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गिरिडीह के रण के लिए एक साल से तैयारी कर रही थी आजसू पार्टी, ग्रास रूट लेवल पर स्ट्रक्चर को मजबूत किया

छह विधानसभा के चार विधायकों का है साथ, तीन बीजेपी के और एक आजसू के हैं विधायक

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Ranchi: आजसू पार्टी अपने उम्मीदवार को दिल्ली भेजने की योजना बना चुकी थी. गिरिडीह, रांची और हजारीबाग पहली डिमांड थी. इसलिए आजसू ने गिरिडीह के रण में जाने की तैयारी साल भर पहले से ही शुरू कर दी थी. इसके लिए पार्टी सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो और चंद्रप्रकाश चौधरी ने स्टेप बाई स्टेप रणनीति तैयार की. क्षेत्रीय दल होने के कारण पहले गिरिडीह के सभी विधानसभा क्षेत्रों में कैडर स्ट्रक्चर को मजबूत किया. एक बूथ 25 यूथ कार्यक्रम को अंजाम तक पहुंचाया. लगभग 2300 बूथ में 57500 कार्यकर्ताओं को तैयार किया. तब गिरिडीह सीट के लिए दावा ठोंका.

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पिछली हार से भी लिया सबक

पिछले लोकसभा चुनाव में मिली हार से भी पार्टी ने सबक लिया. लेकिन इस बार चुनावी फिजां बदल चुकी है. इस बार आजसू एनडीए फोल्डर में है. इस नाते बीजेपी का पूरा समर्थन मिला है. फिलहाल गिरिडीह की छह विधानसभा सीटों में से चार सीटों का समर्थन आजसू के साथ है. इसमें एक विधानसभा सीट टुंडी से आजसू के विधायक राजकिशोर महतो हैं. दो विधायक झामुमो के हैं. गोमिया से योगेंद्र महतो और डुमकी से जगरनाथ महतो विधायक हैं. हालांकि गोमिया में आजसू मजबूत स्थिति में है. उपचुनाव में आजसू के उम्मीदवार लंबोदर महतो दूसरे स्थान पर रहे थे.

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नेक टू नेक है फाइट

गिरिडीह सीट आजसू के लिए प्रतिष्ठा का विषय है. इस सीट में इस बार दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना है. महागठबंधन की ओर से झामुमो के जगरनाथ महतो उम्मीदवार हैं. झामुमो को महागठबंधन में शामिल दलों का भी साथ मिलेगा. खास कर झाविमो और कांग्रेस का साथ मिलेगा. पिछले चुनाव में झाविमो को 57380 वोट मिले थे. जबकि झामुमो को 351600 वोट मिले थे. इस तरह अगर दोनों दलों के वोटों को जोड़ा जाए तो कुल 408980 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी के वर्तमान सांसद रवींद्र पांडेय को 391913 वोट मिले थे और आजसू के उम्मीदवार डॉ यूसी मेहतो को 55531 वोट मिले थे. दोनों दलों के वोटों को अगर जोड़ा जाये तो कुल 447444 वोट होते हैं. ऐसे में गिरिडीह में दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना है.

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विपक्ष को घेरने का भी खींचा है खाका

एनडीए ने विपक्ष को घेरने का भी खाका खींचा है. बैठक में तय हुआ है कि आजसू, बीजेपी और लोजपा के कार्यकर्ता एक दूसरे के साथ समन्वय बना कर कर काम करेंगे. इन दलों के कार्यकर्ता भी बूथ स्तर पर रहेंगे. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचायेंगे. आजसू खुद गिरिडीह की मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे के साथ मैदान में है.

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