजेंसी के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट का कार्य किया जायेगा. इसमें फीटर, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डिंग सहित अन्य विभागों के स्किल डेवलपमेंट की जानकारी स्थानीय लोगों को दी जाएगी.

फिलहाल हर्ल प्रोजेक्ट में मैनेजर व चीफ मैनेजर जैसे 269 पदों के लिए बहाली निकाली गयी है.इनकी बहाली प्रक्रिया दिल्ली मुख्यालय से होगी.

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के नियमानुसार सीएसआर की पॉलिसी बनायी जा रही है, जिससे प्रोजेक्ट से सटे लोगों को फायदा मिलेगा.

एफसीआइ आवासों के खाली कराने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हर्ल प्रोजेक्ट एफसीआई सिन्दरी से आवासों को लीज पर ले रही है और हर्ल की कॉलोनी बनने के बाद इन आवासों को खाली कर दिया जायेगा. उन्होंने चिकित्सा पर बात करते हुए कहा कि इमरजेंसी के लिए पांच डॉक्टरों की टीम सहित चिकित्सा सुविधा आगामी 2021 तक शुरू की जायेगा. वैसे तो यह सुविधा सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही होगी लेकिन विशेष परिस्थितियों में इसे स्थानीय लोगों को भी मुहैया कराया जायेगा.

हर्ल सिंदरी प्रोजेक्ट में कार्यरत मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी पर उठ रहे सवालों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मजदूरों को शत प्रतिशत बैंक पेमेंट किया जायेगा. इसके लिए शत प्रतिशत मजदूरों का खाता बैंक में खोल दिया गया है.

जन अधिकार मंच ने किया हर्ल प्रबंध निदेशक का स्वागत

हर्ल के निर्माणाधीन खाद कारखाने के प्रबंध निदेशक एके गुप्ता के सिंदरी आगमन पर शिष्टाचारवश सामाजिक संगठन जन अधिकार मंच के सदस्यों ने बुके तथा झारखंडी परिधान देकर स्वागत किया. खाद परियोजना के ससमय पूरे होने हेतु हर संभव स्थानीय मदद का आश्वासन दिया.

मंच के अध्यक्ष रंजीत कुमार ने सभी सहयोगियों का परिचय प्रबंध निदेशक से कराया. इस अवसर पर भाजपा के राकेश तिवारी, मनोज मिश्रा, झाविमो के रविश्वर मरांडी, अजय पाठक, देवनंदन सिंह, आजसू के पवन शर्मा, इंद्र मोहन सिंह, राजकुमारी, संपा शील, उमा देवी, धर्मेंद्र सिंह, विनोद राम, राम जतन राम, सुनिल प्रसाद, विक्रम सिंह आदि मौजूद थे. कार्यक्रम के अंत मे प्रबंध निदेशक को सिंदरी की समस्या से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया.

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