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18 साल बाद सरकार निजी संस्थानों के लिए बना रही है झारखंड एफिलिएशन पॉलिसी

झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने तैयार किया प्रारूप, शासी निकाय की बैठक से हुआ पारित

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Ranchi: झारखंड के निजी संस्थानों को समय पर मान्यता, एफिलिएशन देने के लिए 18 साल बाद अब सरकार एफिलिएशन पॉलिसी बना रही है.

सरकार की एजेंसी झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी की तरफ से इसका प्रारूप तैयार किया गया है. टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शासी निकाय ने 50 पन्नों की नीति को पारित कर दिया है.

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अब 28 जून को राज्य सरकार के उच्च तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास विभाग की एग्जिक्यूटिव कमिटी के पास नीति को रखा जायेगा. इसके बाद कैबिनेट से झारखंड एफिलिएशन पॉलिसी 2019 की सैद्धांतिक सहमति भी ली जायेगी.

यह पहली बार हो रहा है कि सरकार एफिलिएशन के मामले में आनेवाली अड़चनों को दूर कर एक पारदर्शी नीति बना रही है. इसमें एफिलिएशन के लिए विश्वविद्यालयों से ली जानेवाली रिपोर्ट की जगह उच्च स्तरीय समिति बनायी जायेगी. नीति के राज्य भर में लागू होने के बाद संस्थानों को दो तरह का एफिलिएशन प्रदान किया जायेगा.

इसमें एआइसीटीई की मान्यता के अलावा नैक की रेटिंग को भी प्राथमिकता दी जायेगी. नैक से एक प्लस की रेटिंग पानेवाले संस्थानों को कंटीन्यूड एफिलिएशन दिया जायेगा.

इतना ही नहीं, अन्य योग्य संस्थानों कों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर मान्यता मिले. यह सरकार का फोकस रहेगा.

अब तक दो जगहों से दी जाती रही है मान्यता

राज्य के निजी संस्थानों (इंजीनियरिंग, डिप्लोमा, होटल मैनेजमेंट, बीएड, मैनेजमेंट कोर्स चलानेवाले इंस्टीट्यूट्स) को दो जगहों से एफिलिएशन दिया जा रहा है.

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इसमें संस्थानों को संबंधित प्रमंडल में अवस्थित विश्वविद्यालयों से एक्रीडिटेशन की सहमति दी जाती है. इस सहमति के बाद प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट पर झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी संस्थानों को मान्यता देती है.

जेटीयू की तरफ से राज्य के एक वर्ष की मान्यता दी जाती है. इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से ली गयी मान्यता को आधार माना जाता है. मान्यता प्रदान करने के लिए संस्थानों को एक लाख रुपये का शुल्क भी सरकारी खाते में जमा करना पड़ता है.

सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो छह महीने से लेकर एक वर्ष के भीतर जेटीयू से मान्यता दिये जाने की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं.

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